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अध्याय - 10 पदसोपान

Lok prashasan, DevEduNotes



पदसोपान का सिद्धांत

पदसोपान संगठन का वह सिद्धांत है, जो संगठन में ऊपर से नीचे तक उत्तरदायित्व तय करता है तथा वरिष्ठ अधीनस्थ संबंधों की पहचान कराता है तथा यह प्रत्येक  संगठनों में लागू होता है।

पदसोपान की विशेषताएं:-

1. यह एक पिरामिडाकार संरचना है।
2. इसके द्वारा संगठन को विभिन्न इकाइयों  और उप इकाइयों में विभाजित किया जाता है।
3. इससे वरिष्ठ अधीनस्थ संबंधों की पहचान होती है।
4. यह सिद्धांत आदेश की एकता एवं नियंत्रण के क्षेत्र के सिद्धांत का आधार है।
5. इसमें आदेशों का प्रवाह सदैव ऊपर से नीचे की ओर होता है। (उच्च अधिकारी द्वारा अधीनस्थों को आदेश)
6. इसमें "उचित माध्यम सिद्धांत" का अनुसरण किया जाता है।

पदसोपान के प्रकार

फिफनर व शेरवुड के अनुसार:-
1. वेतन आधारित पदसोपान
2. कार्य आधारित पदसोपान
3. कौशल आधारित पदसोपान
4. रैंक आधारित पदसोपान

वेतन आधारित पदसोपान:-
इसमें पदसोपान का निर्धारण वेतन के आधार पर किया जाता है
सर्वाधिक वेतन वाला व्यक्ति पदसोपान में शीर्ष पर होता है।

कार्य आधारित पदसोपान:-
सर्वाधिक कार्य करने वाला व्यक्ति पदसोपान में शीर्ष पर होता है।

कौशल आधारित पदसोपान:-
सर्वाधिक कौशल वाला व्यक्ति शीर्ष पर होता है।

रैंक आधारित पदसोपान:-
पदसोपान का निर्धारण रैंक के आधार पर किया जाता है। जैसे- सेना

पदसोपान का महत्व

1. पदसोपान के द्वारा संगठन में उच्चस्थ अधीनस्थ संबंधों की पहचान होती है।
2. इसके द्वारा संगठन मे उत्तरदायित्वों और कार्यों का निर्धारण किया जाता है।
3. यह संगठन में प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करता है।
4. यह संगठन में विकेंद्रीकरण और प्रत्यायोजन को संभव बनाता है।
5. इससे संगठन में प्रशासनिक नेतृत्व का विकास होता है।
6. इससे उच्च अधिकारियों का कार्यभार कम होता है तथा अधीनस्थ अभिप्रेरित होते हैं।
7. यह संगठन में संचार का उचित माध्यम सुनिश्चित करता है।

पदसोपान की आलोचना

1. इससे कार्यों में अनावश्यक देरी होती है।
2. इससे संगठन में लालफीताशाही में वृद्धि होती है।
3. चूंकि पदसोपान व्यवस्था में अधीनस्थों को सदैव उच्च अधिकारियों से आदेश प्राप्त होते हैं, जिससे अधीनस्थों का मनोबल और अभिप्रेरणा में गिरावट होती है।
4. इससे संगठन में कठोरता व रूढ़िवादिता का विकास होता है।
5. पदसोपान व्यवस्था में संगठन की सफलता या असफलता संगठन  के मुखिया पर निर्भर करती है।
6. पीटर व रेमंड ने Peter principle (1969) नामक पुस्तक में पीटर सिद्धांत द्वारा पदसोपान की आलोचना की।

विभिन्न समाधान

1. पदसोपान के स्तरो की संख्या कम रखी जाए।
2. पदसोपान व्यवस्था में लचीलापन।
3. संगठन में सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम प्रयोग।
4. फेयाॅल ने गैंगप्लेंक सिद्धांत के माध्यम से पदसोपान से उत्पन्न दोषों का समाधान किया।

फेयाॅल के अनुसार इसमें दो शर्तें हैं -
• अधिकारी या कर्मचारी संपर्क स्थापित करने से पहले इसकी सूचना अपने निकटतम उच्च अधिकारियों को देंगे।
• इनके मध्य सूचनाओं-आंकड़ों के आदान-प्रदान की जानकारी भी वे अपने निकटतम उच्चाधिकारी को देंगे।

फेयाॅल के अनुसार गैंगप्लेंक सिद्धांत निजी क्षेत्र हेतु अधिक प्रासंगिक है।

मैट्रिक्स संगठन भी इसका एक तार्किक समाधान है।
मैट्रिक संगठन सर्वप्रथम स्टेनले डेविस और पाॅल लोरेन्स द्वारा मैट्रिक्स नामक पुस्तक में 1977 ई में प्रस्तुत किया गया।
लोक प्रशासन में इसको "क्रिस आर्गिरिस" ने लोकप्रिय बनाया।

मैट्रिक्स संगठनों की विशेषताएं:-

1. मैट्रिक्स संगठनों में कर्मचारियों के पास समान अधिकार व समान शक्तियां होती है।
2. मैट्रिक्स संगठनों में उच्चस्थ अधीनस्थ संबंध नहीं पाए जाते है।
3. इसमें सभी कर्मचारियों को सूचना समान प्रकार से साझा की जाती है।
4. मैट्रिक्स संगठन स्थाई व अस्थाई दोनों प्रकार के हो सकते हैं।

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