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दिल्ली दरबार । दिल्ली षड्यंत्र केस । कामागाटामारू घटना । होमरुल आंदोलन

 
Home rule movement



दिल्ली दरबार (1911 ईस्वी)


दिल्ली दरबार का आयोजन ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम तथा उनकी रानी मैरी का स्वागत करने के लिए किया गया।
1. बंगाल विभाजन रद्द कर दिया गया।
2. राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली लाया जाएगा।
(इसी समय पंचम के स्वागत में बॉम्बे में गेटवे ऑफ इंडिया बनाया गया)

प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की तरफ से लड़ते हुए शहीद भारतीयों के नाम लिखने के लिए इंडिया गेट बनाया गया।

1912 में राजधानी दिल्ली स्थानांतरित की गई। इसे नई दिल्ली स्थानांतरित किया गया। इसका डिजाइन लुटियन ने तैयार किया था।
 

दिल्ली षड्यंत्र केस

23 दिसंबर 1912 में राजधानी को दिल्ली ला रहे थे तो रासबिहारी बोस के नेतृत्व में चांदनी चौक में गवर्नर जनरल होल्डिंग द्वितीय पर बम फेंका गया।
इस मुकदमे में 4 क्रांतिकारियों को फांसी दी गई - 
1. अवध बिहारी  2. अमीर चन्द्र
3. बालमुकुंद      4. बसंत कुमार

राजस्थान के क्रांतिकारी जोरावर सिंह बारहठ भी इस षड्यंत्र में शामिल थे।


कामागाटामारू घटना (1914)

कामागाटामारू एक जापानी जहाज था।
सिंगापुर में रहने वाला गुरदीत सिंह 376 भारतीयों को लेकर कनाडा के वैंकूवर बंदरगाह गया।
कनाडा सरकार ने इन्हें प्रवेश नहीं दिया।
कनाडा में रहने वाले भारतीयों ने इसका विरोध किया था तथा इनके पक्ष में आंदोलन किया व तटीय समिति का गठन किया।
इस समिति में 3 सदस्य थे -
1. सोहन लाल पाठक 2. बलवंत सिंह 3. रहीम हुसैन।

• अमेरिका में रहने वाले भारतीयों ने भी इनके पक्ष में आंदोलन किया था।
प्रमुख नेता:- सोहन सिंह, रामचंद्र, भगवान सिंह, बरकतुल्ला।

• लौटते समय जहाज जापान के याकोहामा बंदरगाह पहुंचा। तब तक प्रथम विश्व युद्ध शुरू हो चुका था। अतः अंग्रेज सरकार ने जहाज को सीधा कलकत्ता लाने का आदेश दिया और बजबज बंदरगाह (कलकत्ता) पर भगदड़ मच गई।  भगदड़ के दौरान 18 भारतीय मारे गए।

• इस घटना ने भारत में राष्ट्रवाद की भावनाओं को बढ़ावा दिया।


होम रूल आंदोलन (1916)

तिलक तथा एनी बेसेंट ने भारत में होमरूल आंदोलन किया था।
होम रूल आंदोलन आयरलैंड से प्रेरित था। 
उद्देश्य:- भारतीयों के लिए स्वशासन प्राप्त करना।

एनी बेसेंट आयरलैंड की थी।
 

तिलक का होम रूल आंदोलन

शुरू - अप्रैल 1916 (होमरूल लीग की स्थापना)
मुख्यालय - बेलगाम (कर्नाटक)
अध्यक्ष - जोसेफ बेप्तिसता
क्षेत्र :-
1. महाराष्ट्र (बॉम्बे को छोड़कर)
2. कर्नाटक 
3. मध्य प्रांत
4. बरार (हैदराबाद के पास)

मांगे:-
• प्राथमिक शिक्षा, मातृभाषा में दी जानी चाहिए।
• राज्यों का गठन भाषा के आधार पर किया जाना चाहिए।
• तिलक ने स्थानीय मांगों को होमरूल आंदोलन से जोड़ा।
• तिलक ने रचनात्मक कार्यक्रम प्रारंभ किए।
जैसे - हिंदू-मुस्लिम एकता, छुआछूत निवारण, शिक्षा का प्रचार-प्रसार

