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अध्याय - 8 कॉर्पोरेट गवर्नेंस

Lok prashasan, DevEduNotes


कॉर्पोरेट गवर्नेंस

कॉर्पोरेट गवर्नेंस कॉर्पोरेट क्षेत्र में पारदर्शिता, निष्पक्षता, जवाबदेहिता व उत्तरदायित्व का समर्थक है।

कॉर्पोरेट गवर्नेंस उन सिद्धांतों, मूल्यों व आदर्शों का योग है, जो किसी कॉर्पोरेट को नैतिक व्यवहार हेतु प्रेरित करते हैं ताकि लाभार्जन की प्रक्रिया में शेयरधारकों और पणधारको के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

 इस अवधारणा का सर्वप्रथम उल्लेख ऑगस्टस बर्ले और सी मींस ने द मॉडर्न कॉर्पोरेशन एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी (1932 ईस्वी) में किया ।

 इस अवधारणा को लोकप्रिय 1992 में इंग्लैंड में कैडबरी समिति द्वारा बनाया गया।

                                                                      कंपनी
 नियामकीय ढांचा
 पणधारक
   शेयरधारक
    कर्मचारी
   बोर्ड ऑफ डायरेक्टर
    आपूर्तिकर्ता
  सीईओ
     ऋण प्रदाता
  प्रबंधन
      समुदाय


भारत में कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर बनाई गई विभिन्न समितियां:-

1. ओंकार गोस्वामी समिति (1995)
2. कुमार मंगलम बिरला समिति (1999)
3. नरेश चन्द्र समिति (2002)
4. नारायण मूर्ति समिति (2003)
5. उदय कोटक समिति (2017)

विश्व की कुछ प्रसिद्ध समितियां:-
1. कैडबरी समिति (इंग्लैंड, 1992)
2.  रिब्बन समिति (यूएसए )
3. किंग्स कमेटी (दक्षिण अफ्रीका)
4. विएनोट कमेटी (फ्रांस)

कॉर्पोरेट गवर्नेंस की आवश्यकता के कारण:-

1. शेयरधारकों व पणधारकों के अधिकारों की रक्षा हेतु
2. वैश्विक आर्थिक सुधारों का प्रभाव
3. सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभाव को
4.  कॉर्पोरेट  क्षेत्र में नैतिक मूल्यों व आदर्शों को विकसित  करने हेतु
5. कॉर्पोरेट क्षेत्र में घोटालों दुराचरणों को रोकने हेतु
6.  ऋण प्रदाताओं का दबाव (पारदर्शी बैलेंस शीट)।

 कॉरपोरेट गवर्नेंस की विशेषताएं:-

1. यह अवधारणा शेयरधारकों व पणधारकों  के अधिकारों की रक्षा का समर्थक है।
2. यह कॉर्पोरेट क्षेत्र में नैतिक मूल्यों व सिद्धांतों पर बल देता है।
3. कॉरपोरेट गवर्नेंस कॉरपोरेट क्षेत्र में आचार संहिता का समर्थक है।
4.  इसके माध्यम से कॉर्पोरेट  क्षेत्र के सामाजिक व पर्यावरणीय उत्तरदायित्व सुनिश्चित किए गए।
5. यह कॉर्पोरेट क्षेत्र के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए भी प्रासंगिक अवधारणा है।
6. यह कॉर्पोरेट क्षेत्र में उत्तरदायित्व, जवाबदेहिता और पारदर्शिता का समर्थक है।

कॉरपोरेट गवर्नेंस का महत्व:-

1. इसके माध्यम से शेयरधारकों व पणधारकों के अधिकारों की रक्षा की जा सकती है।
2. इससे कॉर्पोरेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेहिता,उत्तरदायित्व व निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।
3. इसे कॉर्पोरेट / कम्पनी में होने वाले घोटालों और दुराचरणों में कमी आती है।
4. इससे कंपनी/ कॉरपोरेट की विश्वसनीयता में वृद्धि होती है।
5. इससे कंपनी की निवेश व लाभ में वृद्धि होती है।
6. इससे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा/ पूंजी  के प्रवाह में वृद्धि होती है।
7. यह कॉर्पोरेट क्षेत्र में नैतिक मूल्यों के विकास में सहायक है।
8. इससे प्रबंधन व कर्मचारियों के मध्य समन्वय में वृद्धि होती है।

कॉरपोरेट गवर्नेंस के सिद्धांत:-

1. शेयरधारकों के अधिकारों का सिद्धांत -
कॉर्पोरेट  कंपनी  में शेयरधारकों के तीन अधिकार होने चाहिए:-
A. निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी
B. सूचना का अधिकार
C. लाभ

2. शेयरधारकों के साथ समान व्यवहार का सिद्धांत (लाभ वितरण में)

3. पणधारको के अधिकारों का सिद्धांत:-
          A. निर्णय में भागीदारी
          B. वैधानिक अधिकार की उपलब्धता।

4. निदेशक मंडल के उत्तरदायित्व का सिद्धांत:-
 निदेशक मंडल को शेयरधारकों के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए क्योंकि कंपनी में वे शेयरधारकों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

5. पारदर्शिता / प्रकटीकरण का सिद्धांत:-
       A. विभिन्न नियुक्तियों में पारदर्शिता ( निदेशक मंडल, सीईओ, प्रबंधन, समिति)
       B. लाभ वितरण में पारदर्शिता
       C. अंकेक्षण में (बैलेंस शीट)

6. सहचरित्रता का सिद्धांत:- कंपनी में नैतिकता, निष्पक्षता, सत्यनिष्ठा, ईमानदारी आदि विकसित करने के लिए आचार संहिता का निर्माण किया जाना चाहिए।

भारत में कॉर्पोरेट गवर्नेंस को विकसित करने के लिए किए गए प्रयास:-

 विभिन्न समितियों का गठन -
A. ओंकार गोस्वामी समिति 1995
B. कुमार मंगलम बिड़ला समिति 1999,
C. नरेश चंद्र समिति 2002
D. नारायणमूर्ति समिति 2003
E. उदय कोटक समिति जून 2017

2. ICAI (Institute of charted accountant of India ) - भारत में कॉर्पोरेट क्षेत्र हेतु लेखांकन के मानक तैयार करता है।

3. ICSI (Institute of company secretaries of India ) - कॉर्पोरेट में होने वाली बैठकों के मानक तैयार करता है।

4. NFCG (National foundation for corporate governance ) - इसका गठन ICAI और ICSI के संयुक्त प्रयास से किया गया।
कार्पोरेट मामलों का मंत्री इसका अध्यक्ष होता है।
एनएफसीजी कॉर्पोरेट क्षेत्र में जागरूकता संबंधी कार्य करता है।

5. कम्पनी एक्ट  (2013) - इसमें CSR act का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से कॉर्पोरेट  क्षेत्र के सामाजिक  उत्तरदायित्व निश्चित किए गए।

6.  SEBI - यह निवेशकों/ शेयरधारकों के अधिकारों की रक्षा करता है।

7. कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय का गठन।

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