आपका स्वागत है, डार्क मोड में पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें अपडेट के लिए टेलीग्राम चैनल DevEduNotes से जुड़ेें

कृषि विधेयक 2020

कृषि विधेयक 2020

भारतीय कृषि की समस्याएं

लचर कृषि ऋण व्यवस्था - अधिकतर कृषि ऋण अनौपचारिक स्त्रोतों से लिए जाते हैं जो कि बहुत महंगे पड़ते है।
कम रकबे की मार - 86% किसानों के पास 2 हेक्टेयर से भी कम खेती है। जिससे किसान पर्याप्त निवेश नहीं कर पाते है।
तकनीकी का अभाव - खेती की तैयारी, बुवाई, सिंचाई, फसल कटाई, भंडारण में आधुनिक तकनीकी का पर्याप्त प्रयोग नहीं।
मार्केटिंग का अभाव
भारतीय कृषि की प्रमुख समस्या उचित विपणन (Marketing) का अभाव है।
• गांवों में आपूर्ति ज्यादा एवं मांग कम होने के कारण वस्तुएं सस्ती मिलती हैं जबकि शहरों में आपूर्ति कम एवं मांग ज्यादा होने के कारण वस्तुएं महंगी मिलती हैं।
• एक साथ आपूर्ति करने के कारण किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। अतः किसानों के लिए आवश्यक है कि वे अपनी उपज का भंडारण करें और एक नियमित अंतराल पर बाजार में आपूर्ति करें। (परंतु आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 भंडारण से रोकता है)

नोट - चीन का उत्पादन भारत की तुलना में 3 गुना है।
- भारत में प्रतिवर्ष 14 बिलियन डॉलर मूल्य के भोजन की बर्बादी हो जाती है।
- भारत के पास अपनी आवश्यकता से 2.7 गुना अधिक अनाज का बफर स्टॉक है।

कृषि सुधार 2020

चर्चा में क्यों ?

हाल ही 3 जून 2020 को केंद्र सरकार ने कृषि उत्पादन व व्यापार में व्यापक परिवर्तन करने के लिए दो अध्यादेश जारी करने के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम - 1955 में संशोधन किया है।
1. कृषि उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सहायता) अध्यादेश - मंडी एवं व्यापार से संबंधित।
The Farmers Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Ordinance 2020.
2. किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवा अध्यादेश - अनुबंध खेती से संबंधित।
Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Farm Services Ordinance 2020.

आवश्यक वस्तु अधिनियम - 1955

भारत में खाद्य पदार्थों की जमाखोरी को रोकने के लिए यह अधिनियम बनाया गया।
इससे सरकार आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, वितरण एवं आपूर्ति को  नियंत्रित कर सकती है। जिससे उचित मूल्य पर सभी लोगों को समान रूप से आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया जा सकता है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम - 1955 की मूल जड़ें भारतीय रक्षा कानून-1943 में है। जब भारत में अकाल और द्वितीय विश्व युद्ध के कारण अनाज की समस्या थी।
गौरतलब है कि 1960 के दशक के मध्य तक लगातार सूखे से प्रभावित भारत को अमेरिका से गेहूं के आयात पर निर्भर रहना पड़ा और देश को शिप टू माउथ अर्थव्यवस्था के रूप में चिन्हित किया गया।
यह अधिनियम आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तर्कहीन वृद्धि के खिलाफ सुरक्षा देता है।

आर्थिक समीक्षा 2019-20 में आलोचना की गई -

•  वर्तमान में भारत अपनी आवश्यकता से अधिक खाद्यान्न उत्पादित करता है। अतः वर्तमान में यह अधिनियम अप्रासंगिक है।
चावल और गेहूं उत्पादन में चीन के बाद भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है।
फल और सब्जियों के उत्पादन में भी भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है।

• भंडारण अनुमति नहीं देने के कारण यह अधिनियम बड़ी भंडार अवसंरचना बनाने में अवरोधक है। (Storage Infrastructure)
जिसके कारण कृषि उत्पादों की मूल्य श्रंखला विकसित नहीं हो पाती है। (Value Chain)

• उत्पादों के लिए राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होने में बाधक है।

• खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास में बाधक है। (फूड प्रोसेसिंग इंडस्टरीज)

