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भारत-जर्मनी संबंध ।। IR Notes for RAS

भारत-जर्मनी संबंध

भारत-जर्मनी संबंध 

India germany relation

प्रारंभिक काल में भारत और जर्मनी के संबंध अच्छे नहीं थे।
गोवा के मुद्दे पर जर्मनी ने पुर्तगाल का साथ दिया।
भारत के नाभिकीय परीक्षणों का विरोध भी जर्मनी द्वारा किया गया।

वर्ष 2000 ई. पश्चात्  संबंधों में सुधार हुआ है -

2001 ई. में सामरिक साझेदारी का समझौता किया गया।
2006 ई. में रक्षा सहयोग समझौता किया गया।

2011 ई. में अंतर सरकारी संवाद (IGC) की शुरुआत की गई। (Inter Governmental Consultation)
अंतर सरकारी संवाद प्रति 2 वर्ष में एक बार आयोजित किया जाता है। एक बार जर्मनी में दूसरी बार भारत में, भारतीय प्रधानमंत्री व जर्मनी के चांसलर इसमें भाग लेते हैं।
2017 में जर्मनी में आयोजित किया गया 2019 में भारत में आयोजित किया गया।
इसके तहत विदेशी मामले, आर्थिक सहयोग, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद विरोध आदि मुद्दों पर चर्चा की जाती है।
जर्मनी, यूरोपीय संघ में भारत का सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी है।
भारत में सातवां सबसे बड़ा निवेशक है।
भारत व यूरोपीय संघ के मध्य मुक्त व्यापार समझौते का समर्थक है।

भारत व जर्मनी को एक-दूसरे का पूरक कहा जाता है क्योंकि -
1. जर्मनी का जनसंख्या सूचकांक नकारात्मक, समाज में औसत आयु अधिक है जबकि भारत एक युवा देश है।
2. भारतीय युवाओं को कौशल की आवश्यकता है, वहीं जर्मनी का कौशल विकास कार्यक्रम अत्यधिक सशक्त है।
3. जर्मनी की अर्थव्यवस्था विनिर्माण (mfg.) आधारित, भारत की अर्थव्यवस्था सेवा (service) आधारित है।
4.भारत के मेक इन इंडिया कार्यक्रम में जर्मनी से निवेश आकर्षित किया जा रहा है।
5. सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के पास अत्यधिक संभावनाएं हैं वहीं जर्मनी के पास तकनीक उपलब्ध है।
6.भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील के द्वारा G-4 समूह का गठन किया गया है, जो कि सुरक्षा परिषद में सुधारों की मांग कर रहा है।
7. भारत के  नमामि गंगे कार्यक्रम में जर्मनी द्वारा सहयोग किया जा रहा है 

जर्मनी ने लॉन्च की हिन्द-प्रशांत रणनीति
यूरोपीय संघ के वर्तमान अध्यक्ष जर्मनी ने 2 सितंबर, 2020 को भारत के साथ अपनी हिन्द-प्रशांत रणनीति लॉन्च की।
व्‍यापार मार्गों को आक्रामक चीन से सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
फ्रांस के बाद हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए औपचारिक रणनीति तय करने वाला जर्मनी दूसरा देश बन गया है।
इसके तहत उन संस्थानों के साथ संवाद शुरू करने का सुझाव दिया गया है, जहां भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है- जैसे बिम्सटेक और हिंद महासागर रिम एसोसिएशन।

जर्मनी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भागीदारों के साथ मिलकर नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा सुधारों के लिए भारत और जापान के साथ सहयोग करेगा।

हिन्द-प्रशांत रणनीति लॉन्च करने का कारण
विश्व के 90% से अधिक विदेशी व्यापार समुद्र द्वारा संचालित किए जाते हैं, जिसका एक बड़ा हिस्सा हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के माध्यम से होता है। विश्व का 25% समुद्री व्यापार मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।

SAVE WATER

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