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कांग्रेस की स्थापना से पूर्व की राजनीतिक संस्थाएं

 
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कांग्रेस की स्थापना से पूर्व की राजनीतिक संस्थाएं

28 दिसंबर 1885 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के साथ भारत में राष्ट्रीय आंदोलन की संगठित शुरुआत हुई।
स्थापना का उद्देश्य - अंग्रेजी सरकार के समक्ष सामूहिक भारतीय हितो को उठाना और अपने अधिकारों की मांग करने के लिए लगातार राजनीतिक आंदोलन चलाना।

कांग्रेस की स्थापना एक सेवानिवृत्त अंग्रेज सिविल सर्वेंट ए. ओ. ह्यूम द्वारा बंबई में की गई।
शुरुआत में कांग्रेस पर नरमपंथियो (बुर्जुआ वर्ग) का प्रभाव था।
कांग्रेस की स्थापना का एक प्रमुख उद्देश्य शिक्षक भारतीयों में बढ़ रहे असंतोष की सुरक्षित निकासी के लिए एक सेफ्टी वॉल्व बनाना था।

बंगाल, मद्रास, बॉम्बे अंग्रेजों के 3 व्यापारिक केंद्र थे। (प्रेजीडेन्सी)


बंगाल में राजनीतिक संगठन

भारत में सर्वप्रथम राष्ट्रवाद का विकास बंगाल में हुआ था।

बंगाल जो आज सोचता है, 
बाकी भारत कल सोचेगा।

आधुनिक भारत में राजा राममोहन राय प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने राजनीतिक सुधारों के लिए आंदोलन प्रारंभ किया।
मांगे -
समाचार पत्रों की स्वतंत्रता।
सिविल न्यायालय और उच्च पदों पर भारतीयों की नियुक्ति की मांग की।

भारतीयों को राजनीतिक रूप से जागरूक करने के लिए हेनरी विवियन डेजोरियो ने द ईस्ट इंडियन समाचार पत्र प्रकाशित किया। 

1. बंग भाषा प्रकाशक सभा - 1836
यह बंगाल का पहला राजनीतिक संगठन था।

2. बंगाल जमींदार सभा - 1838 (लैंड होल्डर्स सोसायटी/जमींदारी एसोसिएशन)
यह भारत का पहला राजनीतिक संगठन था। इसने संगठित राजनीतिक प्रयास का शुभारंभ किया।
संस्थापक - द्वारिका नाथ टैगोर, राधाकांत देव
सभी नेता जमींदार थे।
• यह संस्था इंग्लैंड में एडम्स द्वारा स्थापित ब्रिटिश इंडिया सोसायटी में भी सहयोग करती थी।

नोट - राधाकांत देव ने सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने का विरोध किया था। ये धर्म सभा नामक संगठन चलाते थे।
द्वारिका नाथ टैगोर रवींद्रनाथ टैगोर के दादाजी थे।

सती प्रथा का विरोध किसने किया ? - राजा राममोहन राय

3. बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसायटी - 1843
संस्थापक - द्वारिका नाथ टैगोर
जॉर्ज थॉम्पसन ने इसकी अध्यक्षता की थी।

4. ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन -  1851
लैंड होल्डर्स सोसायटी और बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसायटी असफलता के बाद राधाकांत देव ने दोनों को मिलाकर ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन की स्थापना की।
• अन्य संस्थापक - देवेंद्र नाथ टैगोर (महासचिव)
राजेंद्र लाल मित्र, हरिश्चंद्र मुखर्जी
• इस संगठन ने नील विद्रोह (1859) कि जांच के लिए आयोग बैठाने की मांग की थी।
हिन्दु पेट्रियट इसका मुख्य पत्र था।

नोट - ये संगठन जनता के हितों की बात नहीं करते थे। ये केवल जमींदारी हितो पर आधारित थे। 
इनकी मांगे लचीली होती थी। ये प्रत्यक्ष कार्यवाही के समर्थक नहीं थे। जैसे - प्रार्थना पत्र लिखना।
मांगे - विधायिका में प्रवेश, गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी में शामिल होना, उच्च पदों पर भारतीयों की नियुक्ति

5. इंडियन लीग - 1875
संस्थापक - शिशिर कुमार घोष। (अमृत बाजार पत्रिका के संपादक थे)
इंडियन लीग पहला संगठन था जिसका उद्देश्य राष्ट्रवाद की भावना का प्रसार करना था।