संशोधन
✍️ आवश्यक वस्तु अधिनियम - 1955 की सूची से खाद्यान्न, तिलहन व दलहन के साथ-2 प्याज और आलू जैसी प्रमुख फसलों को बाहर कर दिया गया है। अब यह अधिनियम इन सभी चीजों पर असामान्य परिस्थितियों में ही लागू होगा। जैसे - प्राकृतिक आपदा, राष्ट्रीय संकट, युद्ध या किसी ऐसे समय जब किसी उत्पाद की आपूर्ति 10 से 15% तक गिर जाए अर्थात कीमतें बढ़ जाएं।

संशोधन के लाभ
• भारत का कृषि निर्यात बढ़ेगा।
• आपूर्ति श्रंखला में निजी निवेश बढ़ेगा।
• खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ-2 उनमें निजी निवेश बढ़ेगा।
• कृषि के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपए के फंड की घोषणा की है।

कृषि उत्पाद बाजार समिति

APMC = Agriculture Produce Market Committee.
इसके अंतर्गत किसानों को अपनी उपज एक स्थानीय मंडी में बेचनी होती है।

एपीएमसी में समस्याएं
• किसानों को उपज का उचित दाम नहीं मिल पाता है, क्योंकि उन्हें मॉडल एपीएमसी अधिनियम - 2003 के तहत एक स्थानीय मंडी में बड़ी संख्या में वस्तुओं को बेचना पड़ता है।
• किसान से ज्यादा लाभ बिचौलियों को होता है।
ये अक्सर कीमतों में हेरफेर करते हैं और अपनी सेवाओं के लिए खरीदार और विक्रेता दोनों से कमीशन वसूलते हैं।
मंडी शुल्क बिक्री के मूल्य पर 0.5% से 5% तक है, जबकि राज्यों और वस्तुओं में अलग-अलग है।
• मंडियों में सबसे कम कीमत फसल उत्पादन के 3-4 महीनों के बाद तक होती है जबकि सबसे अधिक कीमत उत्पादन से पूर्व होती है।
• एक देश एक कृषि बाजार के लिए बाधक है।

1. कृषि उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सहायता) अध्यादेश 2020 - मंडी एवं व्यापार से संबंधित।
The Farmers Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Ordinance 2020.
• इस अध्यादेश में किसानों के लिए अपनी फसल स्थानीय मंडी में बेचने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। जिससे किसान अपनी उपज को कहीं भी बेचने के लिए स्वतंत्र होंगे।
• उनके ऊपर राज्यों के मंडी कानून लागू नहीं होंगे। उन्हें अंतर-राज्य और अन्य राज्यों के साथ व्यापार करने की अनुमति मिल जाएगी अर्थात एक राज्य से दूसरे राज्य में भी  व्यापार कर सकेंगे। (Barrier free inter-state and intra-state trade)
• इलेक्ट्रॉनिक तरीके (ई-नाम) के माध्यम से फसलों को बेचा जा सकेगा।
• इसमें किसानों के लिए एक अलग विवाद समाधान तंत्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।

अध्यादेश के लाभ
• किसानों के पास अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।
• किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर निर्भरता कम होगी।
• अधिशेष उत्पादन वाले क्षेत्रों के किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा। साथ ही कमी वाले क्षेत्रों में ग्राहकों को सस्ती दरों पर वस्तुएं उपलब्ध होगी।
• एक देश एक कृषि बाजार की अवधारणा को बढ़ावा मिलेगा।

2. किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवा अध्यादेश - अनुबंध खेती से संबंधित।
Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Farm Services Ordinance 2020.
• यह अध्यादेश अनुबंध खेती को स्वीकृति प्रदान करता है।
• किसान एवं प्रायोजक/कंपनी के बीच दो प्रकार के अनुबंध की व्यवस्था की गई है।
पहला -  व्यापार एवं वाणिज्य करार के तहत कृषि उत्पाद का स्वामित्व किसान के पास रहेगा। कंपनी किसान को पूर्व निर्धारित मूल्यों का भुगतान करेगी।
दूसरा - उत्पादन करार के तहत फसल उत्पादन में निवेश कंपनी करेगी तथा जोखिम एवं स्वामित्व भी उसका ही होगा। वह किसान को उसकी सेवाओं के बदले में पूर्व निर्धारित भुगतान करेगी।

अध्यादेश के लाभ
• यह किसानों को प्रोसेसर, थोक विक्रेताओं, एग्रीगेटर्स, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों आदि के साथ जुड़ने के लिए सशक्त बनाता है।
बाजार में बिचौलियों की भूमिका सीमित करता है।
• किसान अपनी भूमि किसी को भी पट्टे पर देने या किसी और कंपनी के साथ अनुबंध खेती करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
• यह भी किसानों को एक प्रभावी विवाद समाधान तंत्र प्रदान करता है। इसमें ऐसे तंत्र शामिल है, जो किसान से बाजार अनिश्चितता के जोखिम को प्रायोजक को हस्तांतरित करेंगे।

