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ब्रेक्जिट ।। IR Notes for RAS

 
Brexit

ब्रेक्जिट

हाल ही चर्चा में क्यो ?

ब्रिटेन के ब्रेक्जिट समझौते से एकतरफा हट जाने के कारण यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने 1 अक्टूबर को उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी।
गौरतलब है कि 31 जनवरी 2020 को समूह से अलग होने के लिए ब्रिटेन ने समझौता किया था। यह समझौता दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी था। लेकिन हाल ही ब्रिटेन ने यूके इंटर्नल बिल नाम का कानून बनाकर समझौता तोड़ दिया।
गौरतलब है कि ब्रेक्जिट समझौते के तहत दोनों पक्षों को 31 दिसंबर 2020 से पहले व्यापार समझौता करना था। ब्रिटेन, ईयू के सदस्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता करना चाहता था परंतु ईयू तैयार नहीं था।
इसके बाद ब्रिटेन ने यूके इंटर्नल बिल पारित किया।
• ईयू और ब्रिटेन के बीच गतिरोध की मुख्य वजह समुद्र में मछली पकड़ने का अधिकार है। ब्रिटेन चाहता है, कि उसकी समुद्री सीमा में अन्य देशों के मछुआरे ना आएं।
• दोनों पक्षों में यदि व्यापार समझौता नहीं हो पाया तो सालाना 1 ट्रिलियन यूरो का नुकसान होगा।

ब्रेक्जिट
Brexit = Britain + Exit.

यूनाइटेड किंगडम 4 स्वायत्तशासी राष्ट्रों से मिलकर बना है -
A. इंग्लैंड
B. वेल्स
C. स्कॉटलैंड
D. उत्तरी आयरलैंड

United kingdom countries


1973 में यूनाइटेड किंगडम यूरोपियन आर्थिक समुदाय का सदस्य बना।
1975 में एक जनमत संग्रह करवाया गया जिसमें आर्थिक समुदाय के साथ बने रहने हेतु मतदान किया गया।

• ब्रेक्जिट की मांग यूनाइटेड किंगडम इंडिपेंडेंस पार्टी द्वारा उठाई गई जिसका मुख्य नेता बोरिस जॉनसन था।


ब्रेक्जिट हेतु निम्न कारण बताए गए -


1. यूरोपियन संघ एक राजनीतिक संगठन है, जिसके नियम और कानून यूनाइटेड किंगडम को मानने पड़ते हैं। इससे यूनाइटेड किंगडम की संप्रभुता प्रभावित होती है।

2. पूर्वी यूरोप से बड़ी संख्या में आव्रजक यूनाइटेड किंगडम में प्रवेश करते हैं, जिससे यूनाइटेड किंगडम में रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं।

3. यूनाइटेड किंगडम को यूरोपियन यूनियन के बजट में योगदान करना पड़ता है, परंतु बराबर मात्रा में लाभ नहीं मिलता है।

• 2013 में यूनाइटेड किंगडम के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने घोषणा की कि यदि वे सत्ता में आते हैं, तो इस मुद्दे पर एक जनमत संग्रह करवाया जाएगा।

23 जून 2016 को एक जनमत संग्रह करवाया गया, जिसमें 51.9 % लोगों ने ईयू से बाहर निकलने (ब्रेक्जिट) का समर्थन किया।
डेविड  कैमरून ने इस्तीफा दे दिया तथा थेरेसा मे प्रधानमंत्री बनी।
लिस्बन संधि के अनुच्छेद 50 के तहत  ईयू से बाहर निकलने की प्रक्रिया को प्रारंभ किया गया।

थेरेसा मे ने यह समझौता तीन बार यूनाइटेड किंगडम की संसद के समक्ष रखा परंतु संसद के द्वारा इसे नकार दिया गया। इसलिए थेरेसा मे ने इस्तीफा दे दिया और बोरिस जॉनसन को प्रधानमंत्री बनाया गया।

