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राजस्थान के त्यौहार। हिंदू त्यौहार

Festivals of Rajasthan




हिंदू महीनों के नाम     

 1. चैत्र

 2. वैशाख

 3. ज्येष्ठ 

 4. आषाढ़

 5. श्रावण 

 6. भाद्रपद

 7. आश्विन

 8. कार्तिक

 9. मार्गशीर्ष

 10. पौष

 11.माघ

12.फाल्गुन


हिंदू महीना दो पक्षों कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में बंटा हुआ होता है।
शुरू के 15 दिन कृष्ण पक्ष के और अंत के 15 दिन शुक्ल पक्ष के होते हैं।
कृष्ण पक्ष - अंधेरी रातें (बदी)
कृष्ण पक्ष के 15वें दिन अमावस्या (काली रात) होती है।
शुक्ल पक्ष - उजाली रातें (सुदी)
शुक्ल पक्ष के 15वें दिन पूर्णिमा/पूर्णमासी (चांदनी रात) होती है।

पहला हिंदू महीना - चैत्र
पहला पक्ष - कृष्ण पक्ष
हिंदू नव वर्ष - चैत्र शुक्ल एकम (प्रतिपदा)

प्रश्न.कौनसा महीना 2 सालों में बंटा हुआ है ? - चैत्र

विक्रम संवत
• 57 ईसा पूर्व उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने चलाया।
• प्रथम दिन - चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (एकम)
इस दिन को नया संवत भी कहते हैं।
• अंतिम दिन - चैत्र अमावस्या।

* हिंदू त्यौहार विक्रमी कैलेंडर के अनुसार मनाए जाते हैं। 
* विक्रम कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित कैलेंडर है।
* विक्रमी कैलेंडर, ईसाई कैलेंडर से 57 वर्ष आगे हैं।

नोट - चंद्रमा आधारित कैलेंडर में 354-55 दिन होते हैं, जबकि सूर्य आधारित कैलेंडर में 365 दिन ह़ोते है।
सूर्य आधारित कैलेंडर के बराबर के लिए प्रत्येक तीसरे वर्ष विक्रमी कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है।


राजस्थान के त्यौहार

तीज त्यौहारा बावड़ी ले डूबी गणगौर
हिंदू त्यौहार छोटी तीज (श्रावण शुक्ल तृतीया) से शुरू होते हैं और गणगौर (चैत्र शुक्ल तृतीया) पर समाप्त हो जाते हैं।

 श्रावण महीना शुक्ल पक्ष

👉 तृतीया 

इस दिन छोटी तीज का त्यौहार मनाया जाता है।
 छोटी तेज पति-पत्नी के प्रेम का त्यौहार है।
छोटी तीज प्रकृति प्रेम का त्यौहार भी है। इस दिन महिलाएं लहरिया ओढ़नी ओढ़ती है।
जयपुर की छोटी तीज प्रसिद्ध है।
सिंजारा - नवविवाहिता के लिए ससुराल पक्ष से भेजे जाने वाले उपहार को सिंजारा कहा जाता है।

👉 पूर्णिमा
इस दिन रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है।
इस पूर्णिमा को नारियल पूर्णिमा भी कहा जाता है। क्योंकि नारियल की पूजा की जाती है।
इस दिन श्रवण कुमार की पूजा की जाती है।

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 भाद्रपद महीना कृष्ण पक्ष 

 👉 तृतीया:- बड़ी तीज
बड़ी तीज के अन्य नाम - बूढ़ी तीज,  कजली तीज, सातुड़ी तीज
बूंदी की बड़ी तीज प्रसिद्ध है।
बूंदी में श्रावण माह की छोटी तीज का त्यौहार नहीं मनाया जाता।

👉 षष्ठी - हल छठ (बलराम जयंती ), ऊब छठ

👉 अष्टमी - कृष्ण जन्माष्टमी

👉 नवमी - गोगा नवमी
इस त्यौहार में किसान हल को 9 गांठ वाली राखी बांधता है। (गोगा जी की भी पूजा की जाती है ) 
प्रमुख मेले - 
1. ददरेवा, चूरू
2. गोगामेडी, हनुमानगढ़

👉 द्वादशी:- बारस /बछबारस
इस दिन बछड़े की पूजा की जाती है।
इस दिन चाकू का प्रयोग नहीं किया जाता है।

