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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना

 
Establishment of Indian National Congress


भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना

होमरूल/स्वशासन - आंतरिक शासन भारतीयों द्वारा किया जाए। लेकिन संपूर्ण स्वामित्व इंग्लैंड की महारानी का हो।
विदेश नीति और मुद्रा छापने का अधिकार अंग्रेजों के हाथों में।


ए ओ ह्यूम

कांग्रेस की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान एक सेवानिवृत्त ICS अधिकारी ए ओ ह्यूम का था।
यह स्कॉटलैंड का निवासी तथा एक निष्पक्ष न्यायप्रिय व्यक्ति था जिसे भारतीयों से लगाव था।
ए ओ ह्यूम ने 1883 में कोलकाता विश्वविद्यालय के स्नातकों को के नाम पत्र लिखा।

1884 में थियोसोफिकल सोसायटी का अडियार में सम्मेलन हुआ। 
ए ओ ह्यूम ने भारतीयों को अखिल भारतीय संगठन बनाने का सुझाव दिया। 
और 1884 में इंडियन नेशनल यूनियन (INU) की स्थापना की।
1885 में ह्यूम ने शिमला जाकर वायसराय डफरिन (1884-88) से मुलाकात की और उन्हें समझाया।

• 25 दिसंबर 1885 को बंबई में इंडियन नेशनल यूनियन की बैठक बुलाई और वहीं पर इसका नाम बदलकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) रख दिया।
ह्यूम ने घोषणा की कि 28 दिसंबर 1885 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला सम्मेलन पूना में आयोजित होगा।
लेकिन पूना में प्लेेग फैल जाने के कारण पहला अधिवेशन बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुआ।


भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

स्थापना - 28 दिसंबर 1885
स्थान - बंबई के ग्वालियर टैंक स्थित गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में।
संस्थापक - एलन आक्टेवियन ह्यूम
अध्यक्ष - व्योमेश चंद्र बनर्जी
प्रथम अधिवेशन में कुल 72 सदस्यों ने भाग लिया जिनमें ज्यादातर पत्रकार और वकील थे।
जैसे - दादा भाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता, दिनशा वाचा।

नोट - दादा भाई नौरोजी के कहने पर इसका नाम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) रखा गया।
कांग्रेस उत्तरी अमेरिका से लिया गया शब्द है, जिसका अर्थ होता है - लोगों का समूह (A group of people)

ए ओ ह्यूम 1885 से 1906 तक कांग्रेस के सचिव अथवा महामंत्री रहे।
1912 में इनकी मृत्यु के बाद कांग्रेस ने इन्हें अपना जन्मदाता और पिता घोषित किया।
ए ओ ह्यूम ने 1859 में ICS रहते हुए लोकमित्र नामक समाचार पत्र प्रकाशित किया था।

नोट - प्रति वर्ष दिसंबर महीने में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन आयोजित किया जाता था।


कांग्रेस के संबंध में विभिन्न मत

लाला लाजपत राय ने कहा -
• कांग्रेस डफरिन के दिमाग की उपज है।
• ए ओ ह्यूम स्वतंत्रता के पुजारी हैं तथा उन ह्रदय भारतीयों की दुर्दशा पर होता है।

डफरिन :-
• कांग्रेस अल्पसंख्यक भारतीयों की एक सूक्ष्म संस्था है।
• ए ओ ह्यूम पागल, धूर्त व बेईमान है।

कर्जन :-
• कांग्रेस गंदी चीज तथा देशद्रोही संगठन है।
• कांग्रेस अपने पतन के कगार पर खड़ी है, मैं चाहता हूं कि मैं इसके सुखद अंत में सहयोग कर सकूं।

तिलक :- यदि हम मेंढक की तरह वर्ष में एक बार शोर मचाएंगे तो कुछ भी प्राप्त नहीं होगा।

अश्विनी कुमार दत्त :- कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन 3 दिनों का तमाशा है।

बिपिन चंद्र पाल :- कांग्रेस एक याचना संस्था है।

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय :- कांग्रेस के लोग पदों के भूखे हैं।

अरविंद घोष :- कांग्रेस की कार्यप्रणाली बुलबुलों के साथ खेलने जैसी है।

कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में निम्नलिखित 9 प्रस्ताव पारित किए गए -
1. भारतीय शासन विधान की जांच के लिए रॉयल कमीशन का गठन किया जाए।
2. भारत परिषद को समाप्त किया जाए।
3. प्रांतीय व केंद्रीय व्यवस्थापिका का विस्तार एवं जनप्रतिनिधियों में संख्या की बढ़ोतरी।
4. आईसीएस परीक्षा का आयोजन भारत और इंग्लैंड दोनों में किया जाए तथा आयु सीमा 19 से 23 की जाए।
5. सैन्य व्यय में कटौती।
6. इंग्लैंड से आयातित कपड़ों पर पुनः आयात कर लगाया जाए।
7. बर्मा को भारत से अलग किया जाए।
8. समस्त प्रस्ताव को सभी प्रदेशों की सभी राजनीतिक संस्थाओं को भेजा जाए, जिससे वे इनके क्रियान्वयन की मांग कर सकें।
9. कांग्रेस का अगला सम्मेलन कलकत्ता में बुलाया जाए।

नोट - इनमें से एक भी प्रस्ताव किसानों व मजदूरों से संबंधित नहीं था।

कांग्रेस की स्थापना के समय गवर्नर जनरल लॉर्ड डफरिन था।
भारत सचिव - लॉर्ड क्रॉस

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