आपका स्वागत है, डार्क मोड में पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें अपडेट के लिए टेलीग्राम चैनल DevEduNotes से जुड़ेें

पंचायतीराज व्यवस्था

Springboard Academy Online, Springboard


पंचायतीराज व्यवस्था

स्थानीय सरकार का अर्थ - नगर या गांव के लोगों द्वारा अपने क्षेत्र की सरकार को स्वयं चुनना।

विशेषताऐं -
(1) स्थानीय इकाई - स्थानीय लोगों द्वारा चुनी गई।
(2) दोहरा स्वरूप - पंचायत,  नगरीय निकाय
(3) व्यस्क मतदान - 18 वर्ष से अधिक एवं निर्वाचन नामावली में नाम
(4) राज्य सूची का विषय - DPSP में शामिल
(5) राज्य सरकार का नियंत्रण - पंचायती राज मंत्रालय के अधीन
(6) संवैधानिक आधार -
• अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों के गठन का प्रावधान किया गया है।
• DPSP का भाग होने के कारण ज्यादा महत्व नहीं।
• 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
• संविधान के भाग 9 में अनुच्छेद 243 से अनुच्छेद 243(O) तक पंचायती राज का प्रावधान है।
• 11वीं अनुसूची में पंचायती राज संस्थाओं को 29 विषय दिए गए।

पंचायतीराज व्यवस्था का महत्व

1. जनता की अधिकतम भागीदारी।
2. योजनाओं का सही क्रियान्वयन तथा सही भागीदारों को चिन्हित करना।
3. केंद्र व राज्य सरकार का कार्यभार कम करना। जैसे - मनरेगा का क्रियान्वयन।
4. स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान।
5. स्थानीय सभ्यता, संस्कृति व पर्यावरण की रक्षा।
6. लोकतंत्र का आधार - गांधीजी के अनुसार असली भारत ग्रामीण क्षेत्र में बसता है।
• भारत में ग्राम स्वराज की अवधारणा सर्वप्रथम महात्मा गांधी ने प्रस्तुत की।

पंचायतीराज का विकास

वैदिक युग - सभा, समिति, विदथ
महाकाव्य काल - पुर, जनपद
मौर्य काल - पुर (मुखिया-नागरिक)
मध्यकाल - मुकदम, पटवारी, चौधरी
ब्रिटिश काल - मेयो प्रस्ताव, लॉर्ड रिपन योगदान

लॉर्ड मेयो प्रस्ताव - स्थानीय सरकारों को आर्थिक आधार पर सशक्तिकरण के लिए 1870 में वित्तीय विकेंद्रीकरण का प्रस्ताव दिया गया।

लॉर्ड रिपन प्रस्ताव - 1882 में स्थानीय निकाय के सदस्यों को मनोनीत के स्थान पर जनता द्वारा मताधिकार से चयन का प्रस्ताव दिया। तथा चयनित सदस्य स्वयं अपने लीडर का चयन करेंगे इसे स्थानीय निकाय का मैग्नाकार्टा कहा जाता है।
• लॉर्ड रिपन को भारत में स्थानीय स्वशासन व उदारवाद का जनक कहा जाता है।

रॉयल कमीशन - 1906-07 में रॉयल कमीशन ने पंचायतीराज व्यवस्थाओं को सशक्त करने का प्रस्ताव दिया।

स्वतंत्रता के बाद पंचायतीराज का विकास

संविधान में DPSP में अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायत का प्रावधान है।
1950 में पंचायतीराज मंत्रालय का गठन किया गया। प्रथम पंचायतीराज मंत्री एस के डे थे।
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1952 में सामुदायिक विकास कार्यक्रमों की शुरुआत की।
सामुदायिक विकास कार्यक्रमों का संबंध ग्रामीण विकास से था लेकिन यह कार्यक्रम असफल हो गए।

राष्ट्रीय सामुदायिक विकास कार्यक्रम की असफलता की जांच के लिए 1957 में बलवंतराय मेहता समिति का गठन  किया गया।