👉 अमावस्या:- सती अमावस्या
रानी सती मेला, झुंझुनू 

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 भाद्रपद महीना शुक्ल पक्ष 

👉 द्वितीया
इस दिन रामदेव जयंती अथवा बाबे री बीज मनायी जाती है।
प्रमुख मेला - रुणिचा (रामदेवरा),  जैसलमेर
रामदेवरा मेले को मारवाड़ का कुंभ मेला भी कहा जाता है।
यह मेला द्वितीया से लेकर एकादशी तक लगता है। 


👉चतुर्थी:- इस दिन गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है। 
गणेश चतुर्थी के अन्य नाम - 
1. शिव चतुर्थी
2. कलंक चतुर्थी
3. चतरा चौथ

प्रमुख मेले - 
1. त्रिनेत्र गणेश मेला, रणथंभोर
2. चुंघी तीर्थ मेला, जैसलमेर

👉 पंचमी:- ऋषि पंचमी
इस दिन सप्त ऋषि (उत्तरमंडल में 7 तारों का समूह है) की पूजा की जाती है।
माहेश्वरी समाज का रक्षाबंधन इसी दिन मनाया जाता है। 
प्रमुख मेले - 
1. भोजन थाली मेला - कामा, भरतपुर
2. हरिराम जी का मेला - झोरड़ा, नागौर

👉 अष्टमी:-  राधा जन्माष्टमी
सलेमाबाद में निम्बार्क संप्रदाय का मेला लगता है। 

👉 दशमी:- तेजा दशमी
प्रमुख मेले - 
1. परबतसर मेला, नागौर
2. खेजड़ी वृक्ष मेला, जोधपुर

👉 एकादशी:- जलझूलनी एकादशी अथवा देव झूलनी एकादशी
इस दिन भगवान श्री कृष्ण की मूर्तियों को स्नान करवाया जाता है। 

👉 चतुर्दशी / चौदस:- अनंत चतुर्दशी 
इस दिन गणेश जी को विसर्जित किया जाता है। 

👉पूर्णिमा:-  इस दिन से श्राद्ध प्रारंभ हो जाते हैं। (16 दिन चलते हैं)

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आश्विन / आषौज महीना कृष्ण पक्ष

 👉 आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। 

श्राद्ध पक्ष में सांझी की पूजा की जाती है। 
सांझी गोबर व मिट्टी की बनी होती है।
नाथद्वारा में केले की सांझी बनाई जाती है। 
मत्स्येंद्र मंदिर (उदयपुर) को सांझी का मंदिर कहा जाता है। 
श्राद्ध पक्ष के अंतिम दिन थम्बुडा व्रत किया जाता है। 

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 आश्विन / आषौज महीना शुक्ल पक्ष

 👉 एकम:- शरद नवरात्रि प्रारंभ


👉 अष्टमी:- दुर्गा अष्टमी या होमाष्टमी

👉 दशमी:- दशहरा या विजयादशमी
कोटा व मैसूर (कर्नाटक) के दशहरे प्रसिद्ध हैं। 
इस दिन हथियारों की पूजा की जाती हैं। 
खेजड़ी की पूजा की जाती है।

नोट - खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है। इसे राजस्थान का कल्पवृक्ष भी कहा जाता है। 
खेजड़ी की छाल चर्म रोग के इलाज में प्रयुक्त की जाती है। 
खेजड़ी का फल -  सांगरी

इस दिन लीलटांस पक्षी के दर्शन शुभ माने जाते हैं। 
नोट - कन्हैयालाल सेठिया की कविता का नाम लीलटांस है।

👉 पूर्णिमा:- शरद पूर्णिमा / रास पूर्णिमा
प्रमुख मेले - 
1. मारवाड़ महोत्सव (मांड महोत्सव), जोधपुर
2. मीरा महोत्सव, चित्तौड़

