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भारत-यूएसए संबंध

India china relation, www.devedunotes.com



भारत-यूएसए संबंध

भारत व यूएसए के संबंधों को 3 कालखंडों में बांटा जा सकता है -

(A) 1947-1991 ई.   (B) 1991-2005 ई.  (C) 2005 से अब तक

(A) 1947-1991 ई. 

इस काल में भारत व यूएसए के संबंध अच्छे नहीं रहे।
प्रारंभ में यूएसए ने भारत को पूंजीवादी गुट में शामिल होने का आमंत्रण दिया, परंतु भारत ने गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाई।
1955 ईस्वी में पाकिस्तान यूएसए के गुट का सदस्य बना जिसके बाद यूएसए द्वारा भारत विरोधी नीति अपनाई गई ।
1965 व 1971 ई.के युद्ध में यूएसए ने पाकिस्तान का समर्थन किया।
भारत ने वियतनाम युद्ध में यूएसए के हस्तक्षेप की आलोचना की जिसके बाद भारत को मिलने वाली खाद्य सहायता पीएल- 480 को रोक दिया गया।
1974ई. में भारत ने परमाणु परीक्षण किए जिसका विरोध यूएसए ने किया और NSG की स्थापना की गई ।

(B) 1991-2005 ई.

इस साल में यूएसए द्वारा प्रारंभ में दबाव व कालान्तर में सहयोग नीति अपनाई गई।
1996 ईस्वी में भारत पर सीटीबीटी पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया गया परंतु भारत ने इसे भेदभाव पूर्ण संधि मानते हुए हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
11 मई व 13 मई 1998 ई.को भारत ने परमाणु परीक्षण (Operation Shakti) किए, जिसके बाद यूएसए के नेतृत्व में भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए गए।
वर्ष 2000 ई. में यूएसए के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भारत की यात्रा की तथा इस समय आर्थिक प्रतिबंधों को हटाया गया।
1999 ई. में कारगिल युद्ध समाप्त करने हेतु यूएसए द्वारा पाकिस्तान पर दबाव बनाया गया ।
2001 ईस्वी में यूएसए पर 9/11 आतंकवादी हमला हुआ जिसके बाद आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक युद्ध की घोषणा की गई जिसमें भारत ने यूएसए का समर्थन किया और दोनों देशों के मध्य आपसी संबंधों में सुधार हुआ।

(C) 2005 से अब तक

2005 ई.में भारत और यूएसए के मध्य असैन्य परमाणु समझौते की घोषणा हुई ।
2008 ईस्वी में यह समझौता लागू हुआ।

समझौते के प्रावधान -

1. भारत और यूएसए के मध्य नाभिकीय व्यापार किया जाएगा।
2. भारत को एनएसजी में एक खुली छूट दिलवाई जाएगी।
3. भारत अपने सैन्य और असैन्य परमाणु संयंत्रों को अलग-अलग करेगा ।
4. असैन्य परमाणु संयंत्रों में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा नियमों का पालन किया जाएगा तथा जांच अधिकारियों को जांच की अनुमति दी जाएगी।

आईएईए से संबंधित प्रावधानों को एडीशनल प्रोटोकोल कहा जाता है।
इस समझौते को 123 एग्रीमेंट भी कहा जाता है क्योंकि यूएस एटॉमिक एनर्जी एक्ट की धारा 123 को संशोधित किया गया तथा भारत को इसमें अपवाद स्वरूप स्वीकार किया गया।

यूएसए की दो कंपनियों ने भारत में निवेश करने की घोषणा की-
1. Westing house
2. GE- hitachi
परंतु अभी तक यह निवेश संभव नहीं हो सका है।

निवेश में बाधाएं -

2010 में भारतीय संसद ने CLND (civil liability for nuclear damage act) एक्ट पारित किया।
इसकी दो धाराओं का विरोध किया गया।

धारा 17 (B) -
इसके अनुसार यदि नाभिकीय हादसा खराब डिजाइन व घटिया सामग्री के कारण होता है तो जिम्मेदारी ऑपरेटर की ना होकर सप्लायर की होगी।