31 जनवरी 2020 को ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर हो गया अर्थात ब्रेक्जिट हो गया।



ब्रेक्जिट के प्रभाव

यूके पर प्रभाव

1. ब्रिटेन में कोई भी प्रशासनिक कार्य करने के दौरान आने वाली अड़चनें समाप्त होंगी।
2. ब्रिटेन को अपने अधिकारों और स्वयं के कानून बनाने में बाधाएं उत्पन्न नहीं होगी।
3. ब्रिटेन अपनी खुद की आव्रजन नीति बना सकता है।
4. यूरोपियन संघ सदस्यता शुल्क के तौर पर ब्रिटेन से कई बिलियन पाउंड लेता है। अब ब्रिटेन इस राशि को देने से मुक्त हो गया।
5. ब्रेक्जिट के कारण पौंड के मूल्य में गिरावट भी आ सकती है
 6. वित्तीय केंद्र के रूप में लंदन की महत्ता कम होगी।
7.यूनाइटेड किंगडम का 45% विदेशी व्यापार यूरोपियन संघ के साथ होता है, जो कि मुक्त व्यापार से लाभान्वित होता है, वह प्रभावित होगा।
8. यूनाइटेड किंगडम की दोनों राष्ट्रीय पार्टियों ने ब्रेक्जिट के विरुद्ध प्रचार किया परंतु उनकी बात नहीं सुनी गई अर्थात यूके की राजनीति में इनका प्रभुत्व कम हुआ है।
9. वैश्विक स्तर पर यूनाइटेड किंगडम की राजनीतिक स्थिति कमजोर होगी।
10. यूनाइटेड किंगडम की एकता एवं अखंडता प्रभावित होगी।

यूरोपियन संघ पर प्रभाव

1. अन्य देश भी यूरोपीय संघ से बाहर निकलने की मांग कर सकते हैं।
2. यूरोप में यूरोस्केप्टिक दलों (Eurosceptic Parties) का प्रभाव बढ़ रहा है। इन दलों की मुख्य मांग है, कि यूरोपियन संघ का विघटन किया जाना चाहिए।
3. यूरोपियन संघ के बजट में कमी।
4. यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्था में लगभग 15% की कमी।


ब्रेक्जिट का भारत पर प्रभाव

सकारात्मक प्रभाव

1. दीर्घकाल में ब्रेक्जिट भारत-ब्रिटेन संबंधों को मजबूत करेगा क्योंकि ब्रिटेन, यूरोपीय संघ के बाजारों तक अपनी पहुंच के नुकसान की क्षतिपूर्ति करना चाहेगा।
2.भारत के एक निर्यातक देश की तुलना में अधिक आयातक देश होने के कारण यह समझौता भारत के लिए सकारात्मक हो सकता है।
3.पौंड के मूल्य में गिरावट के कारण कई कंपनियां ब्रिटेन में भी संपत्ति खरीदने में सक्षम हो सकेंगी।
4. ब्रेक्जिट भारत और ब्रिटेन के बीच पारस्परिक व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा दे सकता है, क्योंकि अब ब्रिटेन भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए स्वतंत्र होगा।

नकारात्मक प्रभाव

1. इससे संरक्षणवादी प्रवृतियों को बढ़ावा मिलेगा जिससे विदेशों में रह रहे भारतीयों के प्रति नकारात्मक माहौल तैयार हो सकता है।
2. यूरोपीय संघ और यूनाइटेड किंगडम में भारतीयों द्वारा निवेश किया गया है, जो कि नकारात्मक रूप से प्रभावित होगा।
3. यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसमें और देरी हो सकती है।
4. यूरोपीय संघ व यूनाइटेड किंगडम के साथ अलग-अलग समझौते करने होंगे।
5. भारत व ईयू  के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ेगा
जैसे -विदेशी मामले, आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग, रक्षा सहयोग आदि।

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