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अध्याय- 8 नीतिशास्त्र : ताओवाद

नीतिशास्त्र, Ethics for UPSC


नीतिशास्त्र में ताओवाद

लाओत्से तुंग एक चीनी विचारक था।

पुस्तक - ताओ ते चिंग

इसके अनुसार प्रकृति का मूल तत्व है ताओ है जिसका अर्थ है - the way (मार्ग या तरीका)

व्यक्ति को प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्वक जीवन जीना चाहिए। जिस प्रकार पानी बहता है उसी प्रकार जीवन भी जिया जा सकता है।

 इसने जीवन जीने के लिए कुछ महत्वपूर्ण शिक्षाएं दी जैसे:-

(1) "अंतरावलोकन से व्यक्ति सब कुछ प्राप्त कर सकता है" अर्थात सामान्य जीवन में व्यक्ति बाहरी विश्व से सुख ,संतोष ,प्रतिष्ठा आदि प्राप्त करने की कोशिशें करता है। परंतु वास्तविक रुप से इन्हें प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को अपने अंदर झांकना चाहिए।

(2) "अनासक्ति से व्यक्ति स्वतंत्र बनता है" अर्थात् जिस प्रकार पानी सदैव बहता है। नई वस्तुएं तथा स्थान पानी के जीवन में आते हैं। उसी प्रकार व्यक्ति के जीवन में भी नहीं वस्तुएं और व्यक्ति आते रहते हैं उसे किसी के प्रति आसक्त नहीं होना चाहिए। आसक्ति ही दुखों का कारण है।

(3) "यदि आप स्वयं को जानना चाहते हैं तो अपने पर लगे लेबल हटा देने चाहिए।" व्यक्ति की बाहरी विश्व द्वारा बहुत ही पहचान बनाई जाती है। जिसके कारण वह अपने वास्तविक स्वरूप से दूर होता जाता है। अतः वास्तविक स्वरूप को समझने के लिए इन पहचानो को दूर किया जाना चाहिए।

(4) "रहस्यों का आनंद लो"  जीवन रहस्यमय है। इसी कारण कई बार व्यक्ति भविष्य के प्रति आशंकित रहता है। परंतु उसे रहस्यों का आनंद लेना चाहिए क्योंकि इसी कारण जीवन रूचिपूर्ण और रोमांचक बना हुआ है।

(5) "किसी को भी नियंत्रित करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।" प्रत्येक व्यक्ति का जीवन स्वतंत्र है। इसलिए बाहरी नियंत्रण नहीं थोपे जाने चाहिए । जिस व्यक्ति को जितना नियंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा वह व्यक्ति उतना ही अनियंत्रित होता जाएगा। जिस समाज में कानूनों की संख्या अधिक होती है वहां अनैतिकता का स्तर अधिक होता है।

(6) "विनम्रता और करुणा" दूसरों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण होना चाहिए। इसलिए जीवन में सकारात्मक योगदान किए जाने चाहिए तथा अपने द्वारा किए गए सकारात्मक कार्यों का श्रेय भी नहीं लेना चाहिए।

(7) "व्यक्ति को अपने आप को स्वीकार करना चाहिए।" व्यक्ति के वास्तविक स्वरूप में कुछ क्षमताएं होती है और कुछ कमियां भी होती है। इस वास्तविक स्वरूप को कमियों के साथ स्वीकार करना चाहिए। व्यक्ति को स्वयं के साथ समय बिताना चाहिए जिसमें व उद्देश्य विहीन होकर जीवन जिए।

(8) परिवर्तन को रोका नहीं जा सकता इसलिए परिवर्तनों को स्वीकार किया जाना चाहिए।

SAVE WATER          

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