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सिंधु घाटी सभ्यता ।। भाग - 2 ।। प्रमुख स्थल

 
Sites of indus valley civilization




सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल

Sites of indus valley civilization.

अब तक सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित लगभग 1500 से अधिक स्थल खोजे जा चुके हैं।
• भारत - 900+         • पाकिस्तान - 600+
• प्रादेशिक रूप से गुजरात में सबसे ज्यादा पुरास्थल लगभग 200+ खोजें गए हैं।
• अफगानिस्तान में दो स्थल शोर्तुगाई और मुंडीगाक खोजे गए हैं।

नोट:- भिर्दाना (हरियाणा) अब तक का खोजा गया सबसे प्राचीन स्थल है।

क्षेत्रफल की दृष्टि से हड़प्पाकालीन नगरों का क्रम:-
1.मोहनजोदड़ो  2.हड़प्पा      3.गनवेरीवाला
4.धौलावीरा      5.राखीगढ़ी   6.कालीबंगा

इन 6 नगरों को बड़े नगर की संज्ञा दी गई है।

प्रश्न.सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल है ? - मोहनजोदड़ो (पाकिस्तान)

प्रश्न.सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे छोटा स्थल है ? - अल्लाहदीनो

प्रश्न.सिंधु घाटी सभ्यता का भारत में सबसे बड़ा स्थल है ? - धौलावीरा

नोट:- स्थलों की खुदाई में प्राप्त अवशेषों के आधार पर सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में अनुमान लगाए गए हैं।
अभी तक सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि पढ़ी नहीं गई है।


हड़प्पा की खोज एवं जानकारी

उत्खननकर्ता - दयाराम साहनी (1921)
स्थिति - मोंटगोमरी जिला (पंजाब, पाकिस्तान)
वर्तमान में शाहीवाल जिले में स्थित है।
यह रावी नदी के तट पर है।

हड़प्पा से प्राप्त अवशेष निम्नलिखित हैं -
• R-37 कब्रिस्तान • विदेशी की कब्र (ताबूत में दफनाया गया)
• इक्का गाड़ी (Toy cart)      
• श्रृंगार पेटिका
• स्वास्तिक का चिन्ह

• नदी के तट पर 12 अन्नागार मिले हैं, जो दो लाइनों में है।
इनके पास में अनाज साफ करने के चबूतरे मिले हैं।
• श्रमिकों के आवास मिलते हैं।

• यहां से 2 टीले मिले है -
1. पश्चिमी टीला:- इसे दुर्ग टीला कहते हैं, जो कि रक्षा प्राचीर से गिरा हुआ था। इसमें उच्च वर्ग के लोग (पुरोहित, प्रशासनिक अधिकारी रहते थे।
2. पूर्वी टीला:- इसे नगर टीला कहते हैं, जो कि रक्षा प्राचीर से गिरा हुआ नहीं था। इसमें सामान्य वर्ग के लोग अर्थात व्यापार-वाणिज्य करने वाले लोग रहते थे।

• सर्वाधिक अभिलेखयुक्त मुहरें हड़प्पा से मिली हैं।


मोहनजोदड़ो की खोज एवं जानकारी

उत्खननकर्ता - राखालदास बनर्जी (1922)
स्थिति - लरकाना जिला (सिंध, पाकिस्तान) 
सिंधु नदी के तट पर।

मोहनजोदड़ो का शाब्दिक अर्थ - मृतकों का टीला। (7 परतों में)

मोहनजोदड़ो से प्राप्त अवशेष निम्नलिखित हैं -
* विशाल स्नानागार (Great bath)
आकार - 39×23×8 फीट
इसके उत्तर व दक्षिण में नीचे उतरने के लिए चौड़ी सीढ़ियां बनी हुई है।
इसमें बिटुमिनस का लेप किया गया है। (Water Proofing)
इसकी उत्तर दिशा में 6 वस्त्र बदलने के कक्ष है।
तीन तरफ बरामदे है। बरामदों के पीछे कई कक्ष बने हुए हैं।
जल आपूर्ति हेतु कुआं भी बना हुआ है।
प्रथम तल पर चढ़ने के लिए सीढ़ियों के साक्ष्य भी मिलते हैं।
प्रथम तल के कमरों का प्रयोग सम्भवतया पुरोहित करते रहे होंगे।
इस विशाल स्नानागार का प्रयोग सम्भवतया धार्मिक अनुष्ठानों के लिए किया जाता था।
नोट:- सर जॉन मार्शल ने इसे तात्कालिक समय की आश्चर्यजनक इमारत कहा है।

* नर्तकी की मूर्ति
इसका निर्माण लॉस्ट वैक्स (मोम तकनीक) कास्टिंग से हुआ है।
यह कांस्य की बनी हुई है।
यह नग्न अवस्था में है। यह नृत्य की अवस्था में है।
इसने एक हाथ में चूड़ियां पहन रखी है।

• पुरोहित राजा की मूर्ति जो ध्यान की अवस्था में है।
यह शेलखडी पत्थर से बनी है। (Steatite stone)
इसने शॉल ओढ़ रखी है, जिस पर कशीदाकारी का कार्य किया गया है।
आकार - 17.5 सेमी ऊंची तथा 11 सेमी चौड़ी

• विशाल अन्नागार
• महाविद्यालय के साक्ष्य
• सूती कपड़े के साक्ष्य
• हाथी का कपालखंड

