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अध्याय - 2 लोक प्रशासन का विकास

Lok prashasan, DevEduNotes



लोक प्रशासन का विकास

लोक प्रशासन के विकास को दो चरणों में बांटा जा सकता है:-
A. 1887 ई. से पूर्व
B. 1887 ई. के बाद

 A. 1887 ई. से पूर्व
 B. 1887 ई. के बाद
लोक प्रशासन के संबंध में प्रारंभिक रूप से निम्न ग्रंथों में लिखा गया -
1. कौटिल्य का अर्थशास्त्र
2. अबुल फजल का आईने अकबरी
3. अरस्तु का पॉलिटिक्स
4. प्लेटो का रिपब्लिक
5. हॉब्स का लेवियाथन

लोक प्रशासन शब्द की प्रथम व्याख्या हेमिल्टन के द्वारा
 "द फेडरेलिस्ट" नामक आर्टिकल में की गई।

लोक प्रशासन विषय पर प्रथम पुस्तक की रचना चार्ल्स ज्या ब्युनिन द्वारा  (प्रिंसिपल द एदमिनिस्ट्रेशन पब्लिक) 1812 में की गई।

लोक प्रशासन विषय का सर्वप्रथम अध्ययन प्रशा में हुआ। (लोक सेवकों के प्रशिक्षण के दौरान।)
1887 के बाद लोक प्रशासन का विकास छह चरणों में हुआ -
1. राजनीतिक प्रशासन द्विविभाजन (1887-1926)

2. सिद्धांतों का स्वर्ण काल (1927-1937)

3. चुनौतियों का काल (1938-1947)

4. पहचान का संकट (1948-1970)

5. अंत:अनुशासनात्मक अध्ययन पर बल या नव लोक प्रशासन का काल (1971-1990)

6. LPG व लोक प्रशासन या नव लोक प्रबंधन का काल (1991 से अब तक)

1. राजनीतिक प्रशासन द्विविभाजन (1887-1926)

लोक प्रशासन को राजनीति विज्ञान से अलग करने की सर्वप्रथम मांग वुडरो विल्सन द्वारा अपने लेख द स्टडी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (1887) में की गई ।
अतः वुडरो विल्सन को लोक प्रशासन का पिता कहा जाता है।

विल्सन के अनुसार संविधान को बनाने से ज्यादा उसे चलाना मुश्किल है।

वही गुडनाऊ ने 1900 में पॉलिटिक्स एंड एडमिनिस्ट्रेशन नामक पुस्तक में वुडरो विल्सन के राजनीतिक प्रशासन द्विविभाजन का समर्थन किया।
गुडनाऊ को अमेरिका में लोक प्रशासन का पिता कहा जाता है।

गुडनाऊ के अनुसार राजनीति राज्य इच्छा का निर्माण करती है वहीं प्रशासन राज्य इच्छा का क्रियान्वयन करता है।
उल्लेखनीय है कि गुडनाऊ कोलंबिया विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के व्याख्याता थे।

एल डी व्हाइट  ने 1926 में इंट्रोडक्शन टू द स्टडी ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन नामक पुस्तक की रचना की। इस पुस्तक को लोक प्रशासन की प्रथम पाठ्यपुस्तक कहा जाता है।
उल्लेखनीय है कि एल डी व्हाइट अमेरिकी लोक सेवा आयोग के 1934 से 1938 तक अध्यक्ष रहे।

2. सिद्धांतों का स्वर्णकाल (1927-1947)

इस चरण में लोक प्रशासन की विभिन्न पुस्तकों की रचना हुई तथा इन पुस्तकों में प्रशासन के विभिन्न सिद्धांतों के बारे में लिखा गया।

 पुस्तक
 लेखक
 सिद्धांत
 इंडस्ट्रियल एंड जनरल मैनेजमेंट
 फेयॉल
 14
 क्रिएटिव एक्सपीरियंस
 मेरी पार्कर फोलेट

 द प्रिंसिपल ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन
 विलोबी 

 ऑनवर्ड इंडस्ट्री
 मुने व रेले
  4
 पेपर ऑन द साइंस ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन
 गुलिक उरविक
 10 & 8


इस प्रकार इस चरण में कुल 36 सिद्धांत दिए गए।

इस चरण की निम्नलिखित विशेषताएं थी -
A. इस चरण में लोक प्रशासन की प्रारंभिक विषय वस्तु का विकास हुआ।
B. इससे जुड़े हुए चिंतकों के अनुसार लोक प्रशासन व निजी प्रशासन समान अवधारणा है।
C. ये चिंतक लोक प्रशासन को विज्ञान बनाना चाहते थे।