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कार्तिक महीना कृष्ण पक्ष

👉 चतुर्थी:- करवा चौथ


👉 अष्टमी:- अहोई अष्टमी
संतान की लंबी उम्र के लिए यह व्रत किया जाता है। 

👉 त्रयोदशी:- धनतेरस 
ऋषि धन्वंतरि की जयंती

👉 चतुर्दशी:- रूप चतुर्दशी या रूप चौदस

👉 अमावस्या:- दीपावली

नोट - भगवान महावीर एवं दयानंद सरस्वती का मृत्यु दिवस भी कार्तिक अमावस्या ही है। 

 कार्तिक महीना शुक्ल पक्ष

 👉 एकम:- गोवर्धन पूजा

अन्नकूट महोत्सव - नाथद्वारा
इस महोत्सव में भील जनजाति हिस्सा लेती है। 

👉 द्वितीया:- भाई दूज - यम द्वितीया
                
👉 अष्टमी:- गोपाष्टमी

👉 नवमी:- आंवला नवमी - अक्षय नवमी
               
👉 एकादशी:- देवउठनी एकादशी
                       प्रबोधिनी एकादशी
                      तुलसी एकादशी

पुष्कर मेला प्रारंभ हो जाता है। 

👉 पूर्णिमा:- सत्यनारायण पूर्णिमा
पुष्कर मेला समाप्त हो जाता है।
प्रमुख मेले -
1. कोलायत मेला - बीकानेर
2. चंद्रभागा मेला - झालरापाटन, झालावाड़
3. रामेश्वरम मेला - सवाई माधोपुर

पुष्कर के अन्य नाम - तीर्थराज, कोंकण तीर्थ, तीर्थो का मामा
पुष्कर में विभिन्न मंदिर एवं 52 घाट है। जैसे-  ब्रह्मा जी मंदिर, सावित्री मंदिर, गायत्री मंदिर, रंगनाथ मंदिर आदि।

तीर्थों का भांजा - मचकुंड,  धौलपुर में
यहां भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को मेला लगता है। 

तीर्थों की नानी - देवयानी , जयपुर

कोलायत - कपिल मुनि का आश्रम।
कपिल मुनि ने सांख्य दर्शन दिया था। 

चंद्रभागा मेला - इसे हाडौती का सुरंगा मेला कहा जाता है।
इस मेले में मालवी नस्ल के पशुओं की खरीद बिक्री होती है।

रामेश्वरम - तीन नदियों का संगम
सीप नदी, बनास नदी, चंबल नदी

मार्गशीर्ष:-  इस महीने में कोई त्यौहार नहीं आता है। 

पौष:- इस माह में भी कोई प्रमुख त्यौहार नहीं आता। 

माघ महीना कृष्ण पक्ष

👉 चतुर्थी:- तिल चतुर्थी

                  संकट हरण चतुर्थी
प्रमुख मेला - चौथ का बरवाड़ा, सवाई माधोपुर


👉 एकादशी:- षटतिला एकादशी

👉 अमावस्या:- मौनी अमावस्या
इस दिन कुंभ मेले का शाही स्नान होता है। 

माघ महीना शुक्ल पक्ष

👉 एकम:- गुप्त नवरात्रि प्रारंभ


👉 पंचमी:- बसंत पंचमी - सरस्वती जयंती
                  
👉 पूर्णिमा:- 
बेणेश्वर मेला - नवाटापरा गाँव, डूंगरपुर 
3 नदियां इस स्थान पर मिलती है - सोम, जाखम, माही

खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती है।
इसे वागड़ का पुष्कर कहा जाता है।
इसे आदिवासियों का कुंभ कहा जाता है।
संत माव जी ने बेणेश्वर धाम की स्थापना की थी।

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फाल्गुन महीना कृष्ण पक्ष

👉 त्रयोदशी:- महाशिवरात्रि

प्रमुख मेला - घुश्मेश्वर महादेव मेला शिवाड़ , सवाई माधोपुर।

फाल्गुन महीना शुक्ल पक्ष

👉 द्वितीया:- फूलेरा दूज


👉 पूर्णिमा:- होली
कोड़ामार होली - भिनाय , अजमेर
लठमार होली - महावीर जी , करौली
पत्थरमार होली - बाड़मेर

बादशाह की सवारी -  ब्यावर में
न्हाण - सांगोद, कोटा
जन्म परण मरण का त्यौहार - जयपुर
ईलोजी की बारात - बाड़मेर
ईलोजी को छेड़छाड़ का देवता कहा जाता है।

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चैत्र महीना कृष्ण पक्ष

👉 एकम:- धूलंडी


👉 अष्टमी:- शीतलाष्टमी - चाकसू में गधों का मेला

👉 नवमी :- ऋषभदेव जयंती
ऋषभदेव मेला, धुलेव (उदयपुर)
भील जनजाति ऋषभदेव को केसरिया नाथजी और कालाजी मानती है। 

