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भारत-म्यांमार संबंध। IR Notes

India myanmar relations

भारत-म्यांमार संबंध 

India myanmar relations

म्यांमार के बारे में

* स्थिति - दक्षिण-पूर्वी एशिया
* धर्म - बौद्ध धर्म (अधिकांशतः जनसंख्या) 
* आबादी- लगभग 5 करोड
* राजधानी -  नाएप्यीडॉ Nyapyitaw 
2005 से पहले म्यांमार की राजधानी यांगून थी।  1989 में रंगून का नाम बदलकर यांगून रखा गया।

* म्यांमार की सीमा बांग्लादेश, चीन, थाईलैंड, लाओस व भारत (1600 km) से लगती है।

* म्यांमार की करेंसी -  क्यात
1₹ = 21 Myanmar Kyat
* म्यांमार कॉमनवेल्थ समूह का हिस्सा नहीं है। 
* म्यांमार की समुद्री सीमा - 1930 km 

* म्यांमार आसियान, बिम्सटेक, मेकॉन्ग-गंगा कॉर्पोरेशन जैसे समूह का सदस्य है एवं इसे सार्क समूह में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है। 

* म्यांमार की प्रमुख नदी इरावदी नदी है। जो एक व्यापारिक नौवहन मार्ग भी प्रदान करती है। यह म्यांमार की सबसे लंबी नदी है। 
*  चीन म्यांमार का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। 


1824 ई. में बर्मा पर ब्रिटिश शासन स्थापित हुआ।
1937 ईस्वी में बर्मा को ब्रिटिश भारत से अलग किया गया। 

4 जनवरी 1948 को बर्मा को स्वतंत्रता मिली। स्वतंत्रता की यह लड़ाई आंग सांग के नेतृत्व में लड़ी गई एवं लोकतंत्र की स्थापना हुई। 

भारत और बर्मा के मध्य 1951 ई. में मित्रता की संधि की गई।

वर्ष 1962 में बर्मा में लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर सैन्य शासन स्थापित हुआ । जिसे जुन्ता सरकार कहा जाता है।

 1989 ईस्वी में बर्मा में चुनाव करवाए गए जिसमें आंग सांग सू की के नेतृत्व वाली नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) पार्टी की जीत हुई परंतु चुनावों को रद्द करके आंग सांग सू की को गिरफ्तार कर लिया गया। 
पुनः स्थापित सैन्य शासन द्वारा ही 1989 ईस्वी में बर्मा का नाम बदलकर म्यांमार रखा गया। 

1992 ईस्वी में आंग सांग सू की को लोकतंत्र की स्थापना हेतु किए गए प्रयासों के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया। 

वर्ष 2010 में जुन्ता सरकार को समाप्त किया गया। 

वर्ष 2012 में आंग सांग सू की को रिहा किया गया एवं 2012 के उपचुनाव  व 2015 के आम चुनावों में इनकी जीत हुई। 
लेकिन ये म्यांमार की राष्ट्रपति नहीं बन सकी। क्योंकि इनके दो पुत्रों के पास UK की नागरिकता है।

म्यांमार के वर्तमान राष्ट्रपति - विन मिन्त 

पश्चिमी देशों द्वारा म्यांमार को पूर्ण लोकतांत्रिक देश नहीं माना जाता।  क्योंकि यहां की सरकार में सेना का अधिक हस्तक्षेप होता है।
म्यांमार की संसद में 25% सीटे सेना के लिए आरक्षित होती है तथा संविधान में किसी भी संशोधन हेतु 76% मतों की आवश्यकता होती है अर्थात् बिना सेना की सहायता से कोई भी संविधान संशोधन नहीं किया जा सकता।
म्यांमार का गृह मंत्रालय, रक्षा व सीमा मामलों का मंत्रालय सेना के ही अधीन है। 
आपातकाल लगाने का अधिकार भी सेना के पास ही है।


म्यांमार का रोहिंग्या संकट

रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन प्रांत की मुस्लिम जनजाति है, जिनका संबंध मूलतः बांग्लादेश से था। 
1824 ई. के बाद रोहिंग्याओ का पलायन म्यांमार में हुआ।
म्यांमार की सरकार रोहिंग्याओं को अवैद्य बांग्लादेशी घुसपैठिया मानती है।
म्यांमार में वर्ष 1982 के नागरिकता कानून में रोहिंग्या मुसलमानों को नागरिकता के अधिकारों से वंचित रखा गया। 
म्यांमार में रोहिंग्या तथा स्थानीय बोद्धौ के मध्य समय-समय पर दंगे होते रहते हैं।

म्यांमार में वर्ष 2012 में बड़े स्तर पर दंगे हुए जिसके कारण रोहिंग्याओं को देश छोड़ना पड़ा।