बलवंत राय मेहता समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सामुदायिक विकास कार्यक्रम इसलिए असफल हुए  क्योंकि इनमें स्थानीय लोगों का सहयोग नहीं लिया गया। यह कार्यक्रम सिर्फ शीर्ष अधिकारियों व कर्मचारियों तक ही सीमित रहें।

समिति ने 1959 में निम्न सिफारिशें दी -
त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। त्रिस्तर - ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद
व्यस्क मताधिकार
चुनाव की व्यवस्था
नियमित चुनाव
वित्तीय स्रोत

2 अक्टूबर 1959 में जवाहरलाल नेहरू ने देश में सर्वप्रथम राजस्थान के नागौर के बगदरी गांव से पंचायतीराज व्यवस्था की शुरुआत की।

अशोक मेहता समिति (1977)
• द्विस्तरीय व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
1. मंडल पंचायत
2. जिला परिषद
• जिला परिषद - विकास कार्यक्रम के लिए मुख्य भूमिका
• संवैधानिक आधार प्रदान किया जाना चाहिए।
• चुनाव दलीय पद्धति के आधार पर
• SC/ST के लिए पंचायतीराज व्यवस्था में आरक्षण
• राज्य में भी पंचायतीराज मंत्रालय का गठन
• लेखा परीक्षक होना चाहिए।
• वनारोपण की अनिवार्य शक्ति भी पंचायतीराज संस्थाओं दी जानी चाहिए।

नोट - इस समिति ने ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति के स्थान पर मंडल पंचायत की सिफारिश की थी।

जी वी के राव समिति - 1985
1. जिला परिषद- विकास कार्यों का केंद्र
2. जिला विकास आयुक्त की सिफारिश
3. पंचायतों के नियमित चुनाव

नोट - इस समिति ने चार स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की। उदाहरण - पश्चिम बंगाल

एल एम सिंघवी समिति- 1986
1. पंचायतीराज संस्थाओं को संवैधानिक आधार दिया जाए।
2. विकास संबंधी योजनाओं में ग्राम सभा की भूमिका
3. पंचायतीराज संस्थाओं के पास वित्त के अधिक स्रोत होने चाहिए। (राज्य वित्त आयोग)

64 वां संविधान संशोधन (1989)
- संवैधानिक आधार प्रदान करने का प्रस्ताव राज्यसभा में पास नहीं हुआ।

73 वां संविधान संशोधन- 1992
• एल एम सिंघवी समिति की सिफारिश पर यह संविधान संशोधन किया गया।
• इस संशोधन की सिफारिशों को 24 अप्रैल 1993 को देश में लागू किया गया।
• राजस्थान में 23 अप्रैल 1994 को लागू क-पंचायतीराज संस्थाओं को संवैधानिक आधार प्रदान किया गया।
• संविधान के भाग 9 में अनुच्छेद 243 से अनुच्छेद 243(O) तक पंचायतीराज संस्थाओं का प्रावधान किया गया।

विशेषताऐं

1. ग्राम सभा का प्रावधान-  ग्राम पंचायत के सभी पंजीकृत मतदाता ग्राम सभा के सदस्य होते है।
2. त्रिस्तरीय व्यवस्था

 स्तर
 अध्यक्ष
 निर्वाचन
 ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत
 सरपंच
 प्रत्यक्ष मतदान द्वारा
 खंड स्तर पर पंचायत समिति
 प्रधान
 सदस्यो द्वारा अप्रत्यक्ष
 जिला स्तर पर जिला परिषद
 जिला प्रमुख


3. व्यस्क मताधिकार
4. 5 वर्ष का कार्यकाल
5. पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के गठन का प्रावधान - अनुच्छेद 243(k)
6. पंचायतीराज संस्थाओं के लिए राज्य वित्त आयोग का गठन- अनुच्छेद 243(I)

7. निश्चित कार्य- अनुच्छेद 243(G)
- सामाजिक व आर्थिक कार्यक्रम
- सामाजिक व आर्थिक कार्यक्रम का क्रियान्वयन
8. आरक्षण का प्रावधान - 
- महिलाओ के लिए एक-तिहाई आरक्षण
- SC/ST/OBC के लिए आरक्षण

