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स्वच्छता सर्वेक्षण 2020

स्वच्छ सर्वेक्षण 2020



स्वच्छ सर्वेक्षण 2020

शहरी विकास मंत्रालय ने 20 अगस्त को 2020 स्वच्छता सर्वेक्षण नतीजे जारी किए।
देश के पांच वी वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण पुरस्कार 2020 की घोषणा केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने की, जहां विभिन्न श्रेणी में 129 पुरस्कार दिए गए।

सरकार के अनुसार कुल 4,242 शहरों, 62 छावनी बोर्ड और गंगा किनारे बसे 97 शहरों का सर्वेक्षण किया गया।

गौरतलब है कि पिछली 4 से 31 जनवरी तक शहरों का स्वच्छता सर्वे हुआ था। इसमें 57 इंडिकेटर्स देखते हुए 6000 अंकों के आधार पर रैंकिंग दी गई।

9 पैरामीटर पर हुआ सर्वे
• घरों से कचरा उठाना, परिवहन।
• कचरे का प्रसंस्करण, निष्पादन।
• दूषित पानी शुद्ध, फिर उपयोग।
• 3 सिध्दांत - गंदगी में कमी, फिर इस्तेमाल, पुनर्चक्रण पर जोर।
• ठोस प्रदूषको में कमी लाना।
• कचरा बीनने वालों की सामाजिक स्थिति सुधारना।
• जेम से खरीदी को बढ़ावा देना।
• गंगा नदी के पास बसे शहरों में स्वच्छता के लिए कदम उठाना।
• टेक्नोलॉजी से निगरानी।

देश में स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 का प्रथम पुरस्कार मध्य प्रदेश के इंदौर शहर को मिला है। इंदौर ने यह पुरस्कार लगातार चौथी बार प्राप्त किया है। इंदौर लगातार साल 2017 से ही इस सर्वेक्षण में शीर्ष पर बना हुआ है।
गुजरात का सूरत दूसरे और महाराष्ट्र का नवी मुंबई तीसरे स्थान पर काबिज है।

सबसे गंदा शहर - पटना सबसे गंदा शहर है।
इसके बाद पूर्वी दिल्ली और चेन्नई का नंबर है।

नई दिल्ली को देश की सबसे स्वच्छ राजधानी शहर के लिए पुरस्कृत किया गया।
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद को भारत की सबसे स्वच्छ राष्ट्रीय राजधानी घोषित किया गया।

एक से 10 लाख की जनसंख्या वाली श्रेणी में छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर को सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया है।

छत्तीसगढ़ को सौ से अधिक शहरों वाले राज्यों की श्रेणी में पहला स्थान मिला और झारखंड को सौ से कम शहरों वाले राज्य की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार मिला।

चालीस लाख से अधिक आबादी वाले सबसे स्वच्छ शहरों में गुजरात का अहमदाबाद शीर्ष पर रहा।

केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अनुसार वाराणसी गंगा नदी के किनारे पर बसा सबसे साफ शहर है।

स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 में जालंधर कैट को सबसे स्वच्छ छावनी घोषित किया गया है।

नोएडा को उत्तर प्रदेश में पहला स्थान और देश में 25वां स्थान मिला है।


10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर
एक से 10 लाख आबादी वाले शहर
 1
 इंदौर (मध्यप्रदेश)
 1
अंबिकापुर (छत्तीसगढ़)
 2
 सूरत (गुजरात)
 2
मैसूर (कर्नाटक)
 3
 नवी मुंबई (महाराष्ट्र)
 3
नई दिल्ली





गंगा किनारे बसे (एक लाख से ज्यादा आबादी)

 छावनी बोर्ड
 1
वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
 1
जालंधर कैंट (पंजाब)
 2
कानपुर (उत्तर प्रदेश)
 2
दिल्ली कैंट
 3
मुंगेर (बिहार)
 3
मेरठ कैंट (उत्तर प्रदेश)



स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 राजस्थान

इस साल राजस्थान के 3 बड़े और 8 छोटे शहरों ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में रैंक हासिल की है।
• राजस्थान के जयपुर को 28वां एवं जोधपुर को 29वां और कोटा को 44वां स्थान मिला है।
2019 में जयपुर 44वीं, जोधपुर 243वीं और कोटा 302वीं रैंक पर था।

• जोधपुर को फास्टेस्ट मूविंग बिग सिटी का खिताब भी मिला है।

• एक से 10 लाख आबादी के बीच के शहरों में राजस्थान के उदयपुर की 54वीं, चित्तौड़गढ़ की 81वीं और अलवर की 155वीं रैंक है।

 डूंगरपुर
• एक लाख से कम आबादी के छोटे शहरों में राजस्थान के डूंगरपुर जिले को 10 वीं रैंक मिली है।
राजस्थान में डूंगरपुर इकलौता ऐसा निकाय बन चुका है, जिसे स्टार सिटी का खिताब मिला है।
सिटीजन फीडबैक में डूंगरपुर देश में नंबर वन आया है।

• स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 राजस्थान में सीकर नगर परिषद प्रथम स्थान पर रही है।

प्रश्न.स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में बड़े शहरों की सूची में राजस्थान के कितने जिले टॉप 100 में जगह बना पाए ? - 3

प्रश्न.एक से 10 लाख आबादी के बीच के शहरों में राजस्थान के कौन से शहर टॉप 100 में जगह बना पाए ? - उदयपुर और चित्तौड़गढ़

प्रश्न.स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 राजस्थान में कौनसी नगर परिषद प्रथम स्थान पर रही ? - सीकर

स्मार्ट सिटी योजना में शामिल होते हुए भी जयपुर की रैंक 28वीं आने के निम्नलिखित कारण है -

घरों से गीला-सूखा कचरा अलग-अलग ले जाना था, लेकिन सर्वेक्षण के दौरान भी यह नहीं हो सका।

आमजन नहीं जुड़े। 60 लाख रुपए खर्च करने के बाद भी स्कूलों-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम कम हुए।

स्वच्छता ऐप डाउनलोड तो किया लेकिन जानकारी के अभाव में उपयोगी नहीं रहा, शहर की सफाई से संबंधित सवालों का जवाब नहीं दे पाई जनता।

नगर निगम बोर्ड नहीं था। ऐसे में वार्ड स्तर पर पार्षदों के नहीं होने से स्वच्छता संबंधित काम नहीं हुए।

नए 5 हजार सफाईकर्मियों की भर्ती हुई, लेकिन अधिकतर सफाईकर्मी फील्ड में नजर नहीं आए।

डंपिंग यार्ड तक प्रतिदिन 1400 टन कचरा पहुंच रहा है। लेकिन निस्तारण 500 टन का भी नहीं हुआ है।

सी एंड डी वेस्ट और बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए प्लांट शुरू नहीं हुए हैं।

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