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अध्याय- 19 नीतिशास्त्र : भारतीय प्रशासकीय तंत्र की समस्याएं

 नीतिशास्त्र, Ethics for UPSC



 भारतीय प्रशासकीय तंत्र की समस्याएं

(1) औपनिवेशिक स्वरूप:- भारतीय प्रशासनिक तंत्र का निर्माण अंग्रेजो के द्वारा किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य भारत के आर्थिक संसाधनों का दोहन करना तथा भारतीय समाज पर नियंत्रण स्थापित करना था। यह वेबर के नौकरशाही मॉडल पर आधारित है। इसी कारण जन कल्याणकारी उद्देश्य को प्राप्त करने में बाधक है। वेबर के नौकरशाही मॉडल को लोकतांत्रिक मॉडल से प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।

वेबर के नौकरशाही मॉडल और लोकतांत्रिक मॉडल में अंतर:- 

A. वेबर का नौकरशाही  मॉडल गोपनीयता पर आधारित और पदसोपान के सिद्धांत का समर्थक है।
    जबकि लोकतांत्रिक मॉडल पारदर्शिता का समर्थक है और टीम भावना के आधार पर कार्य करने का समर्थक है।
B. नौकरशाही मॉडल में जन सहभागिता का अभाव है जबकि लोकतांत्रिक मॉडल जन सहभागिता पर बल देता है।
C. नौकरशाही मॉडल सत्ता के केंद्रीकरण का समर्थक है। जबकि लोकतांत्रिक मॉडल विकेंद्रीकरण का समर्थक है।
D. वेबर का नौकरशाही मॉडल  कठोर नियम आधारित व्यवस्था है और उसमें बौद्धिक लब्धता (I.Q.) पर बल दिया जाता है।
          जबकि लोकतांत्रिक मॉडल जन कल्याण पर अधिक बल देता है। उसमें भावनात्मक लब्धता  (E.Q.) को ध्यान में रखा जाता है।

 वेबर का नौकरशाही मॉडल
 लोकतांत्रिक मॉडल
 गोपनीयता और पदसोपान के सिद्धांत का समर्थक
 पारदर्शिता और टीम भावना
 जन सहभागिता का अभाव
 जन सहभागिता पर बल देता है।
 सत्ता के केंद्रीकरण का समर्थक
 विकेंद्रीकरण का समर्थक 
 कठोर नियम और (I.Q.) पर बल
  जन कल्याण और (E.Q.) पर बल

(2) भ्रष्टाचार:- 

प्रशासन में भ्रष्टाचार के कारण -

A .सिविल सेवकों के पास  विवेकाधीन शक्तियां अधिक है।
B. प्रशासकीय नियम और प्रक्रियाएं अत्यधिक जटिल और अस्पष्ट है।
C. पारदर्शिता का अभाव
D. निजी जीवन की महत्वाकांक्षा सार्वजनिक जीवन के उत्तरदायित्वों पर हावी रहती है।
E. समाज में नैतिक मूल्यों की कमी है। भ्रष्टाचार की स्वीकार्यता बढ़ी है। सिविल सेवकों पर सामाजिक दबाव का अभाव है।
F. जनता में जागरूकता का अभाव
G. सिविल सेवकों, राजनेताओं और उद्योगपतियों के बीच एक गठजोड़ तैयार होता है। इसे क्रोनी कैपिटलिज्म कहा जाता है।
H. भ्रष्टाचार विरोधी कानून सशक्त नहीं है तथा इनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होता है।
I. भ्रष्टाचार  के विरुद्ध आवाज उठाने वालों के लिए संरक्षण का अभाव है।
J. ईमानदार अधिकारी को विशेष प्रोत्साहन नहीं दिया जाता है।
K. कम वेतन और अधिक उत्तरदायित्व
L. अर्थव्यवस्था का समाजवादी ढांचा
M. जन सहभागिता का अभाव
N. सत्ता का केंद्रीकरण
O. भाई भतीजावाद

(3) सिविल सेवकों का राजनीतिकरण:- वर्तमान में सिविल सेवक राजनीतिक रूप से तटस्थ नहीं है। पोस्टिंग, स्थानांतरण, विभागीय कार्यवाही से बचने के लिए राजनीतिज्ञों  की मदद ली जाती है। इस कारण उनका झुकाव   राजनीतिज्ञों की ओर होता है। सिविल सेवकों की स्वयं की भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा होती है।

(4) सिविल सेवकों में जातिवाद और सांप्रदायिकता:- सिविल सेवक जातीय और धार्मिक दबाव समूह के संपर्क में रहते हैं। जिनका लाभ/मदद पोस्टिंग, स्थानांतरण और विभागीय कार्यवाही से बचने के लिए लिया जाता है। इस कारण जातिवाद और सांप्रदायिकता सिविल सेवकों में बढ़ रही है।

(5) सिविल सेवकों का शीघ्र स्थानांतरण:- सिविल सेवकों का किसी भी पद पर निश्चित कार्यकाल नहीं होता है। इस कारण वे नवाचारों और सुधारों के प्रति सकारात्मक नहीं होते हैं। इसी कारण राजनीतिक दबाव भी महसूस करते हैं।

(6) अनुशंसा व्यवस्था:- सिविल सेवकों की पोस्टिंग में राजनीतिक अनुशंसा की आवश्यकता होती है, जिसके कारण व्यक्ति जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं कर पाता है।

(7) सिविल सेवकों में बढ़ता हुआ तनाव:- सिविल सेवकों को राजनीतिक दबाव सहन करना पड़ता है। कल्याणकारी राज्य में जनता की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही है। राज्य के पास संसाधनों की कमी है। मीडिया और सोशल मीडिया का हस्तक्षेप भी बढ़ रहा है। इस कारण सिविल सेवकों में तनाव का स्तर बढ़ रहा है।

 सिविल सेवकों के नैतिक स्तर को सुधारने के लिए किए जाने वाले उपाय:-

1. ऐसे अभ्यर्थियों का चयन किया जाना चाहिए जिनका नैतिक स्तर अत्यधिक  सशक्त है। इसी कारण नीतिशास्त्र को परीक्षा पाठ्यक्रम में जोड़ा गया है।
2. चयन प्रक्रिया पारदर्शी एवं दक्ष होनी चाहिए।
3. चयनकर्ताओं का नैतिक चरित्र सशक्त होना चाहिए।
4.  चयन के बाद समय-समय पर नैतिक मूल्य और प्रशासनिक नियमों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
5. आचार संहिता और नैतिक संहिता को लागू किया जाना चाहिए।
6. ईमानदार सिविल सेवकों को पदोन्नति में वरीयता दी जानी चाहिए।
7. प्रशासनिक कार्यों और प्रक्रिया में पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए इसके लिए ई-गवर्नेंस का प्रयोग किया जाना चाहिए।
8. वेतन संबंधी असंगतियों  को दूर किया जाना चाहिए।
9. भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए।
10. सरकारी कार्यालयों में सिटीजन चार्टर को लागू किया जाना चाहिए।
11. प्रशासन में राजनीतिक हस्तक्षेप को कम किया जाना चाहिए
12. समाज में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए उसके लिए मूल्य आधारित शिक्षा पर बल दिया जाना चाहिए।
13. जवाबदेहिता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

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