9. 11वीं अनुसूची का प्रावधान - 29 विषय
 - राज्य सरकार द्वारा निश्चित
10. लेखा परीक्षण - पंचायतों के खातों की जांच करना।
11. कुछ राज्यों को छूट- नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल, दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) मेघालय, जम्मू व कश्मीर
12. अनिवार्य व स्वैच्छिक प्रावधान

अनिवार्य प्रावधान-
1.ग्राम सभा
2.तीनों स्तरों पर प्रत्यक्ष रूप से चुनाव
3.महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण
4.सदस्यों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष
5.राज्य वित्त आयोग का गठन
6.राज्य निर्वाचन आयोग का गठन
7.कार्यकाल- 5 वर्ष

स्वैच्छिक प्रावधान
1. विषयों का हस्तांतरण- 29 विषय
2. OBC को आरक्षण जनसंख्या के अनुपात में
3. पंचायतों को वित्तीय अधिकार व सदस्यों में चयन का अधिकार

पंचायती राज व्यवस्था का मूल्यांकन

कमियां -
1.फंड की कमी - वित्तीय संसाधनों की कमी
- राज्य सरकार के करो का सीमित अधिकार
- राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं।
2. राज्य सरकार का अत्यधिक हस्तक्षेप - जिला नियोजन समिति में राज्य सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य
3. राज्य सरकार की इच्छाशक्ति में कमी - 11वीं अनुसूची के सभी विषयों का हस्तांतरण नहीं।

4. सरपंच पति व सरपंच पुत्र - महिला सशक्तिकरण को कमजोर करना
5.समन्वय का अभाव - राजनीतिक सदस्य बनाम प्रशासनिक अधिकारी
- प्रधान बनाम BDO
- सरपंच बनाम VDO
- जिला प्रमुख बनाम CEO

6. ग्राम सभा की बैठकों में अरुचि
7. डिजिटल साक्षरता का अभाव
8. लेखक परीक्षण का औपचारिक प्रावधान
9. भ्रष्टाचार
10. मानव संसाधन की कमी

समाधान व सुझाव

1. पंचायत बजटिंग- वित्तीय समाधान
2. 11वीं अनुसूची के विषयों का हस्तांतरण सुनिश्चित
3. राज्य सरकार का कम से कम हस्तक्षेप
4. सौहार्द्वपूर्ण संबंध
5. प्रशिक्षण की व्यवस्था
6. मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित
7. सामाजिक अंकेक्षण
8. राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें बाध्यकारी
9. सरपंच पति, सरपंच पुत्र जैसी स्थिति में प्रभावी कार्यवाही
10. दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग (अध्यक्ष- वीरप्पा मोइली) की विभिन्न सिफारिशें
• स्थानीय केडर की व्यवस्था। जैसे - कर्नाटक
• प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था - पंचायत की सहमति पर राज्य सरकार द्वारा
• निर्वाचन संबंधी कार्यवाही का अधिकार राज्य सरकार के बजाय SEC द्वारा रिपोर्ट राज्यपाल को प्रस्तुत
• राज्य सरकार से सदस्यों के निलंबन का अधिकार ले लिया जाना चाहिए।

पंचायतीराज व्यवस्था को सशक्त करने के लिए किये गये प्रयास -

1. 2016 में भारत सरकार द्वारा ग्रामोदय से भारत उदय की ओर कार्यक्रम चलाया
• 14 अप्रैल 2016 को मऊ (मध्यप्रदेश) से शुरू
• 24 अप्रैल 2016 को जमशेदपुर (झारखंड) में समाप्ति
2.अनिवार्य मतदान जैसे - गुजरात
3.अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता - हरियाणा
• राजस्थान में 2019 में वापस ले लिया गया
4. भ्रष्टाचार रोकने के लिए सामाजिक अंकेक्षण

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था

BDO = खंड विकास अधिकारी  Block Development Officer
CEO = मुख्य कार्यकारी अधिकारी Chief Executive Officer
VDO = ग्राम विकास अधिकारी Village Development Officer
डायरेक्टर्स - पंचायत समिति के सदस्य

