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कैसे होता है अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव




अमेरिका के राष्ट्रपति की चुनाव प्रक्रिया

यूएसए में भी सरकार के तीन प्रमुख अंग है -

(1) कार्यपालिका    (2) विधायिका       (3) न्यायपालिका
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        राष्ट्रपति।                 कॉंग्रेस               सुप्रीम कोर्ट
       
अमेरिका में राष्ट्रपति सरकार व राज्य (देश) दोनों का मुखिया होता है और सेनाध्यक्ष भी होता है।

अमेरिकी संसद को कांग्रेस कहा जाता है इसके दो सदन है:-

(1) हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव:- यह निम्न सदन है और इसमें 435 सदस्य होते हैं जिनका कार्यकाल 2 वर्ष का होता है।

(2) सीनेट:- यह उच्च सदन है जिसमें 100 सदस्य हैं। प्रत्येक राज्य से 2 सदस्यों का चुनाव किया जाता है (50राज्य)। यह स्थायी सदन है जिसमें सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है। इसमें प्रत्येक 2 वर्ष में एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

राष्ट्रपति उम्मीदवार की योग्यताएं:-
(1)उम्र 35 वर्ष
(2) अमेरिका का जन्मजात नागरिक हो
(3) 14 वर्ष से अमेरिका में ही रह रहा हो।

अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 वर्ष होता है।

कोई भी व्यक्ति दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति नहीं बन सकता (यह प्रावधान 1951 के बाद से अस्तित्व में आया।)

यूएसए में दो प्रमुख राजनीतिक दल है:-

1. रिपब्लिकन पार्टी:- यह संरक्षणवादी विचारधारा के हैं। इनका प्रतीक हाथी  है जो सामान्यतः लाल रंग में प्रदर्शित किया जाता है।

2.डेमोक्रेटिक पार्टी:- यह उदारवादी विचारधारा के हैं इनका प्रतीक गधा है जो लाल-नीले रंग में प्रदर्शित किया जाता है।

अन्य छोटे राजनीतिक दल:- टी पार्टी, ग्रीन पार्टी आदि।

  अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष चुनाव है और यह एक लंबी प्रक्रिया है।

इस चुनाव प्रक्रिया के दो भाग है:-
     (1) राजनीतिक दल द्वारा राष्ट्रपति के उम्मीदवार का चयन
     (2) राष्ट्रपति का चुनाव

 चरण 1:- 

राजनीतिक दल द्वारा राष्ट्रपति उम्मीदवार का चयन:-

 इसके लिए दलों द्वारा विशेष प्रकार का चुनाव करवाए जाते हैं-
A. Primary :- यह एक विशेष प्रकार की औपचारिक चुनाव प्रक्रिया है जिसमें राजनीतिक दल के रजिस्टर्ड सदस्य अपने पंसदीदा उम्मीदवार को गुप्त रूप से मतदान द्वारा चयनित करते हैं। ( बैलेट पेपर द्वारा मतदान किया जाता है।)

B. Caucus ( कॉकस):- यह राजनीतिक दल के सदस्यों की अनौपचारिक बैठक होती है जिसमें सदस्यों से उनके राष्ट्रपति उम्मीदवार हेतु प्राथमिकता पूछी जाती है। यह प्रक्रिया मौखिक रूप से होती है इसमें बैलेट पेपर द्वारा मतदान नहीं करवाया जाता। (इस दौरान विभिन्न उम्मीदवारों के समर्थक एक-दूसरे को अपने उम्मीदवार के समर्थन हेतु मनाने का प्रयास भी करते हैं।)

वास्तव में इन primary और caucus के दौरान दल के सदस्य प्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति उम्मीदवार का नहीं बल्कि Delegates  का चुनाव करते हैं। यह Delegate दल का कोई वीआईपी सदस्य या स्थानीय नेता होता है। यह राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए अपनी पसंद को सदस्यों के सामने प्रकट करके रखता है।
प्रत्येक राज्य में ये प्रक्रिया अलग-अलग होती है कोई भी राज्य इन दोनों में से एक प्रक्रिया को अपना सकता है।
इन दोनों में से कौन सी प्रक्रिया द्वारा राष्ट्रपति उम्मीदवार का चयन होगा इसका निर्धारण राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।

प्रमुख कॉकस:- आईहोवा राज्य का।
प्रमुख प्राइमरी:- न्यू हैंपशायर राज्य का।

Super Tuesday :- मंगलवार का वह दिन जब बहुत सारे राज्य एक साथ प्राइमरी व कॉकस आयोजित करते हैं।

कॉकस व प्राइमरी द्वारा राष्ट्रपति उम्मीदवार की अनौपचारिक  घोषणा होती है।
राष्ट्रपति उम्मीदवार की औपचारिक घोषणा के लिए नेशनल कन्वेंशन आयोजित किया जाता है। इसमें सभी दलों के कॉकस व प्राइमरी से चयनित Delegates अपने उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति उम्मीदवार की औपचारिक घोषणा होती है।