धारा 46
नाभिकीय हादसे का पीड़ित पक्ष सप्लायर के विरुद्ध भी मुकदमा दायर कर सकता है।

2015 ई. में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत की यात्रा की तथा इस विवाद को हल किया गया धारा 17 (B) को अनिवार्य  से ऐच्छिक बना दिया गया यानि यह दोनों की सहमति से ही लागू होगी।
धारा 46 के बारे में स्पष्टीकरण जारी किया गया कि यह धारा सप्लायर पर लागू नहीं होगी।
वर्तमान में वेस्टिंग हाउस का अधिग्रहण तोशिबा ने कर लिया है तथा GE-hitachi को भूमि अधिग्रहण में समस्या आ रही है।

भारत और यूएसए के  विवाद

1. बौद्धिक संपदा विवाद

यूएसए के अनुसार भारत में बौद्धिक संपदा के अधिकारों का सम्मान  नहीं किया जाता विशेषकर सॉफ्टवेयर, मूवी, दवाइयों के क्षेत्र में।

दवाइयों के क्षेत्र में मुख्य विवाद हुए हैं -

GLIVEC DISPUTE

यह कैंसर की दवा है जिसे Novarities नामक कंपनी द्वारा बनाया जाता है।
यह Evergreening  का विवाद है  यानि पेटेंट का बार-2 नवीनीकरण कराया जा रहा था परंतु भारत ने  नवीनीकरण के आवेदन को खारिज कर दिया।
इसके लिए इंडियन पेटेंट एक्ट 1970 की धारा 3(d) का प्रयोग किया गया ।
इस मामले में यूएसए व अन्य पश्चिमी देशों ने भारत की आलोचना की परंतु भारत के अनुसार धारा 3 (d) डब्ल्यूटीओ के ट्रिप्स समझौते का उल्लंघन नहीं करता है।

नेक्जावर विवाद

दवाई - केन्सर की
निर्माता- बेयर्स को-ऑपरेशन
विवाद- कम्प्लसरी लाईसेंस (NATCO of Hyderabad  को दिया गया)
इसके लिए इंडियन पेटेंट एक्ट 1970 की धारा 84 का प्रयोग किया गया।
भारत के अनुसार धारा 84 डब्ल्यूटीओ के ट्रिप्स समझौते का उल्लंघन नहीं करता है। यूएसए व अन्य पश्चिमी देशों ने भारत की आलोचना की।
यूएस चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा वैश्विक बौद्धिक संपदा अधिकार सूचकांक जारी किया जाता है जिसमें भारत को खराब रैंक दी जाती है।
2020 में 40 वी रैंक
2019 में 36 वी रैंक
2018 में 44 वी रैंक

2. सौर ऊर्जा विवाद

2010 में भारत में राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन का शुभारंभ किया गया जिसका प्रारंभिक लक्ष्य 20000 मेगावाट था जो वर्तमान में बढ़ाकर 100000 मेगावाट कर दिया गया है। (2022 तक)
घरेलू सौर ऊर्जा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इस मिशन में डीसीआर (डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट) का प्रावधान किया गया।
इसके अनुसार भारत सरकार ऐसी कंपनियों को प्रति मेगावाट एक करोड रुपए की सब्सिडी देगी जिन्होंने सोलर पैनल की खरीद भारत से की हो।
यूएसए ने इस प्रावधान को डब्ल्यूटीओ में चुनौती दी।
यूएसए के अनुसार यह प्रावधान डब्ल्यूटीओ के ट्रिप्स समझौते में किए गए राष्ट्रीय व्यवहार के सिद्धांत का उल्लंघन है।
इस मामले में फैसला यूएसए के पक्ष में आया।

3. H1-B वीजा विवाद

यह कुशल श्रमिकों को दिया जाने वाला अस्थाई कार्य वीजा है
इसकी अवधि 6 साल है ।
इसके तहत कुल 85000 वीजा दिए जाते हैं ( 65000 सामान्य श्रमिकों को तथा 20000 विद्यार्थियों को )
इस हेतु न्यूनतम आय  $60000 है।