नोट - अमृत बाजार पत्रिका बंगाली भाषा का साप्ताहिक पत्र था। लॉर्ड लिटन (1876-80) द्वारा देशी भाषा पत्रों के खिलाफ लाए गए वर्नाकुलर प्रेस एक्ट से बचने के लिए अमृत बाजार पत्रिका की भाषा बदल कर रातों-रात अंग्रेजी कर दी गई।

6. इंडियन एसोसिएशन - 1876
संस्थापक - सुरेंद्रनाथ बनर्जी और आनंद मोहन बोस।
• लॉर्ड लिटन ने ICS की अधिकतम आयु 19 वर्ष कर दी थी।तब इसी संगठन ने सुरेंद्रनाथ बनर्जी के नेतृत्व में सिविल सर्विसेज आंदोलन चलाया था। जिसे भारतीय जानपद सेवा आंदोलन भी कहा जाता है।
मांग - आयु सीमा बढ़ाई जाए।
परीक्षा भारत में आयोजित की जाए।
• यह पहला संगठन था जिसने मध्यम वर्ग के साथ-साथ साधारण जनता को भी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल किया। इसका वार्षिक चंदा ₹5 था।
• इंडियन एसोसिएशन ने लॉर्ड लिटन द्वारा लाए गए वर्नाकुलर प्रेस एक्ट और आर्म्स एक्ट (1878) के विरोध में आंदोलन चलाया।
• लार्ड रिपन के समय में इल्बर्ट बिल के समर्थन में आंदोलन चलाया।


इल्बर्ट बिल विवाद (1883) क्या है ?

लार्ड रिपन एक विधेयक लाए जिसमें प्रावधान था कि फौजदारी (Criminal) मामलों में जिला स्तर पर भारतीय न्यायाधीश भी अंग्रेज मुजरिम की सुनवाई कर सकेंगे। अंग्रेजों के विरोध के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका।

सुरेंद्रनाथ बनर्जी बंगाली नामक समाचार पत्र प्रकाशित करते थे।
इल्बर्ट बिल विवाद के दौरान सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने अपने पत्र बंगाली में कोलकाता हाईकोर्ट के जज जे एफ मॉरिश की तीखी आलोचना कर दी जिस कारण बनर्जी को 2 महीने की सजा मिली।

इल्बर्ट बिल विवाद के परिणाम स्वरुप 1883 में सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने नेशनल कांफ्रेंस की स्थापना की।

• इंडियन एसोसिएशन ने 29 दिसंबर 1883 को आनंद मोहन बोस की अध्यक्षता में प्रथम नेशनल कांफ्रेंस का आयोजन किया।
25 दिसंबर 1885 को सुरेंद्रनाथ बनर्जी की अध्यक्षता में द्वितीय नेशनल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया।

प्रश्न.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (प्रथम बैठक) में किसने भाग नहीं लिया ? - सुरेंद्रनाथ बनर्जी

नोट - 1886 में इंडियन एसोसिएशन का कांग्रेस में विलय कर दिया गया।


बंबई में राजनीतिक संगठन


1. बॉम्बे एसोसिएशन - 1852
1885 में इसका नाम बदलकर बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन कर दिया गया।
बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन के संस्थापक - बदरुद्दीन तैयबजी, फिरोजशाह मेहता, के. टी. तेलंग

2. पूना सार्वजनिक सभा - 1870
जस्टिस महादेव गोविंद रानाडे (महाराष्ट्र के सुकरात)
आत्माराम पांडुरंग, आर जी भंडारकर, चंद्रावरकर


मद्रास में राजनीतिक संगठन

1. मद्रास नेटिव एसोसिएशन - 1852
इस संगठन ने 1857 की क्रांति की आलोचना की इसलिए लोगों में अलोकप्रिय हो गया था।

2. मद्रास महाजन सभा - 1884
वी राघवाचारी, सुब्रह्मण्यम अय्यर, पी आनंद चारलू

लंदन में राजनीतिक संगठन

ईस्ट इंडिया एसोसिएशन - 1866
संस्थापक - दादा भाई नौरोजी
उद्देश्य - ब्रिटिश जनता और ब्रिटिश संसद को भारतीय समस्याओं से अवगत कराना।
• दादा भाई नौरोजी को भारत का पितामह "ग्रेट ओल्ड मैन ऑफ इंडिया" कहा जाता था।
• वे भारत के पहले आर्थिक विचारक भी थे।

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