चरण 2:- 

राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारों की घोषणा के बाद मुख्य चुनाव अभियान शुरू होता है।
इस दौरान उम्मीदवार विभिन्न राज्यों में रैली व प्रचार करते हैं।
इस दौरान उम्मीदवारों का वाद-विवाद भी होता है ( टेलीविजन डिबेट) जिसमें वे अपने मुद्दों व नीतियों के बारे में वाद-विवाद  करते हैं।

चुनाव का दिन :- अमेरिका में चुनाव नवंबर के दूसरे मंगलवार को होता है । (Tuesday After first Monday)
इस दिन भी जनता प्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार व्यक्ति को मत नहीं देती बल्कि वह Electoral college के प्रतिनिधि को मत देती है।

Electoral college :- यह राष्ट्रपति का चयन करने के लिए कुछ electors  (चयनकर्ता) का समूह होता है।
           प्रत्येक राज्य को electors की कुछ सीटें प्रदान की गई है। मतदान के दिन मतदाता इन्हीं electors को मत देते हैं। (यह चयनकर्ता अपने समर्थित उम्मीदवार  की घोषणा करके जनता के समक्ष रखते हैं)
प्रत्येक राज्य में जनसंख्या के अनुपात में चयनकर्ताओं को सीटें प्रदान की गई।
जैसे - कैलिफोर्निया 55  सीट (अमेरिका में सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य)

जनता द्वारा electors के चयन के बाद ये इलेक्टर राष्ट्रपति उम्मीदवार को अपना मत देते हैं। इनका मतदान दिसंबर में होता है।

राष्ट्रपति उम्मीदवार को जीतने के लिए सामान्य बहुमत की आवश्यकता होती है। सामान्य बहुमत अर्थात 538 में से 270 मत -       

 सदन
 Elector
 हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव
 435
 सीनेट
 100
 वाशिंगटन डीसी
 3
 कुल
 538

 इस प्रकार सामान्य बहुमत प्राप्त उम्मीदवार यूएसए का राष्ट्रपति होगा।

यदि किसी भी उम्मीदवार को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में मतदान के आधार पर राष्ट्रपति का चयन होगा।
इसके बाद भी यदि किसी उम्मीदवार का चयन नहीं हो पाता है तो सीनेट में मतदान द्वारा चयन किया जाएगा।

राष्ट्रपति पद के लिए मतगणना जनवरी में होती है ।

अमेरिकी राष्ट्रपति 20 जनवरी को शपथ लेता है, इसे इनॉग्रेशन डे कहा जाता है।

Swing state:-  अमेरिका में सामान्यत: प्रत्येक राज्य की राजनीतिक विचारधारा स्पष्ट होती है। किंतु वे राज्य जिनकी राजनीतिक विचारधारा स्पष्ट नहीं होती है और प्रत्येक चुनाव में अलग-2 राजनीतिक दल को मत देते हैं उन्हें Swing state कहा जाता है।
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार इन राज्यों पर अधिक ध्यान देते हैं। चुनाव में जीत की दृष्टि से ये राज्य अधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

Winner takes all:- जिस राज्य में जो दल विजेता होता है वह अन्य दल के इलेक्टर्स का भी समर्थन प्राप्त कर लेता है। जैसे एक राज्य के 10 इलेक्टर में से 6 रिपब्लिकन और 4 डेमोक्रेटिक के चयनित होते हैं परंतु इस अवधारणा के अनुसार अन्य चार डेमोक्रेट्स भी रिपब्लिकन की तरफ से ही मत देंगे।

इस वर्ष चुनाव में डेमोक्रेट्स की तरफ से जॉ बायडन और रिपब्लिकन की तरफ से डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार घोषित किया गया है।

जॉय बायडन, बराक ओबामा के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति रह चुके हैं। इस वर्ष चुनाव में इनके पक्ष को अधिक मजबूत माना जा रहा है। परंतु इनकी आयु अधिक होने के कारण इनके मस्तिष्क की क्षमता पर कई लोगों द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही इन पर यौन शोषण के आरोप भी लगे हुए हैं। इनके पुत्र पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और उनके दल में फंड और तकनीकी प्रचार की कमी है।

अमेरिका में सामान्यतः दूसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार व्यक्ति की जीत स्पष्ट मानी जाती है। परंतु कोरोनावायरस के कारण डोनाल्ड ट्रंप की जीत को लेकर आशंका है। साथ ही अमेरिकी मीडिया के डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ होने के कारण डोनाल्ड ट्रंप के लिए चुनाव में मुश्किलें सामने आ सकती है।

कोरोना महामारी के कारण मेल के जरिए मतदान करवाने की मांग की जा रही है।
महामारी के कारण मतदान प्रतिशत गिर सकता है ।

भारतीय परिप्रेक्ष्य:- भारत के परिप्रेक्ष्य से यह दोनों उम्मीदवार ही अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। दोनों उम्मीदवारों का ही नजरिया भारत के प्रति सकारात्मक है।

नोट -  अगस्त 2020 में रिपब्लिकन पार्टी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए 3 नवंबर को होने वाले चुनाव के लिए एक बार फिर अपना उम्मीदवार नामित किया है।
उपराष्ट्रपति माइक पेंस को भी एक बार फिर उपराष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार घोषित किया गया है।

• डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार जो बाइडेन को तथा उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार कमला हैरिस को  बनाया है।

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