तिलक के समाचार पत्र:-
• केसरी (मराठी भाषा में) - दैनिक
• मराठा (अंग्रेजी भाषा में) - साप्ताहिक

तिलक की किताबें:-
• गीता रहस्य
• आर्कटिक होम इन द वेदाज

गोखले की संस्था भारत सेवक समाज (सर्वेंट्स ऑफ द इंडिया सोसाइटी) के सदस्य को तिलक की होमरूल लीग में शामिल नहीं किया जाता था।
गोखले की श्रद्धांजलि सभा में तिलक ने बी बी अल्लूर को कन्नड़ भाषा में बोलने के लिए प्रोत्साहित किया।


एनी बेसेंट का होम रूल आंदोलन

इन्होंने 1916 ईस्वी में आंदोलन शुरू किया।
मुख्यालय - अडयार
सचिव - जॉर्ज अरेन्डूल (पत्नी रुकमणी देवी अरेन्डूल - भरतनाट्यम कलाकार)
क्षेत्र - तिलक के क्षेत्र को छोड़कर संपूर्ण भारत में आंदोलन संचालित किया गया।

जवाहरलाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना, सुरेंद्रनाथ बनर्जी आदि एनी बेसेंट के साथ जुड़े।
आंदोलन आगे बढ़ने पर अंग्रेजों ने एनी बेसेंट को गिरफ्तार कर लिया।
इसके विरोध में सुब्रमण्यम अय्यर ने अपनी नाइटहुड की उपाधि छोड़ दी थी।

एनी बेसेंट के समाचार पत्र:-
न्यू इंडिया
दा कॉमन विल

तिलक को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। तिलक का केस मोहम्मद अली जिन्ना ने लड़ा था और जीत दिलाई।
 

मोंटेग्यू घोषणा (अगस्त घोषणा)

20 अगस्त 1917
इसे अगस्त घोषणा भी कहते है।
मोंटेग्यू - भारत सचिव था।
इसने घोषणा की कि भारतीयों को धीरे-2 स्वशासन दिया जाएगा।

• एनी बेसेंट ने आंदोलन वापस ले लिया।
• तिलक वेलेंटाइन शिरोल पर मुकदमा करने के लिए लंदन चले गए। वहीं पर 1 अगस्त 1920 को तिलक की मृत्यु हो गई।

वेलेंटाइन शिरोल की पुस्तक - Indian unrest.
शिरोल ने भारत में अशांति के लिए आर्य समाज और व्यक्तिगत रूप से तिलक को जिम्मेदार ठहराया।
 

होमरूल लीग का महत्व

• यह भारत का पहला प्रमुख अहिंसात्मक जन आंदोलन था जो भारत में विशेष रूप से दक्षिण भारत में फैला था।
• राष्ट्रीय आंदोलन की एक दशक की निष्क्रियता को तोड़ा।
• समाज के सभी वर्गों ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया।
• एनी बेसेंट के कारण महिलाएं आंदोलन से जुड़ी। जिससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला।
• होमरूल आंदोलन में विभिन्न समितियां बनाई गई थी। इससे राष्ट्रीय आंदोलन को संगठनात्मक ढांचा प्राप्त हुआ।
• विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रम प्रारंभ किए गए जिन्हें बाद में गांधी जी ने अपनाया था।
• कांग्रेस में दूसरी पंक्ति के नेता उभरे। जैसे - नेहरू, जिन्ना
• आंदोलन के दबाव के कारण 1919 में अंग्रेजों ने सुधार किए।
• प्रथम विश्व युद्ध के कारण देश में असामान्य परिस्थितियां थी। अतः होमरूल आंदोलन के कारण लोगों को अपने असंतोष को अभिव्यक्त करने का मौका मिला।

कमियां:-
1. यह आंदोलन शहरों तक सीमित था। 
2. गरमपंथियों के मुकाबले इनकी स्वशासन की मांग कम थी क्योंकि गरमपंथी 1906 से ही स्वराज की मांग कर रहे थे।
3. रचनात्मक कार्यक्रम भी सैद्धांतिक ही रहे उन्हें लागू नहीं किया जा सका।
4. यह आंदोलन अंत में नेतृत्वविहीन तथा परिणामहीन हो गया था।
5. भाषा के आधार पर राज्यों का गठन होने से क्षेत्रवाद को बढ़ावा मिलता है।

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