जीवनसाथी को कार्य करने के लिए H-4 वीजा दिया जाता है।
यूएसए द्वारा इन वीजा नियमों को और कठोर किया जा रहा है। जैसे -
1. H-4 वीजा को समाप्त किया जा रहा है।
2. न्यूनतम आय बढ़ा कर $130000 की जा रही है ।
इस वीजा कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी भारत यह परिवर्तन भारतीय उद्योग को प्रभावित करेगा ।
3. अधिकतर वीजा छोटी कंपनियों को दिए जाएंगे।
4. किसी भी परिस्थिति में H1-B वीजा धारक किसी अमेरिकी श्रमिक को प्रतिस्थापित नहीं कर सकता है ।

4. CAATSA (countering American adversaries through trade sanctions act)

इस कानून के तहत यूएसए द्वारा उत्तरी कोरिया, ईरान व रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए गए हैं।
भारत पर दबाव बनाया जा रहा है कि इन देशों से उर्जा  व रक्षा व्यापार नहीं किया जाए ।

5. संरक्षण वादी नीतियां

यूएसए द्वारा आयातों को कम करने के लिए संरक्षणवादी नीतियां अपनाई जा रही है ।
यूएसए ने जीएसपी (Generalized system of preferences) के तहत मिलने वाली सुविधा को समाप्त करने का निर्णय किया है।
जीएसपी व्यवस्था 1976 में प्रारंभ की गई इसके तहत विकासशील देशों के उत्पादों को आयात में वरीयता दी जाती है।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभार्थी भारत था भारत के 1937 उत्पाद इससे लाभान्वित थे।
इस व्यवस्था की समाप्ति से भारत का 5.7 बिलियन डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा।
भारत पर दबाव बनाया जा रहा है कि यूएसए के उत्पादों पर आयात शुल्क को कम करें। जैसे - हार्ले डेविडसन का मामला।

6. निर्यात सब्सिडी विवाद

यूएसए ने भारत की छह निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को डब्ल्यूटीओ में चुनौती दी है ।
यूएसए के अनुसार निर्यात को बढ़ाने के लिए भारत द्वारा सब्सिडी का प्रावधान किया गया है जो कि डब्ल्यूटीओ के एग्रीमेंट ऑन सब्सिडीज एंड काउंटरवेलिंग ड्यूटी का उल्लंघन है ।
2015 में भारत को मिलने वाली छूट समाप्त हो गई इसलिए भारत को निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को बंद कर देना चाहिए ।
भारत की निर्यात प्रोत्साहन योजनाएं -
1. स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ)
2. मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS)
3. हार्डवेयर टेक्नोलॉजी पार्क स्कीम
4. एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स स्कीम (EPCGS)
5. एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट स्कीम (EOUS)
6. ड्यूटी फ्री इंपोर्ट फॉर एक्सपोर्ट स्कीम

भारत-यूएसए सहयोग के क्षेत्र

1. राजनीतिक एवं सामरिक सहयोग

राजनीतिक सहयोग के लिए सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व द्वारा समय-2 पर यात्रा की जाती है।
भारत व यूएसए  के संबंधों को वैश्विक सामरिक साझेदारी से परिभाषित किया जाता है।
मंत्रालय स्तर पर वार्ता के लिए 50 से अधिक वार्ता मंच स्थापित किए गए।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण टू प्लस टू वार्ता है।

टू प्लस टू वार्ता

इस वार्ता में दोनों देशों के विदेश व रक्षा मंत्री भाग लेते हैं।
पहली बार यह 6 सितंबर 2018 को आयोजित की गई थी।

परिणाम
1. दोनों देशों के मध्य कॉमकासा नामक समझौता किया गया।
COMCASA = Communication Compatibility And Security Agreement.
प्रावधान-
A. भारत यूएसए के सुरक्षित संचार चैनलों का प्रयोग कर सकता है।
B. भारत व यूएसए के रक्षा उपकरणों का प्रयोग एक-दूसरे के साथ किया जा सकता है।
C. भारत यूएसए की रक्षा उपकरणों का इष्टतम प्रयोग कर सकता है।