👉 एकादशी:- जौहर मेला, चित्तौड़गढ़ में

चैत्र महीना शुक्ल पक्ष

👉 एकम:- हिंदू नव वर्ष प्रारंभ

बसंत नवरात्र की शुरुआत
वृहत राजस्थान का गठन

👉 तृतीया:- गणगौर
* जयपुर व उदयपुर की गणगौर प्रसिद्ध है।
* जेम्स टॉड ने उदयपुर की गणगौर का वर्णन किया है।
* सर्वाधिक लोकगीतों वाला त्यौहार गणगौर है।
* लड़कियां अच्छे पति तथा भाई के लिए व्रत करती है। 

नोट:- जैसलमेर में गणगौर चतुर्थी को मनाई जाती है क्योंकि 1838 ईस्वी में बीकानेर रियासत की सेना ने जैसलमेर के गणगौर जुलूस पर आक्रमण कर शिवजी की प्रतिमा को
चुरा लिया। अतः यहां केवल पार्वती (गवर) की पूजा की जाती है।
जैसलमेर में चतुर्थी को गणगौर अथवा गवर की सवारी निकलती है। 
* नाथद्वारा में पंचमी को गुलाबी गणगौर अथवा चुनरी गणगौर होती है।

👉 अष्टमी:- अशोका अष्टमी

👉 नवमी:- रामनवमी

👉 पूर्णिमा:- हनुमान जयंती
सालासर (चुरु में) तथा मेहंदीपुर (दौसा) में मेला लगता है।

प्रश्न.बिना शिव (ईसर) की गवर (पार्वती) कहां पूजी जाती है ? - जैसलमेर

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वैशाख महीना कृष्ण पक्ष

👉 तृतीया:- धींगा गवर (गणगौर )

मेला - जोधपुर में 

वैशाख महीना शुक्ल पक्ष

👉 तृतीया:- अक्षय तृतीया (आखातीज)

इस दिन सर्वाधिक बाल विवाह होते हैं।
बीकानेर में इस दिन पतंगे उड़ाई जाती है।

👉 पूर्णिमा:- बुद्ध पूर्णिमा या पीपल पूर्णिमा।
वैशाख पूर्णिमा को भगवान बुद्ध का जन्म, उन्हें  ज्ञान की प्राप्ति एवं उनकी मृत्यु हुई थी। 

वैशाख पूर्णिमा के प्रमुख मेले :-
1. बाणगंगा मेला - विराटनगर, जयपुर
2. मातृकुंडिया मेला- चित्तौड़गढ़
3. नक्की झील मेला - माउंट आबू, सिरोही
4. गौतमेश्वर मेला - अरनोद, प्रतापगढ़
5. गोमती सागर मेला - झालरापाटन, झालावाड़
यहां मालवी नस्ल के पशुओं की खरीद-बिक्री होती है। 
वैशाख पूर्णिमा के दिन ही पोखरण में परमाणु परीक्षण किया गया था।

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ज्येष्ठ महीना कृष्ण पक्ष

👉 अमावस्या:- बड़ अमावस्या (वटवृक्ष अमावस्या) 

बरगद की पूजा की जाती है।

ज्येष्ठ महीना शुक्ल पक्ष

👉 दशमी:- गंगा दशमी

कामा (भरतपुर)  में मेला लगता है।

👉 एकादशी:- निर्जला एकादशी
उदयपुर में इस दिन पतंगे उड़ाई जाती है।

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आषाढ़ महीना

👉 कृष्ण पक्ष में कोई त्यौहार नहीं आता है।

आषाढ़ महीना शुक्ल पक्ष

👉 एकम:- गुप्त नवरात्रि प्रारंभ


👉 नवमी:- भदल्या नवमी

👉 एकादशी:- देवशयनी एकादशी

👉 पूर्णिमा:- गुरु पूर्णिमा - व्यास पूर्णिमा

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श्रावण महीना कृष्ण पक्ष

👉 पंचमी:- नाग पंचमी


👉 नवमी:- निडरी नवमी
नेवले की पूजा की जाती है।

👉 अमावस्या:- हरियाली अमावस्या
1. कल्पवृक्ष मेला - मांगलियावास, अजमेर
2. फतेहसागर झील मेला - उदयपुर में
3. बुड्ढा जोहड़ मेला - श्री गंगानगर में


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