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तियानमेन नरसंहार

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तियानमेन नरसंहार

4 जून 2020 को तियानमेन स्क्वायर नरसंहार के 31 वर्ष पूरे हो गए हैं।
तियानमेन स्क्वायर विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत अप्रैल 1989 में कम्युनिस्ट पार्टी के तत्कालीन शीर्ष नेता और समाज सुधारक हू याओबांग की मृत्यु के बाद हुई थी ,जब हजारों छात्र और मजदूर लोकतंत्र की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने लगे ,समय के साथ आंदोलनकारियों की संख्या बढ़ने लगी और तानाशाही समाप्त करने तथा लोकतंत्र बहाल करने की मांग भी तेज होने लगी।

धीरे-धीरे विरोध प्रदर्शन इतने  तेज हो गए कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार को अपने कई कार्यक्रम रद्द करने पड़े, यह विरोध प्रदर्शन चीन की सरकार के समक्ष एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरने लगे और अंततः चीन की सरकार ने  सैन्य शक्ति के दम पर प्रदर्शन को कुचलने का निर्णय लिया।

इसी उद्देश्य  से 4 जून को चीन की सेना ने तियानमेन स्क्वायर में प्रवेश किया और वहां मौजूद "गोडेस ऑफ डेमोक्रेसी" की प्रतिमा को टैंक से उड़ा दिया गया, जब वहां मौजूद छात्रों और मजदूरों ने इसका विरोध करना चाहा तो सैनिकों द्वारा उन पर गोलियां चलाई गई।

एक अनुमान के अनुसार चीन की सरकार के आदेश पर की गई इस सैन्य कार्यवाही में तकरीबन 10,000 लोगों की मृत्यु हुई थी।
उल्लेखनीय है कि तियानमेन में हुए विरोध प्रदर्शनों को चीन के "आधुनिक राजनीतिक इतिहास" का सबसे बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन कहा जाता है।

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