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लखनऊ समझौता ।। लखनऊ अधिवेशन 1916

 
Lucknow pact




लखनऊ अधिवेशन - 1916

अध्यक्ष - अम्बिका चरण मजूमदार
• एनी बीसेंट व तिलक के प्रयासों से नरम दल और गरम दल में समझौता हो गया।
• तिलक व जिन्ना के प्रयासों से कांग्रेस व मुस्लिम लीग के बीच समझौता हुआ जिसे लखनऊ समझौता कहा जाता है।
💥 मदन मोहन मालवीय ने इस समझौते का विरोध किया था।

नरम दल व गरम दल में समझौते का कारण:-
• 1907 में सूरत विभाजन के बाद गरम पंथी राष्ट्रीय आंदोलन से अलग हो गए थे। तथा अब वे राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल होना चाहते थे। इसके लिए उन्हें कांग्रेस में शामिल होना जरूरी था क्योंकि कांग्रेस राष्ट्रीय आंदोलन का केंद्र-बिंदु थी।

• नरमपंथियों के दो बड़े नेता गोपाल कृष्ण गोखले तथा फिरोजशाह मेहता की 1915 में मृत्यु हो गई थी।
• नरमपंथी निष्क्रिय होते जा रहे थे तथा अब उन्हें नई ऊर्जा की आवश्यकता थी।
• नरमपंथी 1909 के सुधारों से संतुष्ट नहीं थे।
• गरमपंथियों की विचारधारा बदल चुकी थी।
प्रथम विश्व युद्ध के कारण देश में असामान्य परिस्थितियां थी और जनता बड़े आंदोलन की मांग कर रही थी। इसलिए नरम व गरम दल में समझौता होना जरूरी था।


लखनऊ समझौते के कारण :-

मुस्लिम लीग
• अंग्रेजों ने अलीगढ़ कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा नहीं दिया।
• 1911 ईस्वी में बंगाल विभाजन रद्द कर दिया गया।
• कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की पृथक निर्वाचन की मांग को स्वीकार कर लिया था।
• प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की ब्रिटेन के खिलाफ लड़ रहा था। अंग्रेज तुर्की के खलीफा के पद को समाप्त करना चाहते थे।
• मुस्लिम लीग में  उदारवादियों की संख्या बढ़ रही थी।
जैसे - मोहम्मद अली जिन्ना।

1875 में सर सैय्यद अहमद खान ने अलीगढ़ कॉलेज की स्थापना की।
1898 में एनी बेसेंट ने बनारस में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना की।
मदन मोहन मालवीय के प्रयासों के कारण इसे 1916 में विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया गया।
नोट:- अंग्रेजों ने अलीगढ़ कॉलेज को 1920 में विश्वविद्यालय का दर्जा दिया।
 
कांग्रेस
• कांग्रेस हिंदू-मुस्लिम एकता को स्थापित करना चाहती थी।
• कांग्रेस राष्ट्रीय आंदोलन के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बनाए रखना चाहती थी।
• मुस्लिम लीग ने कांग्रेस के स्वराज की मांग को स्वीकार कर लिया।


लखनऊ अधिवेशन के प्रभाव

सकारात्मक प्रभाव
• हमारे देश में हिंदू-मुस्लिम एकता स्थापित हुई।
• राष्ट्रीय आंदोलन का धर्मनिरपेक्ष स्वरूप स्थापित किया गया।
• समझौते के कारण ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाने में सफल रहे।

नकारात्मक प्रभाव
• पृथक निर्वाचन को स्वीकार करने से द्विराष्ट्रवाद का सिद्धांत की पुष्टि की, जो आगे चलकर विभाजन का कारण बनी।
• 1919 ईस्वी में अंग्रेजों ने सिखों और एंग्लो इंडियन को पृथक निर्वाचन दिया लेकिन अब कांग्रेस इसका विरोध नहीं कर सकती थी।
• कांग्रेस ने मुस्लिमों को आवश्यकता से अधिक महत्व दिया इसलिए हिंदू संगठनों को प्रतिक्रिया देने के अवसर मिले।
• हिंदू-मुस्लिम एकता लंबे समय तक नहीं चली। (मोपला विद्रोह)

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