2. भारत और यूएसए के विदेश व रक्षा मंत्रालय के मध्य हॉटलाइन स्थापित की जाएगी जिससे दोनों देशों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।
3  भारतीय नौसेना व यूएसए की नौसेना की केंद्रीय कमांड के मध्य संचार स्थापित किया जाएगा ।
4. भारत के पूर्वी तट पर सेना की तीनों सेवाओं के मध्य युद्ध अभ्यास   आयोजित किया जाएगा ।
5. रक्षा उद्योगों के मध्य सहयोग के लिए industrial security annex नामक समझौते पर बातचीत शुरू हुई है।


भारत,  यूएसए, जापान और ऑस्ट्रेलिया के द्वारा क्वाड (QUAD) का निर्माण किया गया है, जिससे हिंद महासागर और प्रशांत महासागर में सहयोग स्थापित किया जाता है।
इस क्षेत्र में चीन के प्रभाव को कम करने का भी प्रयास किया जा रहा है।
यूएसए ने एशिया प्रशांत शब्द को हिंद प्रशांत शब्द  से प्रतिस्थापित किया है जो हिन्द महासागर में भारत के महत्व को प्रदर्शित करता है।

निर्यात नियंत्रण समूहों में भारत की सदस्यता का समर्थन यूएसए द्वारा किया जाता है।

निर्यात नियंत्रण समूह -

1. NSG (नाभिकीय आपूर्तिकर्ता समूह) -

स्थापना- 1974 ईस्वी में
सदस्य- 48
यह नाभिकीय  सामग्री तथा नाभिकीय तकनीक के निर्यात को नियंत्रित करता है।


2. MTCR (Missile Technology Control Regime)

स्थापना- 1987
सदस्य-35
जून 2016 में भारत इसका 35वां सदस्य बना ।
यह ऐसी मिसाइल तकनीकों के निर्यात को नियंत्रित करता है जिसकी परास 300 किलोमीटर से अधिक तथा युद्ध क्षमता 500 किलोग्राम से अधिक  है।

3. वासेनार एग्रीमेंट
स्थापना - 1996 में
सदस्य - 42
2017 में भारत का 42वां सदस्य बना

यह परंपरागत हथियारों तथा द्विउपयोगी  तकनीको के निर्यात को नियंत्रित करता है।

4. ऑस्ट्रेलिया ग्रुप
 स्थापना -1985
सदस्य -43
जनवरी 2018 में भारत इसका 43वां सदस्य बना

यह जैविक व रासायनिक हथियारों के निर्यात को नियंत्रित करता है।

2. रक्षा सहयोग

2005 में डिफेंस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट किया गया।
2015 में डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड ट्रेड इनीशिएटिव नामक समझौता किया गया।

वर्तमान में सर्वाधिक रक्षा आयात यूएसए से किए जा रहे हैं। जैसे- सी 130 जे हरक्यूलिस एयरक्राफ्ट, C-17 ग्लोबमास्टर, अपाचे, चिनूक, P-8i पोसिडेन
यूएसए की लॉकहीड मार्टिन नामक कंपनी ने घोषणा की है कि f-16 लड़ाकू विमानों का उत्पादन भारत में किया जाएगा
भारत व यूएसए के मध्य मालाबार नौसैनिक युद्धाभ्यास आयोजित किया जाता है, जिसमें 2007 में पहली बार जापान ने भाग लिया तथा 2015 से जापान लगातार इस में भाग ले रहा है।

भारत और यूएसए के मध्य रक्षा क्षेत्र में 4 मूलभूत समझौते किए गए -

1. General security of military information agreement (GSMIA)

2002 में समझौता संपन्न
सैन्य सूचनाओं की सुरक्षा हेतु समझौता

2. Logistics  exchange  memorandum of agreement (LEMOA)

2016 में संपन्न।
इसके माध्यम से दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का प्रयोग कर सकती है।  जैसे -  ईधन प्राप्त करने के लिए, मरम्मत के लिए, आपदा प्रबंधन, खोज व बचाव कार्यक्रम हेतु।