 स्तर
 अध्यक्ष
 उपाध्यक्ष 
 सदस्य
प्रशासनिक अधिकारी
 ग्राम पंचायत

  निर्वाचन →
 सरपंच

 प्रत्यक्ष 
 उप सरपंच

अप्रत्यक्ष
वार्ड पंच 

प्रत्यक्ष
ग्राम सेवक/VDO
 पंचायत समिति

  निर्वाचन → 
 प्रधान

अप्रत्यक्ष
 उप प्रधान

अप्रत्यक्ष
डायरेक्टर्स

प्रत्यक्ष
 BDO
 जिला परिषद

  निर्वाचन → 
 जिला प्रमुख

 अप्रत्यक्ष
 उप जिला प्रमुख

अप्रत्यक्ष
 पार्षद

प्रत्यक्ष
 CEO



सरपंच प्रधान व जिला प्रमुख को पद की शपथ निर्वाचन अधिकारी दिलाता है।

इस्तीफा
सरपंच, उपसरपंच →  विकास अधिकारी को
उपप्रधान व डायरेक्टर्स →  प्रधान को
प्रधान, उप जिला प्रमुख, जिला पार्षद →  जिला प्रमुख को
जिला प्रमुख →  संभागीय आयुक्त को देता है।

पंचायती राज के संबंध में गठित प्रमुख समितियां


 समिति
 सिफारिश
 सादिक अली 1964
 दलीय आधार पर चुनाव 
 अशोक मेहता 1977 
 मंडल पंचायत (द्विस्तरीय पंचायतीराज)
 पी के थुंगन 1989 
 महिलाओं को आरक्षण
 व्यास समिति 2010
 पांच विषय पंचायतीराज संस्थाओं को
1. प्राथमिक शिक्षा 2. कृषि 3. चिकित्सा 4. महिला एवं बाल विकास 5. सामाजिक अधिकारिता एवं न्याय

ग्राम सभा/ आम सभा

पंचायतीराज की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है।
ग्राम पंचायत के सभी वयस्क मतदाता ग्राम सभा के सदस्य होते हैं।
ग्राम सभा की बैठकें 1 वर्ष में चार बार अनिवार्य रूप से होती है -
1. गणतंत्र दिवस 26 जनवरी
2. मजदूर दिवस 1 मई
3. स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त
4. गांधी जयंती 2 अक्टूबर
• ग्राम सभा व ग्राम पंचायत दोनों की बैठकों की अध्यक्षता सरपंच करता है।
• 24 घंटे की अल्प सूचना पर सरपंच कभी भी ग्रामसभा की बैठक बुला सकता है।

नोट -
• पंचायतीराज लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण पर आधारित है।
• लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की शुरुआत आंध्र प्रदेश (1958) में हुई।
• बलवंत राय मेहता को आधुनिक पंचायतीराज का जनक कहा जाता है।
• प्रधानमंत्री राजीव गांधी का काल पंचायती राज का स्वर्ण काल कहलाता है।

पंचायती राज दिवस
भारत में हर साल 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का कारण 73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 है जो 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ था।
इसे राष्ट्रीय स्थानीय सरकार दिवस भी कहा जाता है।
अप्रैल 2010 में पहला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2020 के अवसर पर एकीकृत ई-ग्राम स्वराज पोर्टल लॉन्च किया है।
पंचायती राज संस्थाओं में गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए ई-ग्राम स्वराज पोर्टल उपयोगी है।

स्वामित्व योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2020 के अवसर पर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वामित्व योजना की घोषणा की है।
इस योजना के अंतर्गत देश के सभी गांवों में ड्रोन के माध्यम से गांव की प्रत्येक संपत्ति का मानचित्रण (Mapping) किया जाएगा। इसके बाद गांव के लोगों को उस संपत्ति का मालिकाना प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। जिसका उपयोग ऋण और अन्य वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए किया जा सकेगा।

अपडेट एवं सुधार के लिए 
www.devedunotes.com देखते रहे।

SAVE WATER

Share with Friends

Post a Comment

0 Comments