• यहां से मेसोपोटामिया की मुहर मिलती है। (विदेशी व्यापार का साक्ष्य)

• घोड़े का दांत
• शंख का पैमाना (Scale)

*पशुपतिनाथ की मुहर
इसके बायी ओर गैंडा एवं भैंसा तथा दायी ओर हाथी और चीता तथा सामने दो हिरण है।
सर जॉन मार्शल ने इसे आद्य शिवा (Proto shiva) कहा है।


लोथल की खोज एवं जानकारी

उत्खननकर्ता - रंगनाथ राव (S.R. राव)
स्थिति - गुजरात
भोगवा नदी के तट पर।
यह एक व्यापारिक नगर था। (Commercial)

• गोदीबाडा (Dockyard)
यहां एक विशाल आकार का घेरा मिला है, जिसे राव महोदय ने जहाजों की गोदी बताया है।
यह सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे बड़ी कृति है।
अतः लोथल को सिंधु घाटी का पत्तन नगर अथवा बंदरगाह भी कहते हैं।

• नावों के मॉडल
• फारस की मुहर जो गोलाकार बटननुमा है।
• घोड़े की मृण्मूर्तियां
• चक्की के दो पाट
• मनके बनाने का कारखाना। (Beads)
• चावल व बाजरा के साक्ष्य।
• घरों के दरवाजे मुख्य मार्ग पर खुलते हैं। (एकमात्र घर)

प्रश्न. क्या सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को चावल का ज्ञान था ? - नहीं

प्रश्न. क्या सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को घोड़े का ज्ञान था ? - नहीं

प्रश्न. सिंधु घाटी सभ्यता का व्यापारिक नगर किसे कहते है ? - लोथल


धौलावीरा (सफेद कुआं)

उत्खननकर्ता - रविन्द्र सिंह बिष्ट (1990-91)
स्थिति - गुजरात
यह किसी नदी के तट पर नहीं है।

नगरीय संरचना
इसकी नगरीय संरचना अन्य नगरों से भिन्न थी।
यह शहर तीन भागों में विभाजित है - (त्रिस्तरीय नगर संरचना)
पूर्व
मध्य
पश्चिम

प्रश्न.समाज में मध्यम वर्ग की उपस्थिति प्राप्त हुई है ? - धौलावीरा से

धौलावीरा से प्राप्त अवशेष निम्नलिखित हैं -
• यहां से 16 कृत्रिम जलाशय मिलते हैं। (Artificial reservoir)
• स्टेडियम के साक्ष्य
• सूचना पट्ट (Sign board) जो पॉलिशयुक है।
• धौलावीरा कर्क रेखा पर स्थित है।


चन्हुदड़ो

उत्खननकर्ता - एन जी मजूमदार
इनकी हत्या डाकुओं ने कर दी थी।
स्थिति - सिंध (पाकिस्तान)
यह एक औद्योगिक नगरी थी। (Industrial)

प्रश्न.सिंधु घाटी सभ्यता का औद्योगिक नगर किसे कहते है ? - चन्हुदड़ो

चन्हुदड़ो से प्राप्त अवशेष निम्नलिखित हैं -
• मनके बनाने के कारखाने।
• कुत्ते द्वारा बिल्ली का पीछा करने के साक्ष्य। (पग चिन्ह)
• लिपस्टिक के साक्ष्य। (सौंदर्य प्रसाधन)
• कार्नेलियन मनके के अवशेष। (लाल रंग का कीमती पत्थर)

सुरकोटदा
स्थिति - गुजरात
यहां से घोड़े की हड्डियां मिली है।

सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को घोड़े का ज्ञान नहीं था।

कुनाल - हरियाणा
चांदी के दो मुकुट
लापिस लाजुली (नीले रंग का नीलम जैसा कीमती पत्थर)

दैमाबाद - महाराष्ट्र
कांस्य के चार रथ।
इनमें एक रथ को दो बैल खींच रहे है और चलाने वाला पुरुष अर्धनग्न है।

रोजदी - गुजरात
हाथी के अवशेष
ग्राफिटी

रोपड़ (रूपनगर) - पंजाब
मनुष्य के साथ कुत्ते को दफनाने के साक्ष्य

आमरी - सिंध (पाकिस्तान)
गैंडे के साक्ष्य।

कालीबंगा - राजस्थान
एक खोपड़ी जिसमें 6 छेद किए गए हैं अर्थात इन लोगों को शल्य चिकित्सा का ज्ञान था।

बनावली से एक वॉश बेसिन (धावन पात्र) मिला है।

स्वतंत्रता के बाद भारत के पास सिंधु घाटी सभ्यता के केवल दो स्थल बचे थे।
1. कोटला निहंग खा (रोपड़)  2. रूपनगर

कालीबंगा, बनावली, राखीगढ़ी प्राक हड़प्पा स्थल है। (Pre - Harrapan Sites)

रंगपुर व रोजदी उत्तर हडप्पन स्थल है। (Post - Harrapan Sites)

प्राक हड़प्पा काल - हड़प्पा सभ्यता के पहले का समय।
विकसित हड़प्पा काल - हड़प्पा सभ्यता का चरम काल।
उत्तर हडप्पन काल - हड़प्पा सभ्यता के चरम (Peak) के बाद का समय। अर्थात इस समय हड़प्पा सभ्यता का पतन शुरू हो गया था।
 
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