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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की भूमिका



विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका

विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना 
7 अप्रैल 1948 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की स्थापना हुई। इसके 194 देश सदस्य है।
यह संयुक्त राष्ट्र संघ की सहयोगी शाखा के रूप में कार्य करता है। इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जेनेवा में है।
इसके वर्तमान महानिदेशक इथोपिया के डॉ. टेडरोस अधानोम गेब्रियेसस है।
प्रतिवर्ष 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस 2020 की थीम Support Nurses and Midwives है।
मुख्यालय के अलावा 150 देशों में इसके 150 कार्यालय भी हैं। साथ ही इसके 7 क्षेत्रीय मुख्यालय भी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की संरचना

इसकी त्रिस्तरीय संरचना है।
1. वर्ल्ड हेल्थ असेंबली - यह डब्ल्यूएचओ की सर्वोच्च निर्णायक संस्था है। डब्ल्यूएचओ के सभी 194 सदस्य देश  इसमें शामिल है।

2. एग्जीक्यूटिव बोर्ड - कार्यकारी बोर्ड
इसमें 34 सदस्य होते हैं जिनका कार्यकाल 3 वर्ष का होता है।
इनका चयन वर्ल्ड हेल्थ असेंबली द्वारा किया जाता है जो कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ होते हैं।

3. महानिदेशक Director General
यह डब्ल्यूएचओ के मुख्यालय का प्रमुख होता है जो कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर डब्ल्यूएचओ का प्रतिनिधित्व करता है। महानिदेशक का चुनाव वर्ल्ड हेल्थ असेंबली द्वारा किया जाता है।
डब्ल्यूएचओ के वर्तमान महानिदेशक इथोपिया के डॉ. टेडरोस अधानोम गेब्रियेसस है। जो कि इथोपिया के पूर्व स्वास्थ्य और विदेश मंत्री है। 1 जुलाई 2017 से डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक के पद पर कार्यरत है।
महानिदेशक का कार्यकाल 5 वर्ष होता है।

डब्ल्यूएचओ द्वारा वर्ल्ड हेल्थ रिपोर्ट जारी की जाती है जिसमें विश्व में स्वास्थ्य के क्षेत्र में चल रही गतिविधियों के बारे में जानकारी दी जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्य

1. लीडरशिप - जन स्वास्थ्य से संबंधित मामलों में नेतृत्व प्रदान करना।
2. स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनुसंधान करना और संबंधित जानकारियों/ज्ञान का प्रचार-प्रसार करना।
3. स्वास्थ्य संबंधी मानकों का निर्धारण करना और उनके क्रियान्वयन पर नजर रखना।
4. नैतिक एवं तथ्यों पर आधारित नीति निर्माण को सुनिश्चित करना। Ethical and Evidence based policy making.
5. सदस्य देशों को तकनीकी सपोर्ट उपलब्ध करवाना।
साथ ही संस्थाओं के निर्माण एवं उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए कार्य करना। Institution Building.
6. विश्व में चल रही स्वास्थ्य गतिविधियों का निरीक्षण करना और वर्तमान की परिस्थितियों का आकलन करना।
Monitoring health situation and assessing trends.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की आलोचनाएं

1. यह कोरोनावायरस को फैलने से रोकने में नाकाम रहा है। 2002-03 में सार्स (एक प्रकार का कोरोना वायरस) रोग फैला जिससे डब्ल्यूएचओ ने कोई सबक नहीं लिया।

2. China Factor - यह चीनी एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है। जापान के उप-प्रधानमंत्री ने इसे चाइनीस हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन कहा है।
चीन के आंकड़ों को इसने बिना जांच किए उसके कहे अनुसार ही मान लिया जबकि चीन हमेशा तथ्यों को छिपाता रहा है
चीन के कहे अनुसार इसने माना कि कोरोनावायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है अर्थात यह संक्रामक नहीं है।
14 जनवरी 2020 को टेडरोस अधानोम गेब्रियेसस ने ट्वीट किया कि इसका मानव से मानव में संक्रमण नहीं हो रहा है।
इस प्रकार डब्ल्यूएचओ सही सूचना देने में विफल रहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस को चीनी वायरस करार दिया है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेडरोस अधानोम गेब्रियेसस का झुकाव चीन की तरफ माना जाता है।

