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अध्याय - 4 लोक प्रशासन की प्रकृति

Lok prashasan, DevEduNotes


लोक प्रशासन की प्रकृति

1. प्रबंधकीय व एकीकृत              2. विज्ञान व कला

1. लोक प्रशासन की प्रबंधकीय प्रकृति :- इसके अनुसार वे उच्च अधिकारी जो कि प्रशासन में POSDCoRB संबंधी कार्य करते हैं या महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं, इसकी प्रकृति के अंतर्गत शामिल होते हैं।
 समर्थक - साइमन
             स्मिथबर्ग

 लोक प्रशासन की एकीकृत प्रकृति:- इसके अनुसार लोक प्रशासन की प्रकृति में किसी प्रशासन में काम करने वाले प्रत्येक कर्मचारी को शामिल किया जाता है अर्थात् उच्च अधिकारी,  तकनीकी कर्मचारी, लिपिकीय वर्ग, सहायक कर्मचारी सभी लोक प्रशासन की प्रकृति में सम्मिलित होते हैं।

2.  लोक प्रशासन कला और विज्ञान के रूप में:-

A. लोक प्रशासन विज्ञान के रूप में:-
 समर्थक - विल्सन
              विलोबी
              मर्सन

लोक प्रशासन में विज्ञान की भांति सर्वमान्य सिद्धांत है। जैसे - पद सोपान, कार्य विभाजन, समन्वय, अभिप्रेरणा, मनोबल ।

लोक प्रशासन में विज्ञान की भांति  विभिन्न विधियों व पद्धतियों का प्रयोग किया जाता है। जैसे - CPM, PERT
CPM = Critical Part Method.
PERT = Programme Evaluation and Review Technology.

लोक प्रशासन में विज्ञान की भांति भविष्यवाणी की जा सकती है।

लोक प्रशासन भी विज्ञान की तरह मूल्य मुक्त अध्ययन है।

लोक प्रशासन में भी विज्ञान की बातें सर्वमान्य ग्रंथ है। जैसे - पॉलिटिक्स (अरस्तु), रिपब्लिक (प्लेटो), अर्थशास्त्र (कौटिल्य), आईने अकबरी (अबुल फजल)।

लोक प्रशासन के विद्वान डॉक्टर व इंजीनियर की भांति परामर्शदाता की भूमिका निभाते हैं।

रॉबर्ट डहल के अनुसार लोक प्रशासन के विज्ञान बनने में निम्न तीन समस्याएं  हैं। (साइंस ऑफ  पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन: 3 प्रॉब्लम, 1947 ईस्वी)
मूल्य
परिवेश
व्यवहार

 B. लोक प्रशासन कला के रूप में:-

 एक प्रशासक को कलाकार की भांति विशेष प्रतिभा की आवश्यकता होती है।

एक  कलाकार व प्रशासक की निर्भरता उनके व्यक्तित्व पर होती है।

दोनों में सृजनात्मक क्षमता होती है।

प्रशासक व कलाकार दोनों को प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।

एक कलाकार की भांति प्रशासक को भी  माध्यम की आवश्यकता होती है। जैसे एक चित्रकार के माध्यम केनवास, रंग और ब्रश है। उसी प्रकार से प्रशासक के माध्यम संगठन व संगठन की नीतियां है।

लोक प्रशासन भी कला की भांति देश काल के अनुसार परिवर्तित होता है।

लोक प्रशासन का विकास भी कला की तरह निरंतर हो रहा है।

लोक प्रशासन विशुद्ध रूप से ना तो विज्ञान है और ना ही कला है बल्कि सामाजिक विज्ञान का निरंतर विकसित होता एक विषय है ।

समर्थक :-  एम पी शर्मा
                टीड
                ग्लेडन

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