नोट - इस चरण के चिंतकों को शास्त्रीय चिंतक कहा जाता है।

3. चुनौतियों का काल (1938- 1947)

1938 ईस्वी में चेस्टर बर्नार्ड ने अपनी पुस्तक द फंक्शन ऑफ एग्जीक्यूटिव में लोक प्रशासन के किसी भी सिद्धांत को शामिल नहीं किया। इससे शास्त्रीर विचारकों को निराशा हुई।

1946 ईस्वी में हर्बर्ट साइमन ने अपनी पुस्तक एडमिनिस्ट्रेटिव बिहेवियर में लोक प्रशासन के सिद्धांतों को मुहावरे और कहावतें बताया।

रॉबर्ट डहल ने भी लोक प्रशासन के विज्ञान बनने में 3 बाधाओं (मूल्य, परिवेश, व्यवहार) का उल्लेख किया।
डहल ने इन बातों का उल्लेख अपनी पुस्तक साइंस ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन: थ्री प्रॉब्लम में किया है।

4. पहचान का संकट (1948-1970) 

इस चरण में लोक प्रशासन के समक्ष पहचान का संकट उत्पन्न हुआ।

जॉन गॉस ने अपनी पुस्तक द ट्रेंडस इन द थ्योरी ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में लोक प्रशासन को राजनीति विज्ञान की एक शाखा बताया तथा मार्टिन ने इसका समर्थन किया।

अब लोक प्रशासन के कुछ विद्वान पुनः राजनीति विज्ञान की ओर मुड़ गए परंतु कुछ चिंतक अभी भी लोक प्रशासन के साथ जुड़े हुए थे। इन्होंने लोक प्रशासन में नई अवधारणाओं का विकास किया।
जैसे:-
           तुलनात्मक लोक प्रशासन (1952)
           विकास प्रशासन(1955)
           नव लोक प्रशासन(1968)
           जन चयन विचारधारा (1970)

5. अंतःअनुशासनात्मक अध्ययन पर बल या नव लोक प्रशासन का काल (1971 - 1990)

इस चरण में लोक प्रशासन के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए लोक प्रशासन ने सामाजिक विज्ञान के अन्य विषयों के साथ संपर्क स्थापित किया। जैसे - राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान आदि।

इस चरण में लोक प्रशासन के विभिन्न सिद्धांतों का विरोध किया गया।
जैसे- राजनीतिक प्रशासन द्विविभाजन, पद सोपान, केंद्रीकरण।

निम्नलिखित सिद्धांतों का समर्थन किया गया -
     पदसोपान में लचीलापन
     विकेंद्रीकरण

6. LPG व लोक प्रशासन या नव लोक प्रबंधन का काल (1990 से अब तक)

इस चरण की निम्नलिखित विशेषताएं थी :-
A. लोक प्रशासन नियंत्रणकर्ता के स्थान पर सहजकर्ता, प्रोत्साहनकर्ता, वितरणकर्ता बन गया।
 B. विनौकरशाहीकरण पर बल
C. लोक प्रशासन में 3E पर बल दिया गया। (इकोनामी, इफेक्टिवनेस, एफिशिएंसी )
D. प्रशासनिक सुधार व नवाचार (भारत के संदर्भ में आरटीआई , सिटीजन चार्टर)
E. विकेंद्रीकरण का समर्थन
F. राज्य का न्यूनतमीकरण

निकोलस हेनरी के अनुसार लोक प्रशासन का विकास

निकोलस हेनरी ने अपनी पुस्तक पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड पब्लिक अफेयर्स में लोक प्रशासन के विकास के छह चरण बताएं :-
1. राजनीतिक प्रशासन द्विविभाजन  (1900-1926)
2. प्रशासन के सिद्धांत (1927 - 1937)
3. सिद्धांतों को चुनौतियां व प्रतिक्रियाएं (1938 - 1950)
4. लोक प्रशासन राजनीति विज्ञान की तरह (1950 - 1970)
5. लोक प्रशासन प्रबंध की भांति (1950 - 1956)
6. लोक प्रशासन लोक प्रशासन की भांति (1971 से अब तक)

भारत में लोक प्रशासन का विकास

1937 ईस्वी में लोक प्रशासन विषय की शुरुआत मद्रास विश्वविद्यालय में हुई। (लोक प्रशासन में डिप्लोमा प्रोग्राम की शुरुआत)

ऐसे ही डिप्लोमा प्रोग्राम की शुरुआत 1941 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय (प्रो. बेनी प्रसाद के प्रयासों से ),1945 ईस्वी में लखनऊ विश्वविद्यालय में, 1949 में नागपुर विश्वविद्यालय में हुई।

