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राष्ट्रीय आंदोलन का दूसरा चरण (1905-1919)

 
Second phase of nantional movement


राष्ट्रीय आंदोलन का दूसरा चरण (1905-1919)

Second phase of nantional movement.

राष्ट्रीय आंदोलन का उग्रवादी चरण। गरमपंथियों के उदय के कारण। गरमपंथियों की विचारधारा। राष्ट्रीय आंदोलन में गरमपंथियों का योगदान।

इस चरण में गरमपंथियों का प्रभाव अधिक था।
मुख्य नेता:- लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल, अरविंद घोष आदि।


गरमपंथियों के उदय के कारण

• राजनीतिक भिक्षावृत्ति के कारण नरमपंथी भारतीय राजनीति में अप्रासंगिक हो गए।
• स्वामी विवेकानंद और स्वामी दयानंद सरस्वती के कारण प्राचीन भारतीय संस्कृति का गौरवगान हुआ जिससे भारतीयों का आत्मविश्वास बढ़ा। 
• भारत में अकाल व प्लेग की स्थिति थी तथा ब्रिटिश सरकार ध्यान नहीं दे रही थी।
कर्जन की नीतियों के खिलाफ भारतीयों में गुस्सा था।
1. विश्वविद्यालय आयोग - 1904
2. कलकत्ता नगर निगम आयोग में सरकारी सदस्यों की संख्या बढ़ा दी।
3. बंगाल विभाजन।
• इस समय पूरे विश्व में उग्र राष्ट्रवाद की लहर थी तथा विश्व की कई घटनाओं ने भारतीयों को भी प्रभावित किया।
जैसे - 1895 में जापान की चीन पर जीत।
1896 में इथियोपिया की इटली पर जीत।
1905 में जापान की रूस पर जीत।
जापानी बौनों ने रुसी भालूओं को हरा दिया।
बोअर विद्रोह (डच किसान) :- दक्षिण अफ्रीका में पॉल क्रुगर के नेतृत्व में डच किसानों ने अंग्रेजों से संघर्ष किया।


गरमपंथियों की विचारधारा

1. ब्रिटिश शासन साम्राज्यवादी तथा औपनिवेशिक प्रकृति का है।
2. भारतीय जनता में राजनीतिक चेतना नहीं है, लेकिन फिर भी उन्हें राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल करना चाहिए क्योंकि उत्तरदायित्व देने से उत्तरदायित्व की क्षमता विकसित होती हैं।  
(Responsibility brings responsibility.)
3. स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग तथा विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना चाहिए।
4. राष्ट्रीय आंदोलन में धार्मिक प्रतीकों का प्रयोग किया जाना चाहिए। (भीड़ एकत्रित)
गणपति महोत्सव -1893
शिवाजी महोत्सव - 1895 में तिलक ने शुरू किए।
बंगाल में भारतमाता का चित्रांकन।
5. हड़ताल, जुलूस आदि का सहारा लेना चाहिए।


राष्ट्रीय आंदोलन में गरमपंथियों का योगदान

1. ब्रिटिश शासन के वास्तविक स्वरूप को उजागर किया।
2. राष्ट्रीय आंदोलन को जन आंदोलन बनाया
3. उन्होंने पहली बार राष्ट्रीय आंदोलन में स्वराज की मांग की।
4. विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार से हमारे स्वदेशी उद्योग-धंधों को फायदा हुआ। 
5. स्वदेशी शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की गई। इससे समाज में शिक्षा का प्रसार हुआ।
6. इन्होंने व्यक्तिगत त्याग एवं बलिदान के उदाहरण पेश किए।
जैसे - तिलक पहले राजनेता थे जो पहली बार जेल गए थे।


गरमपंथियों की कमियां

1. इनके अतिवादी रवैये के कारण कांग्रेस में विभाजन हो गया था तथा ब्रिटिश सरकार ने आंदोलन का दमन कर दिया।
2. इनके धार्मिक प्रतीकों के प्रयोग के कारण आंदोलन के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को नुकसान पहुंचा और मुस्लिम समुदाय को नहीं जोड़ पाए।
3. इन्होंने अंग्रेजों की आलोचना के बजाय नरमपंथियों की आलोचना में अधिक ध्यान दिया।
4. गरम पंथी आपस में संगठित नहीं थे।

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