3. डब्ल्यूएचओ द्वारा ताइवान से आने वाली कोरोनावायरस से संबंधित सूचनाओं एवं चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया।

4. यूएसए द्वारा जारी Early travel restrictions की आलोचना डब्ल्यूएचओ द्वारा की गई।
यूरोप के लिए कोरोनावायरस को सबसे कम नुकसानदायक बताया गया जबकि हम देख सकते हैं कि यह सर्वाधिक नुकसानदायक यूरोप के लिए ही रहा है।

5. Underfunded - अभी भी इसके पास पर्याप्त फंडिंग का अभाव है।

6. इसके क्षेत्रीय मुख्यालय अपारदर्शी है।

7. डब्ल्यूएचओ पूर्व में भी संकटकाल में किसी ना किसी की
सहायता लेता रहा है। अर्थात इसने तकनीकी संगठन की बजाय राजनीतिक संगठन के रूप में कार्य किया है।
वर्तमान में भी है यूएसए और चीन की राजनीतिक बहस के बीच उलझा हुआ है।

हाल ही अप्रैल 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ संगठन को अमेरिका द्वारा दी जाने वाली सालाना फंडिंग को रोक दिया है। ट्रंप के अनुसार डब्ल्यूएचओ ने कोरोना को लेकर गलत प्रबंधन किया और चीन में इसके प्रसार को छुपाया।
गौरतलब है कि अमेरिका डब्ल्यूएचओ को सालाना 50 करोड़ डॉलर देता है।

वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका द्वारा डब्ल्यूएचओं की फंडिंग को रोकना सही निर्णय नहीं है क्योंकि अभी भी बहुत सारे ऐसे देश हैं जिनमें स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है और विश्व के सभी देशों में कोरोनावायरस महामारी से संबंधित सूचनाओं के प्रचार-प्रसार में डब्ल्यूएचओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
फिलहाल तो जरूरी है कि डब्ल्यूएचओं पर सही दिशा में कार्य करने के लिए दबाव बनाया जाए और इस महामारी से निपटने के बाद विश्व में डब्ल्यूएचओ और चीन के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देशों को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।

UPDATE May 2020

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने 2020-21 के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष का पदभार संभाल लिया है।
उन्होंने बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जापान के डॉक्टर हिरोकी नाकातानी का स्थान लिया है।

क्या है डब्ल्यूएचओ का कार्यकारी बोर्ड ?
विश्व स्वास्थ संगठन में दो प्रमुख बॉडी हैं।
पहली - वर्ल्ड हेल्थ असेंबली
दूसरी - एग्जीक्यूटिव बोर्ड (कार्यकारी बोर्ड)
कार्यकारी बोर्ड में 34 टेक्निकल सदस्य होते हैं। जिनका कार्यकाल 3 साल का होता है, लेकिन चेयरमैन का कार्यकाल 1 वर्ष ही होता है।

डॉ हर्षवर्धन 2021 तक चेयरमैन तथा 2023 तक सदस्य बने रहेंगे।

विश्व स्वास्थ संगठन ने वैश्विक महामारी की चुनौतियों से निपटने के लिए डब्ल्यूएचओ फाउंडेशन नामक एक संस्था के गठन की घोषणा की है।
यह फाउंडेशन वैश्विक स्तर पर लोगों के स्वास्थ्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए डब्ल्यूएचओ को फंड उपलब्ध कराएगा लेकिन वैधानिक तौर पर ये डब्ल्यूएचओ से लागू होगा।
इस फाउंडेशन के तहत महामारी से निपटने के लिए बड़े देशों के साथ-साथ आम लोगों से भी फंडिंग इकट्ठा की जाएगी।
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