लोक प्रशासन विषय के प्रथम स्वतंत्र विभाग की स्थापना 1950 में नागपुर विवि में हुई। इस विभाग की स्थापना प्रोफेसर एम पी शर्मा के  प्रयास से हुई )
एम पी शर्मा को भारत में लोक प्रशासन का पिता कहा जाता है।
उल्लेखनीय है कि एम पी शर्मा को लोक प्रशासन का पहला प्रोफेसर भी माना जाता है।

ऐसे ही स्वतंत्र विभागों की स्थापना 1959 में लखनऊ विवि तथा 1921 में पंजाब विवि व उस्मानिया विवि (हैदराबाद) में हुई ।

भारत में एपलबी आयोग (1953) की सिफारिश पर 1954 में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) की स्थापना की गई। यह लोक प्रशासन विषय में शोध व अनुसंधान संबंधी कार्य करता है।
इसके द्वारा  इंडियन जनरल ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (IJPA) का प्रकाशन किया जाता है।

एपलबी कमीशन की सिफारिश पर ही 1955 में इंडियन स्कूल ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की स्थापना की गई। यह लोक प्रशासन  में डिप्लोमा प्रदान करता था।

भारत में लोक प्रशासन के चार मठ लखनऊ, चंडीगढ़, जयपुरहैदराबाद को माना जाता है।

एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज, हैदराबाद (1957) , लाल बहादुर शास्त्री एकेडमी, मंसूरी (1972) लोक प्रशासन विषय में शोध व विकास कार्यों में संलग्न है।

1987 ईस्वी में संघ लोक सेवा आयोग ने लोक प्रशासन विषय को भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में वैकल्पिक विषय के रूप में सम्मिलित किया।

 राजस्थान में लोक प्रशासन का विकास

 राजस्थान में प्रोफेसर एम वी माथुर के प्रयासों से राजस्थान विवि में लोक प्रशासन के प्रथम स्वतंत्र विभाग की स्थापना 1956 में हुई।
प्रोफेसर एम वी माथुर को राजस्थान में लोक प्रशासन का पिता कहा जाता है।

वर्तमान में गंगासिंह विवि बीकानेर, जयनारायण व्यास विवि जोधपुर, मोहनलाल सुखाड़िया विवि, उदयपुर, कोटा विवि व राजस्थान विवि में लोक प्रशासन के स्वतंत्र विभागों की स्थापना हो चुकी है।

 1995 ईस्वी में लोक प्रशासन को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा सीनियर सेकेंडरी के  पाठ्यक्रम में  एक विषय के रूप में शामिल किया गया।

Quick Revision

 विद्वान
 लेख / पुस्तक
 कौटिल्य
 अर्थशास्त्र
 अबुल फजल
 आईने अकबरी
 अरस्तु 
 पॉलिटिक्स
 प्लेटो
 रिपब्लिक
 हॉब्स
 लेवियाथन
 हेमिल्टन
 द फेडरेलिस्ट
 चार्ल्स ज्या ब्युनिन
 प्रिंसिपल द एदमिनिस्ट्रेशन पब्लिक
 वुडरो विल्सन
 द स्टडी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (1887)
  गुडनाऊ
 पॉलिटिक्स एंड एडमिनिस्ट्रेशन नामक पुस्तक (1900)
 एल डी व्हाइट
 इंट्रोडक्शन टू द स्टडी ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (1926)
 फेयॉल
 इंडस्ट्रियल एंड जनरल मैनेजमेंट
 मेरी पार्कर फोलेट
 क्रिएटिव एक्सपीरियंस
 विलोबी
 द प्रिंसिपल ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन
 मुने व रेले
 ऑनवर्ड इंडस्ट्री
 गुलिक  उरविक
 पेपर ऑन द साइंस ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन
 चेस्टर बर्नार्ड
 द फंक्शन ऑफ एग्जीक्यूटिव
 हर्बर्ट साइमन
 एडमिनिस्ट्रेटिव बिहेवियर
 रॉबर्ट डहल
 साइंस ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन: थ्री प्रॉब्लम
 जॉन गॉस
 द थ्योरी ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन
 निकोलस हेनरी
 पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड पब्लिक अफेयर्स



  विद्वान
 पिता
 वुडरो विल्सन
 लोक प्रशासन का पिता
 गुडनाऊ
 अमेरिका में लोक प्रशासन का पिता
 एम पी शर्मा
 भारत में लोक प्रशासन का पिता
 एम वी माथुर
 राजस्थान में लोक प्रशासन का पिता

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