अध्यादेश की सार्थकता (Significance)
• कृषि में आधुनिक तकनीकी का प्रयोग बढ़ेगा।
• विपणन (Marketing) की लागत में कमी आएगी और किसानों की आय बढ़ेगी।
• यह वैश्विक बाजारों में भारतीय कृषि उत्पादों की आपूर्ति के लिए आपूर्ति श्रंखला के निर्माण के लिए निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने में मदद करेगा।

नोट - ये प्रस्ताव 20 लाख करोड रुपए के आर्थिक पैकेज के हिस्से है।

अन्य संबंधित तथ्य

• संविदा कृषि / अनुबंध खेती / कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग समवर्ती सूची का विषय है।
• कृषि मंडी राज्य सूची का विषय है।
अशोक दलवई समिति ने अनुबंध खेती, राष्ट्रीय बाजार और आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन की सिफारिश की थी।

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न

1. भारतीय कृषि में मुख्य समस्या उत्पादन की बजाय विपणन है। कृषि विपणन में नए सुधारों के साथ चर्चा करें ?
In Indian agriculture major problem is marketing rather than production. discuss with new reforms in agri marketing.

2. भारत ने 1947 में आजादी प्राप्त की परंतु भारतीय कृषि ने आज आजादी प्राप्त की है, भारतीय कृषि मंत्री के इस कथन की व्याख्या कीजिए।
India got freedom In 1947 but Indian agriculture got freedom today - agriculture minister. Elaborate this statement.

कृषि

राष्ट्रीय आय में कृषि का योगदान 16.5% है।
70% ग्रामीण आबादी कृषि पर निर्भर है।
चावल और गेहूं उत्पादन में चीन के बाद भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है।
फल और सब्जियों के उत्पादन में भी भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है।
भारत काजू का सबसे बड़ा निर्यातक है।
भारत मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है।
भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक है।
विश्व में सबसे अधिक मवेशी भारत में पाए जाते है।
मछली उत्पादन में भारत का विश्व में तीसरा स्थान है।
भारतीय ट्रैक्टर उद्योग विश्व का सबसे बड़ा उद्योग है। यह कुल वैश्विक उत्पादन का एक-तिहाई है।

बजट 2020-21 में कृषि के लिए प्रावधान

1.60 लाख करोड रुपए कृषि, सिंचाई व अन्य गतिविधियों के लिए आवंटित किए गए हैं।

किसान रेल योजना
इसके तहत रेलवे की ओर से रेफ्रिजरेटेड कंटेनर वाली ट्रेनें चलाई जाएंगी, जिससे जल्दी खराब होने वाली खाद्य वस्तुओं (फल-सब्जी, दूध, मांस, मछली) को बाजारों तक ताजा स्थिति में पहुंचाया जा सकेगा।
यह ट्रेनें पीपीपी मॉडल पर आधारित होगी।
इस योजना से निर्बाध राष्ट्रीय कोल्ड सप्लाई चेन सुनिश्चित होगी तथा किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलेगा।

कृषि उड़ान योजना
विमानन मंत्रालय विमानों की सहायता से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रूटों पर रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों में फल-सब्जी, डेयरी, मांस, मछली उत्पादों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाएगा।
इससे पूर्वोत्तर और जनजातीय क्षेत्रों के जिलों को कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
देश के विभिन्न हिस्सों में आवश्यक खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

बागवानी क्षेत्र में विपणन (Marketing) और निर्यात को बेहतर बनाने के लिए एक उत्पाद एक जिला की नीति
इस योजना के तहत सभी तरह के पारंपरिक जैविक और नवोन्मेषी उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करके जैविक, प्राकृतिक और एकीकृत खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
जैविक उत्पादों के ऑनलाइन राष्ट्रीय बाजारों को मजबूत बनाया जाएगा।

NOTE:- 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के  उद्देश्य से सरकार जीरो बजट प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक, मशीनीकरण एवं कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को प्रोत्साहन दे रही है। साथ ही किसान संपदा योजना तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजनाएं भी शुरू की गई है।

इससे संबंधित Springboard Academy Jaipur का पूरा वीडियो देखें

Post a Comment

0 Comments