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अध्याय - 5 लोक प्रशासन का महत्व

Lok prashasan, DevEduNotes

लोक प्रशासन का महत्व

जवाहरलाल नेहरू के अनुसार "लोक प्रशासन सामाजिक, आर्थिक न्याय का माध्यम है।"

विलोबी के अनुसार "लोक प्रशासन सरकार की चौथी शाखा है।"

डोनहम के अनुसार "यदि आधुनिक नागरिक सभ्यताएं असफल होती है तो इसका मुख्य कारण लोक प्रशासन की असफलता होगा।"

एपलबी  के अनुसार "लोक प्रशासन के बिना सरकार केवल परिचर्चा क्लब है।"

पिगोर्स के अनुसार "लोक प्रशासन समाज में स्थायित्व लाने वाला है।"

1. एक विषय के रूप में लोक प्रशासन का महत्व:-

लोक प्रशासन के प्रति एक समझ विकसित होती है।

इससे व्यक्ति में नैतिक मूल्यों का विकास होता है।


2. सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनकर्ता के रूप में:-

सामाजिक परिवर्तनकर्ता के रूप में:- इस रूप में लोक प्रशासन विभिन्न सामाजिक समस्याओं जैसे बाल विवाह, बाल मज़दूरी, पर्दा प्रथा, दहेज प्रथा, विधवा पुनर्विवाह आदि के समाधान संबंधी प्रयास करता है।

आर्थिक परिवर्तनकर्ता के रूप में:- इस रूप में लोक प्रशासन द्वारा विभिन्न आर्थिक समस्याओं जैसे गरीबी, बेरोजगारी, संसाधनों का अपव्यय का समाधान किया जाता है।


3. लोकतंत्र के वाहक व रक्षक के रूप में:-
निष्पक्ष चुनाव करवाना
जन शिकायतों का समय पर निस्तारण करना,
राजनीतिक जागरूकता संबंधी कार्य करना।


4. सभ्यता व संस्कृति की संरक्षक के रूप में:-
सांस्कृतिक विविधता का संरक्षण करना
विभिन्न कलाओं का संरक्षण करना जैसे चित्रकला, संगीत, स्थापत्य कला आदि।
देश के गौरवशाली मूल्यों का संरक्षण करना।


5. आजीविका के माध्यम के रूप में:- भारत में लगभग दो करोड़ तथा अमेरिका में 18%, फ्रांस में 33% व स्वीडन में 38% लोग सरकारी क्षेत्र या लोक प्रशासन में कार्य कर रहे हैं, जिनके लिए लोक प्रशासन आजीविका का माध्यम है।

6. जन कल्याण का माध्यम:- इस रूप में लोक प्रशासन समाज के शोषित, पीड़ित, वंचित वर्ग को समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास करता है।
           उल्लेखनीय है कि भारत में लोक प्रशासन यह कार्य नीति निदेशक तत्वों के माध्यम से करता है।

 वर्तमान राज्यों को प्रशासकीय राज्य भी कहा जाता है। (वाल्डो - एडमिनिस्ट्रेटिव स्टेट, 1948)
 अतः  कहा भी जाता है कि लोक प्रशासन जन्म से लेकर कब्र तक हर जगह विद्यमान है ।

7. विधि व न्याय प्रदान करना:-
 न्यायपालिका द्वारा दिए गए आदेशों , निर्णय का क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
 न्यायपालिका को विभिन्न गवाह व साक्ष्य उपलब्ध करवाना।

8. लोक प्रशासन निजी प्रशासन से संरक्षणकर्ता के रूप में कार्य करता है।

लोक प्रशासन के बढ़ते महत्व या कार्य वृद्धि के कारण:-

1. पुलिस राज्य के स्थान पर कल्याणकारी राज्य का उदय
2. जनसंख्या वृद्धि
3. तीव्र औद्योगिकरण, परिवहन, आवास, अपराध की समस्या पटना
4., आतंकवाद, नक्सलवाद, नस्लवाद,
5. पर्यावरण निम्नीकरण, जलवायु परिवर्तन
6. वर्ग संघर्ष, संगठित अपराध
7. LPG का प्रभाव।

लोक प्रशासन पर LPG के प्रभाव:-

1. लोक प्रशासन नियंत्रणकर्ता के स्थान पर प्रोत्साहनकर्ता,  सहजकर्ता बन गया।
2.लोक प्रशासन में भी विनौकरशाहीकरण पर बल (प्रशासन के आकार में कटौती)
        (भारत के संदर्भ में - गोल्डन हैंडसेक,  पांचवें वित्त आयोग द्वारा 30% पदों की समाप्ति की सिफारिश) 

3. प्रशासनिक सुधार व नवाचारों पर बल (भारत में आरटीआई, सिटीजन चार्टर, पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट, 360 डिग्री फीडबैक सिस्टम)
4.विकेंद्रीकरण पर बल (73 व 74 वाँ संविधान संशोधन)
5. 3E पर बल दिया गया।
6.जनसंपर्क व जन सहभागिता का समर्थन।

विकसित व विकासशील देशों में लोक प्रशासन की भूमिका:-

विकसित देशों के लोक प्रशासन की विशेषताएं:-
1. उत्तरदाई जवाबदेह और पारदर्शी प्रशासन
2. विश्वसनीय प्रशासन
3. प्रशासन में जनभागीदारी
4. विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका
5. तार्किक सुशासन,
6. विकेंद्रीकृत शासन
7. कानून और संविधान के प्रति प्रतिबद्ध

विकासशील देशों के लोग प्रशासन की विशेषताएं:-
1. औपनिवेशिक विरासत
2. प्रशासन में सामान्य की महत्वपूर्ण भूमिका
3. प्रशासन में भ्रष्टाचार लालफीताशाही,
4. केंद्रीकृत प्रशासन
5. जन सहभागिता का भाव
6. कानून और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता का अभाव

विकसित व विकासशील देशों के लोक प्रशासन में अंतर

 विकसित
 विकासशील


 गुणात्मक भूमिका
(उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, शोध व विकास कार्य)  

 मात्रात्मक भूमिका
(साक्षरता दर को बढ़ाना)
 विकेंद्रीकृत
 केंद्रीकृत
 लालफीताशाही नहीं
 लालफीताशाही
 जनभागीदारी
 जनभागीदारी का अभाव
 TAR
 तुलनात्मक रूप से कम TAR
 विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका
 सामान्यज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका
 कानूनों व संविधान के प्रति प्रतिबद्धता
 कानूनों व संविधान के प्रति प्रतिबद्धता का अभाव

विकसित व विकासशील देशों में लोक प्रशासन की भूमिका:-

1. एक विषय के रूप में लोक प्रशासन का महत्व
2. सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनकर्ता के रूप में
3. लोकतंत्र के वाहक व रक्षक के रूप में
4. सभ्यता व संस्कृति के संरक्षक के रूप में
5. आजीविका  के माध्यम के रूप में
6. जन कल्याण का माध्यम
7. विधि व न्याय प्रदान करना,
8. लोक प्रशासन निजी प्रशासन से संरक्षणकर्ता  के रूप में कार्य करता है।
9. आपदा निवारक के रूप में
10. प्रशासनिक नीतियों के निर्माता,  क्रियान्वयनकर्ता और वितरणकर्ता के रूप में।

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