वर्ष 2017 में म्यांमार की सेना द्वारा भी रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध कार्यवाही की गई।


रोहिंग्या संकट के प्रभाव

पड़ोसी देशों में शरणार्थी संकट के साथ-साथ एक बड़ा मानवीय संकट भी उत्पन्न हुआ। 
बांग्लादेश में लगभग 5 लाख एवं भारत में लगभग 40 हजार रोहिंग्याओं को शरण दी गई। जिससे स्थानीय नागरिक सुविधाएं व राजनीति प्रभावित हुई।

रोहिंग्या मानव तस्करी के शिकार हुए।

रोहिंग्याओं में कट्टरवादी तत्वों की घुसपैठ हुई। जैसे - अराकान रोहिंग्या एलिवेशन आर्मी का गठन हुआ जिसका संबंध अलकायदा और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी समूहों से है। 


रोहिंग्या संकट पर भारत की प्रतिक्रिया

भारतीय सरकार रोहिंग्याओं को वैध घुसपैठिया मानती हैं।

रोहिंग्या शरणार्थी संकट से बांग्लादेश को निपटने हेतु भारत द्वारा ऑपरेशन इंसानियत के माध्यम से सहायता दी गई एवं इस संकट के उचित निपटारे हेतु भारत सरकार की बांग्लादेश एवं म्यांमार सरकार से बातचीत चल रही है।


भारत के लिए म्यांमार का महत्व

म्यांमार दक्षिण-पूर्वी एशिया का प्रवेश द्वार माना जाता है। 

म्यांमार से बेहतर संबंध भारत की के साथ एक्ट ईस्ट पॉलिसी (लुक ईस्ट पॉलिसी) व नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी की सफलता हेतु आवश्यक है।
दक्षिण एशिया व बंगाल की खाड़ी में क्षेत्रीय एकीकरण, अवसंरचनात्मक विकास व सुरक्षा निश्चितता के लिहाज से म्यांमार का अहम योगदान है।

म्यांमार की बंगाल की खाड़ी में लगभग 1930 किलोमीटर की समुद्री सीमा है। अतः म्यांमार के साथ भारत के मजबूत संबंध बंगाल की खाड़ी में चीन के प्रभाव को चुनौती देने में सहायक होंगे।

भारत - म्यांमार के मध्य भू-सीमा लगभग 1600 किलोमीटर है। जो भारत के 4 राज्यों अरुणाचल प्रदेश नागालैंड , मणिपुर व  मिजोरम से लगती है। अतः म्यांमार के साथ सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक संबंधों में मजबूती पूर्वोत्तर राज्यों के विकास एवं सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करती है।

म्यांमार उत्तर-पूर्वी राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाला एक सामरिक वैकल्पिक मार्ग भी प्रदान करता है। जो सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर भारत की अतिनिर्भरता को कम करता है। 

उत्तर-पूर्वी राज्यों में सक्रिय अलगाववादी एवं विद्रोही समूह म्यांमार में शरण लेते हैं। अतः इनके विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए भी म्यांमार आवश्यक है।

दोनों देशों के सीमा क्षेत्र एवं बंगाल की खाड़ी में संगठित अपराधों जैसे - ड्रग्स, मानव और हथियारों की तस्करी एवं चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल नीति के विस्तार को रोकने हेतु म्यांमार का सहयोग भारत के लिए अति महत्वपूर्ण है।


म्यांमार-चीन संबंध 

रोहिंग्या शरणार्थी संकट एवं मानवाधिकारों के खराब रिकॉर्ड के कारण पश्चिमी देशों द्वारा म्यांमार पर प्रतिबंध लागू किए गए। जिससे म्यांमार दक्षिण-पूर्वी एशिया में अलग-थलग पड़ गया। 
अतः म्यांमार का झुकाव चीन की तरफ बढ़ा।

जनवरी 2020 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा म्यांमार की यात्रा की गई तथा दोनों देशों के मध्य 33 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

चीन की म्यांमार में कुछ महत्वकांक्षी परियोजनाएं निम्न है :- 

1. म्यांमार के रखाइन प्रांत में चीन द्वारा क्याकप्यू बंदरगाह (यह एक Deep sea port है। ) का निर्माण किया जा रहा है।

2. म्यांमार-चीन सीमा वाले चीनी प्रांतों को म्यांमार के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाले रेलवे प्रोजेक्ट पर चीन द्वारा निवेश किया जा रहा है।

3. म्यांमार की इरावदी नदी पर इनलैंड वॉटरवे तैयार किया जा रहा है। 

4. बुनियादी अवसंरचनाओं, यातायात, कृषि, मानव संसाधन, शोध एवं तकनीक आदि क्षेत्रों में भी चीन द्वारा म्यांमार को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

म्यांमार चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (BRI)  का भी सदस्य है। 

