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अध्याय- 21 नीतिशास्त्र : तनाव प्रबंधन

नीतिशास्त्र, Ethics for UPSC



 तनाव प्रबंधन

मस्तिष्क पर उत्पन्न दबाव को तनाव कहा जाता है।

कुछ मात्रा में तनाव सामान्य जीवन जीने के लिए आवश्यक है। परंतु तनाव की अधिकता हानिकारक है।

वर्तमान में तनाव का स्तर बढ़ता जा रहा है जिसके मुख्य कारण है:-

1. अव्यवस्थित दिनचर्या
2. बढ़ती हुई महत्वाकांक्षा और धैर्य की कमी
3. भौतिकतावादी जीवन
4. आध्यात्मिक विकास की कमी
5. बढ़ता व्यक्तिवाद, इसमें व्यक्ति आत्म केंद्रित बन गया है और वह किसी भी प्रकार का त्याग नहीं करना चाहता है।
6. अंतर्वैयक्तिक संबंधों की कमी
7. संयुक्त परिवारों का विघटन
8. जीवन में बढ़ता हुआ तकनीक का प्रयोग
9.  मूल्य आधारित शिक्षा की कमी
10. गला काट प्रतिस्पर्धा
11. भावनात्मक बुद्धिमत्ता का अभाव
12. मानसिक विकार
13. निजी जीवन और कार्य के बीच संतुलन का अभाव

 तनाव का प्रबंधन:-

तनाव को तीन स्तर पर प्रबंधित किया जा सकता है-

(1) व्यक्तिगत स्तर पर:- विश्रांति की तकनीकों को अपनाया जाना चाहिए जैसे लंबी सांस लेना, ध्यान के माध्यम से विचारों को एकत्रित करना (एकाग्र करना), योग और प्राणायाम, शारीरिक व्यायाम, भावनात्मक बुद्धिमत्ता का विकास, नकारात्मक विचारों से दूर रहना और सकारात्मक विचारों को प्रोत्साहित करना, महत्वाकांक्षाओं को प्रबंधित करना।

(2) पेशेवर स्तर पर:-
A.स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना।
B. सहयोग का भाव
C. स्वस्थ कार्य संस्कृति
D.संसाधनों का प्रभावी और दक्ष प्रयोग
E.  समय प्रबंधन
F. निजी जीवन और कार्य के बीच संतुलन बनाए रखना
G. कार्य से समय-समय पर अवकाश लेना

(3) सामाजिक स्तर पर:-
A. परिवार के साथ अधिक समय बिताया जाना चाहिए।
B. मित्रों के साथ समय बिताना चाहिए।
C. नए मित्र बनाने चाहिए।
D. सामाजिक गतिविधियों में सक्रियता से भाग लेना चाहिए और समाज में सकारात्मक योगदान करना चाहिए।

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