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राजस्थान में राजनैतिक जनजागरण



राजस्थान में राजनैतिक जनजागरण

इस भाग में हम राजस्थान में राजनैतिक जन जागरण के कारणों एवं विभिन्न संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में पढ़ेंगे।
 

 संगठन
 स्थापना 
 स्थान
1.
 राजपूताना मध्य भारत सभा
 1918
 दिल्ली
2.
 राजस्थान सेवा संघ
 1919 
 वर्धा (महाराष्ट्र)
3.
 अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद
 1927
 बॉम्बे (महाराष्ट्र)


1. राजपूताना मध्य भारत सभा

1918 में कांग्रेस के दिल्ली अधिवेशन में राजस्थान एवं मध्य प्रदेश (तत्कालीन राजपूताना एवं मध्य भारत) के कार्यकर्ताओं द्वारा चांदनी चौक में स्थित मारवाड़ी पुस्तकालय में राजपूताना मध्य भारत सभा की स्थापना की गई।
इसे रियासती जनता का प्रथम राजनीतिक संगठन माना जाता है।
स्थापनाकर्ता - जमनालाल बजाज (अध्यक्ष), गणेश शंकर विद्यार्थी (उपाध्यक्ष), विजय सिंह पथिक, चांदकरण शारदा, नरसिंह देव सरस्वती
मुख्यालय - कानपुर
उल्लेखनीय है कि गणेश शंकर विद्यार्थी कानपुर से प्रताप नामक साप्ताहिक समाचार पत्र निकालते थे। (1913 से)

कालांतर में राजपूताना मध्य भारत सभा का मुख्यालय अजमेर स्थानांतरित कर दिया गया।

 अधिवेशन
 समय
 स्थान
  अध्यक्ष 
 प्रथम
 1918
 दिल्ली
 गिरधर शर्मा 
 दूसरा
 1919
 अमृतसर

 तीसरा
 मार्च 1920
 अजमेर
 जमनालाल बजाज
 चौथा
  दिसंबर 1920
 नागपुर
 गणेश नारायण सोमानी


चौथे अधिवेशन के लिए NC केलकर को अध्यक्ष चुना गया परंतु केलकर के द्वारा भाग नहीं लिए जाने के कारण गणेश नारायण सोमानी को चुना गया।
कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन (1920 में ही) के दौरान राजपूताना मध्य भारत सभा द्वारा किसान प्रदर्शनी लगाई गई। परिणामस्वरूप कांग्रेस ने देशी राज्यों के आंदोलनों को समर्थन दिया एवं देशी राज्यों के लोगों को कांग्रेस में शामिल होने की छूट दी गई।
इसके बाद राजपूताना मध्य भारत सभा कांग्रेस की सहयोगी संस्था बन गई।

22 अक्टूबर 1920 से वर्धा से राजस्थान केसरी नामक समाचार पत्र निकाला गया। जिसके -
संपादक - विजय सिंह पथिक
उप संपादक - रामनारायण चौधरी
आर्थिक सहायता - जमनालाल बजाज
यह पूर्णतः राजस्थानी लोगों को समर्पित पहला समाचार पत्र था जिसका नाम केसरी सिंह बारहठ के नाम पर रखा गया।
कालांतर में जमनालाल बजाज एवं विजय सिंह पथिक के मध्य मतभेद होने के कारण इस समाचार पत्र को अजमेर सेेे प्रकाशित किया गया और कुछ समय बाद समाप्त कर दिया गया।

2. राजस्थान सेवा संघ -

1919 में वर्धा में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना की गई।
संस्थापक - विजय सिंह पथिक, रामनारायण चौधरी, हरिभाई किंकर, केसरी सिंह बारहठ, अर्जुन लाल सेठी

अक्टूबर 1920 में राजस्थान सेवा संघ का मुख्यालय अजमेर स्थानांतरित किया गया।
राजस्थान के किसान आंदोलनों में राजस्थान सेवा संघ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1927 में विजय सिंह और रामनारायण चौधरी के बीच आपसी मतभेदों के कारण राजस्थान सेवा संघ लगभग बंद हो गया।

राजस्थान सेवा संघ द्वारा प्रकाशित समाचार पत्र -

1922 में विजय सिंह पथिक द्वारा अजमेर से नवीन राजस्थान नामक समाचार पत्र निकाला गया।

नवीन राजस्थान के प्रारंभ में विजय सिंह पथिक की निम्नलिखित पंक्तियां लिखी रहती थी -
यश वैभव सुख की चाह नहीं,

परवाह नहीं जीवन रहे ना रहे

 इच्छा है तो यह है,

जग में स्वेच्छाचार दमन न रहे।।
बिजौलिया, बेंगू, सिरोही-भील आंदोलन के प्रचार-प्रसार में योगदान के कारण सरकार द्वारा नवीन राजस्थान पर रोक लगा दी गई।
अतः इस समाचार पत्र का नाम परिवर्तित करके तरुण राजस्थान कर दिया गया।
इस समाचार पत्र ने बूंदी, नींमूचणा किसान आंदोलनों में मुख्य भूमिका निभाई।
सिरोही में रावण राज्य नामक लेख लिखा गया।
मार्च 1924 में तरुण राजस्थान के संपादकों शोभाराम गुप्त और रामनारायण चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया।
शोभाराम गुप्त को 2 वर्ष के कारावास की सजा हुई।
1927 में जय नारायण व्यास ने इसे ब्यावर से प्रकाशित करना शुरू किया।

3. अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद

1922 में पूना में देशी राज्यों के लिए एक संगठन बनाने का विचार किया गया।
1926 में संगठन बनाने की प्रक्रिया को लेकर एक अस्थाई समिति का गठन किया गया। इस समिति की सिफारिशों पर 17/18 दिसंबर 1927 को बॉम्बे में अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद की स्थापना की गई।
अध्यक्ष - दीवान बहादुर रामचंद्र राव
उपाध्यक्ष - विजय सिंह पथिक
राजपूताना और मध्य भारत का सचिव - रामनारायण चौधरी
सदस्य - जयनारायण व्यास, कन्हैयालाल कलंत्री (जोधपुर)
रामदेव पोद्दार, बालकिशन पोद्दार (बीकानेर)
नयनूराम शर्मा (हाडौती), शंकर लाल शर्मा (अजमेर)
त्रिलोक चंद माथुर (करौली),..........

1928 में अजमेर में राजपूताना देशी राज्य लोक परिषद की स्थापना की गई।
प्रथम अधिवेशन - 1931 अजमेर में - अध्यक्ष रामनारायण चौधरी।
इसी समय से राजस्थान में प्रजामंडल आंदोलनों की शुरुआत मानी जाती है।

1938 में सुभाष चंद्र बोस की अध्यक्षता में हरिपुरा अधिवेशन में कांग्रेस ने प्रजामंडल आंदोलनों को अपना समर्थन प्रदान किया।

1939 में पंडित जवाहरलाल नेहरू अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद के अध्यक्ष बने। (1939-46 तक)

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