चीन को सीधा हिंद महासागर से जोड़ने वाले चाइना-म्यांमार इकोनामिक कॉरिडोर (CMEC) पर भी चीन द्वारा कार्य किया जा रहा है।

अतः हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियां और म्यांमार-चीन संबंधों में बढ़ती प्रगाढ़ता भविष्य में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत-म्यांमार संबंधों के लिए एक बड़ी चुनौती है। 

भारत-म्यांमार संबंधों पर चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने हेतु भारत द्वारा किए गए प्रयास :-

पड़ोसी प्रथम नीति के तहत भारत द्वारा म्यांमार के साथ सांस्कृतिक,  सामाजिक, आर्थिक संबंधों को अधिक सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। 
इसी क्रम में भारत द्वारा म्यांमार में क्षतिग्रस्त मंदिरों का जीर्णोद्धार एवं बौद्ध पर्यटन स्थलों को विकसित किया जा रहा है।

प्राकृतिक आपदाओं के समय म्यांमार को भारत द्वारा मानवीय एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाती है।

अन्य प्रयास :- 

भारत-म्यांमार द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास (IMBAX) आयोजित किया जाता है।

म्यांमार को सार्क समूह में पर्यवेक्षक देश का दर्जा प्राप्त है।

भारत द्वारा रखाइन प्रांत के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए रखाइन स्टेट डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाया जा रहा है। जिसके द्वारा वहां जल आपूर्ति प्रणाली, सौर ऊर्जा के जरिए विद्युत का वितरण, स्कूल व सड़कों का निर्माण आदि किया जा रहा है। 

भारतीय रुपे कार्ड को म्यांमार में शुरू किया जा रहा है।

भारत द्वारा भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग का दो खंडों में निर्माण किया जा रहा है।
1. कलेवा याज्ञि रोड सेक्शन
2. तामू-काइगोन-कलेवा सेक्शन रोड

इंफाल-मांडले के बीच बस सेवा।

मेकांग गंगा सहयोग।

दोनों देशों के मध्य लैंड-बॉर्डर क्रॉसिंग पॉइंट का निर्माण।

दोनों देशों के मध्य समुद्री सुरक्षा एवं सीमा सुरक्षा हेतु अवैध घुसपैठ, ड्रग्स, मानव, वन्यजीव तस्करी आदि संगठित अपराधों को रोकने के लिए गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु भी समझौता किया गया है।

भारत म्यांमार के साथ मिलकर कलादान मल्टीमॉडल ट्रांसिट ट्रांसपोर्ट परियोजना पर भी कार्य कर रहा है। जिससे दोनों देशों में व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा मिलने के साथ भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को समुद्र, नदी व सड़क मार्ग से शेष भारत से जोड़ा जाएगा।

नोट - इस प्रोजेक्ट के तहत कोलकाता बंदरगाह को म्यांमार के रखाइन प्रांत में स्थित सित्वे बंदरगाह द्वारा मिजोरम से जोड़ा जा रहा है।

हाल ही अक्टूबर 2020 में भारत द्वारा म्यांमार को आईएनएस सिंधुवीर नामक पनडु्बी सौंपी गई। 

अक्टूबर 2020 में भारत के आर्मी चीफ एवं विदेश सचिव द्वारा म्यांमार की यात्रा की गई। जहां दोनों देशों के मध्य बेहतर कनेक्टिविटी, ऊर्जा क्षेत्र, आर्थिक व व्यापार क्षेत्र, रक्षा क्षेत्र, कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता एवं सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाने पर बल दिया गया।

अतः हिंद महासागर में भारत के प्रभाव को कम करने वाली चीनी गतिविधियों पर लगाम लगाने हेतु भारत द्वारा अपने पड़ोसी देशों एवं हिंद महासागरीय देशों के साथ चहुंमुखी संबंधों के विकास पर ध्यान देना अत्यावश्यक है।

सित्वे बंदरगाह
भारत अगले वर्ष की पहली तिमाही से म्यांमार में स्थित सित्वे बंदरगाह का संचालन शुरू करेगा।
यह किसी दूसरे देश में दूसरा बंदरगाह होगा जिसका संचालन भारत करेगा।
पहला ईरान का चाबहार बंदरगाह है।
• सित्वे बंदरगाह का निर्माण भारत कलादान परियोजना के तहत कर रहा है।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों की निर्भरता मौजूदा सिलीगुड़ी कॉरिडोर (केवल 27 किलोमीटर चौड़ा) पर खत्म करने की है।
प्रभाव
• पूर्वोत्तर राज्यों की सामान आपूर्ति के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर निर्भरता कम होगी।
• सिलीगुड़ी कॉरिडोर को तोड़कर चीन पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से अलग कर सकता है। इसके विकल्प के तौर पर कोलकाता बंदरगाह से सित्वे बंदरगाह को जोड़ने की योजना बनाई गई है।
अतः सित्वे बंदरगाह का भारत के लिए रणनीतिक एवं सामरिक महत्व है।
गौरतलब है कि चीन के द्वारा पाकिस्तान में ग्वादर, श्रीलंका में  हंबनटोटा के बाद म्यांमार में क्याउकप्यू बंदरगाह का निर्माण किया जा रहा है।
• भारत-बांग्लादेश सरकार से मांगला बंदरगाह को विकसित करने के लिए बातचीत कर रहा है।