3. कॉमकासा - 2018 में टू प्लस टू वार्ता के दौरान।

4. बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA)
इस पर अभी वार्ता प्रारंभ नहीं हुई है।

यूएसए द्वारा भारत को मेजर डिफेंस पार्टनर तथा स्ट्रैटेजिक ट्रेड ऑथराइजेशन टाइप-1 का दर्जा दिया गया है इससे भारत यूएसए में उपलब्ध अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों का आयात कर सकता है।
भारत ऐसा देश है जो कि  यूएसए का सैन्य सहयोगी नहीं है फिर भी उसे यह दर्जा दिया गया है।

3. आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग

यूएसए ने आतंकवाद के विरुद्ध कार्यवाही करने हेतु पाकिस्तान पर दबाव बनाया पाकिस्तान को मिलने वाली वित्तीय सहायता को रोक दिया गया।
पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल करवाया गया।

FATF - Financial action task force
स्थापना -1989
सदस्य- 38
कार्य- आतंकवाद के वित्तीयन और धन शोधन के विरुद्ध कार्यवाही करना। (Money Laundring)

यूएसए की मदद से जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया गया।
हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाउद्दीन को यूएसए के द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया गया।

4. व्यापारिक संबंध

यूएसए भारत का सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी है।
भारत द्वारा सर्वाधिक निर्यात यूएसए में किया जाता है।
भारत और यूएसए के बीच सीधे निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए इंडिया यूएसए सीईओ फोरम का गठन किया गया है।
दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रियों के मध्य सहयोग हेतु ट्रेड पॉलिसी फॉर्म का गठन किया गया।
यूएसए द्वारा भारत में 3 स्मार्ट सिटी का विकास किया जाएगा - अजमेर, प्रयागराज, विशाखापट्टनम

5. अंतरिक्ष सहयोग

नासा व इसरो के बीच भी सहयोग स्थापित किया गया है।
निषार नामक परियोजना का विकास किया जा रहा है
NISAR - NASA ISRO SYNTHETIC APERTURE RADAR

मंगलयान के प्रक्षेपण के समय गहरे अंतरिक्ष में संचार हेतु नासा के द्वारा मदद की गई।
भारत  के द्वारा 104 उपग्रह एक साथ प्रक्षेपित किए गए जिस में से 97 यूएसए के थे।

विश्व राजनीति में यूएसए का वर्चस्व

विश्व राजनीति में यदि कोई देश इतना शक्तिशाली हो जाए  कि वह अन्य देशों  के राजनीतिक, आर्थिक व सांस्कृतिक क्षेत्रों पर प्रभुत्व स्थापित कर ले तब इस अवधारणा को वर्चस्व कहा जाता है।

1. सैन्य शक्ति के रूप में वर्चस्व

 शीत युद्ध की समाप्ति के बाद ही  यूएसए ने यह वर्चस्व स्थापित किया।

1990 में इराक ने कुवैत पर आक्रमण किया। यूएसए के नेतृत्व में इस युद्ध में हस्तक्षेप किया गया इससे पहला खाड़ी युद्ध शुरू हुआ।
यूएसए के नेतृत्व में ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म तथा ऑपरेशन डेजर्ट शील्ड चलाए गए।
इस युद्ध में यूएसए द्वारा अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया गया इसलिए इस युद्ध को कंप्यूटर वार की संज्ञा दी गई।
इसका प्रसारण पूरे विश्व में किया गया इसलिए इसे वीडियो गेम वार भी कहा जाता है।
1998 में कहानियां तंजानिया के दारुस्लाम व केन्या के नैरोबी में यूएसए के दूतावासों पर आतंकवादी हमले किए गए इसकी प्रतिक्रिया में Operation infinite reach  शुरू किया गया तथा सूडान व अफगानिस्तान पर हवाई हमले किए गए।