सित्वे बंदरगाह के बारे में
सित्वे बंदरगाह 2016 में बंगाल की खाड़ी में म्यांमार के राखाइन राज्य की राजधानी सित्वे में भारत द्वारा निर्मित एक गहरे पानी का बंदरगाह है। यह बंदरगाह भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को बंगाल की खाड़ी के साथ मिजोरम से जोड़ेगा।

म्यांमार में संसदीय चुनाव
म्यांमार में हाल ही नवंबर 2020 में हुए संसदीय चुनावों में आंग सान सू की के नेतृत्व वाली सत्ताधारी पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) फिर भारी बहुमत के साथ सत्ता में आ गई है।
एनएलडी ने 920 सीट पर जीत दर्ज की है।

म्यांमार संसद की 1117 सीटों पर चुनाव हुआ था। जिसमें 315 सीट निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव एवं 161 सीट उच्च सदन हाउस ऑफ नेशनलिटीज में है।

प्रश्न." म्यांमार के साथ सीमा प्रबंधन भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम है। " इस कथन की समीक्षा कीजिए। 

भारत म्यांमार के मध्य लगभग 1600 किलोमीटर की भू-सीमा है। जो पूर्वोत्तर के 4 राज्यों अरुणाचल प्रदेश , नागालैंड , मणिपुर , मिजोरम से लगती है। 

भारत की आंतरिक सुरक्षा के समक्ष चुनौतियां :- 

* इस सीमा क्षेत्र में स्थित अनेक विद्रोही समूहों व अलगाववादी गुटों को चीन द्वारा वित्तीय सहायता , हथियारों की आपूर्ति एवं इनके नेताओं को शरण दी जाती है। 
PLA ( मणिपुर ) , ULFA , नगा विद्रोही समूह NSCN ( खापलांग ) जैसे विद्रोही समूहों द्वारा पूर्वोत्तर में भारत विरोधी गतिविधियों और आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दिया जाता है।
* इस सीमा क्षेत्र में बनी अस्थिरता अन्य संगठित अपराधों को भी प्रेरित करती है। जैसे - मानव व्यापार , वन्यजीव तस्करी , ड्रग्स सप्लाई आदि।
म्यांमार के रास्ते मणिपुर में बड़ी मात्रा में हेरोइन , अफीम व एंफेटामाइन  ( पार्टी ड्रग ) की तस्करी होती है। जिसकी देश के अन्य बड़े शहरों तक आसानी से पहुंच युवा मानव संसाधन को नुकसान पहुंचा रही है।
* रोहिंग्या शरणार्थियों में स्थित कुछ कट्टरवादी तत्वों द्वारा भी भारत में आतंकी हमले किए गए हैं।

आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से म्यांमार का महत्व :- 

हालांकि सीमा क्षेत्र में शांति बहाली हेतु दोनों देशों द्वारा कुछ संयुक्त प्रयास  अवश्य किए गए हैं।
* मार्च 2019 में विद्रोही समूहों के विरुद्ध कार्यवाही हेतु दोनों देशों की संयुक्त सेना द्वारा ऑपरेशन सनराइज चलाया गया।
* सीमा क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों से संबंधित गोपनीय जानकारी को साझा करने हेतु दोनों देशों के मध्य समझौता किया गया।
* रोहिंग्याओ हेतु रखाइन प्रांत ( म्यांमार ) के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए भारत द्वारा " रखाइन स्टेट डेवलपमेंट प्रोग्राम " चलाया जा रहा है।
सीमा क्षेत्र में बनी अस्थिरता को दूर करने हेतु भारत द्वारा निम्न प्रयास भी किए जाने चाहिए। जैसे - म्यांमार का सहयोग प्राप्त करना , विद्रोही गुटों से बातचीत करना , सुरक्षा बलों और इंटेलिजेंस एजेंसियों को मजबूत करना। 
इसके अतिरिक्त पूर्वोत्तर में चीन के हस्तक्षेप पर लगाम लगाने हेतु भारत को म्यांमार के साथ सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सशक्त बनाना चाहिए। 
अतः भारत-म्यांमार सीमा के बेहतर प्रबंधन एवं भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से म्यांमार की भूमिका अति महत्वपूर्ण है।

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