11 सितंबर 2001 में यूएसए पर आतंकवादी हमला हुआ।
कुल चार हमले किए गए जिसमें से दो वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर तथा एक यूएसए के रक्षा मुख्यालय पर किया गया।
एक हमला यूएसए की संसद पर किया जाना था लेकिन यह असफल रहा।
इस हमले में 3000 लोग मारे गए।
यह हमला अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के द्वारा करवाया गया ।
हमले के बाद ही यूएसए द्वारा ऑपरेशन इनड्यूरिंग  फ्रीडम शुरू किया गया और अफगानिस्तान पर हमला किया गया तथा तालिबान को सत्ता से हटा दिया गया।
2003 में ऑपरेशन इराकी फ्रीडम के तहत इराक पर हमला किया गया व सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटा दिया गया। इस युद्ध का घोषित उद्देश्य नरसंहार के हत्यारों को समाप्त करना था परंतु वास्तविक उद्देश्य इराक के तेल संसाधनों पर कब्जा करना था।

2. ढांचागत शक्ति के रूप में वर्चस्व

यूएसए विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
वैश्विक वित्तीय संस्थानों पर यूएसए का प्रभुत्व है। जैसे - विश्व बैंक, आईएमएफ आदि।

वैश्विक व्यापार में यूएसए का लगभग 15% हिस्सा है जिससे संरक्षणवादी व उदारवादी नीतियों को प्रभावित किया जाता है।

डब्ल्यूटीओ के निर्णय यूएसए की सहमति से ही लिए जाते हैं।
यूएसए की मुद्रा डॉलर का प्रयोग वैश्विक भुगतानो के लिए किया जाता है।
अन्य देशों की मुद्राएं डॉलर पर निर्भर है।
अकादमिक क्षेत्र को भी  यूएसए के द्वारा प्रभावित किया गया।
एमबीए की डिग्री को यूएसए ने मान्यता दिलाई। वैश्विक सूचनाओं पर भी यूएसए का प्रभुत्व है।

3. सांस्कृतिक शक्ति के रूप में वर्चस्व

विभिन्न प्रकार की विचारधारा यूएसए द्वारा प्रसारित की गई। जैसे - सफलता का सिद्धांत आधुनिकता की अवधारणा, लोकतांत्रिक शासन, मानवाधिकार आदि।
अन्य देशों के रहन-सहन खान-पान आदि को भी यूएसए के  द्वारा प्रभावित किया गया  जेसे   ब्लु जींस, कोका कोला आदि।
अंग्रेजी भाषा की श्रेष्ठता को यूएसए द्वारा स्थापित किया गया।
विचारधाराओं को फैलाने हेतु हॉलीवुड का प्रयोग किया गया ।

वर्चस्व की बाधाएं

1. यूएसए का संविधान शक्ति के पूर्ण पृथक्करण पर आधारित है। अतः कार्यपालिका कभी भी सर्व शक्तिशाली नहीं बन सकती।
2. यूएसए का समाज एक मुक्त समाज है जहां नागरिकों के पास अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। अतः वे यूएसए की सरकार पर दबाव बना सकते हैं।

3. यूएसए के नाटो सहयोगी
4. वर्तमान में विश्व बहु ध्रुवीयता की ओर अग्रसर हो रहा है, अन्य शक्तियां भी अस्तित्व में आ रही है।

भारत की प्रतिक्रिया

भारत में तीन प्रकार के मत प्रचलित हैं -
1. यूएसए के साथ सक्रिय संबंध नहीं बनाए जाने चाहिए क्योंकि यूएसए का वर्चस्व हमें नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है साम्यवादी इस विचार के समर्थक हैं।

2.यूएसए के साथ सक्रिय संबंध बनाए जाने चाहिए तथा वर्चस्व का लाभ भारत को लेना चाहिए़ पूंजीवादी विचारक इसके समर्थक हैं।

3. भारत को बहु ध्रुवीय विश्व के निर्माण हेतु कार्य करना चाहिए।

भारत की वर्तमान नीति अंतिम दो विकल्पों का मिश्रण है।

नोट - 18 दिसंबर 2019 को भारत-अमेरिका के बीच दूसरी टू प्लस टू वार्ता आयोजित की गई।

24-25 फरवरी 2020 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत की यात्रा पर आए। इस दौरान अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में नमस्ते ट्रंप नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
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