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राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग

Rajasthan state human rights commission.



राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग

Rajasthan State Human Rights Commission.

NHRC = National Human Rights Commission.
SHRC= State Human Rights Commission.

मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम - 1993  के तहत 1993 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्थापना की गई।
यह एक सांविधिक निकाय है
इसके वर्तमान अध्यक्ष जस्टिस एच एल दत्तू है। (2020 में)

मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम -1993 की धारा 21 के तहत राजस्थान में मानव अधिकारों की रक्षा हेतु  जनवरी 1999 में राज्य मानव अधिकार आयोग की स्थापना गई।
मार्च 2000 से इस आयोग ने विधिवत रूप से कार्य करना शुरू किया ।

सदस्य:-
इसमें एक अध्यक्ष व 2 सदस्य होते हैं।
अध्यक्ष उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायधीश होता  है।
प्रथम अध्यक्ष कांता भटनागर  है।

हाल ही जनवरी 2021 में राज्यपाल कलराज मिश्र ने राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जी के व्यास को राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष और महेश गोयल को सदस्य नियुक्त किया है। दोनों ने 25 जनवरी को पदभार संभाला।
अध्यक्ष का पद वर्ष 2019 से रिक्त था।
अध्यक्ष:- जी के व्यास
सदस्य:- महेश गोयल, एम सी शर्मा


नियुक्ति:-
राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष एवं गृहमंत्री की समिति द्वारा की जाती है।

नोट:- द्विसदनात्मक शासन व्यवस्था वाले राज्यों में विधान परिषद का सभापति व नेता प्रतिपक्ष भी नियुक्ति समिति में शामिल होते हैं

 पदावधि:- 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु जो भी पहले हो ।
 पुनः नियुक्ति की जा सकती है।

NOTE- नियुक्ति राज्यपाल के हस्ताक्षर द्वारा होती है।

हटाने की प्रक्रिया:-
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश में बनी समिति की सिफारिश के आधार पर राष्ट्रपति हटाता है।

हटाने के आधार
(1) दिवालिया या मानसिक स्थिति विकृत होने पर
(2) अपराधी साबित होने पर
(3) अन्य किसी लाभकारी पद पर पाए जाने पर

वार्षिक प्रतिवेदन
आयोग अपनी वार्षिक रिपोर्ट राज्य सरकार को देता है जिस पर विधानसभा में चर्चा की जाती है
(राजस्थान में चर्चा नहीं हो पाती है)


राज्य मानव अधिकार आयोग के कार्य

(1) किसी भी आयोग /संस्था /लोक सेवक के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में स्वप्रेरणा या किसी  की शिकायत पर जांच कर सकता है।
(2) राज्य की जेलों और बाल उपचार केंद्रों में निरीक्षण कर सकता है।
(3) न्यायालय के निर्देश पर मानवाधिकार उल्लंघन संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई करना।
(4)मानवाधिकारों को लेकर अनुसंधान एवं विकासात्मक कार्य करना । इस संदर्भ में यह मानवाधिकार संदेश नामक एक त्रैमासिक मैगजीन जारी करता है।
(5)मानवाधिकारों को लेकर जागरूकता में वृद्धि हेतु विभिन्न सम्मेलनों एवं सेमिनारों का आयोजन करता है।
(6) मानवाधिकारों से संबंधित विभिन्न संगठनों एवं गैर सरकारी संगठनों को प्रोत्साहित(promote) करता है।


राज्य मानवाधिकार आयोग की शक्तियां

सिविल प्रक्रिया संहिता -1908 के तहत SHRC को निम्न शक्तियां प्राप्त है।
(1) किसी भी लोकसेवक /संस्थान को समन जारी कर सकता है।
(2) जांच में आवश्यकता पड़ने पर किसी भी संस्थान /लोकसेवक से दस्तावेज मंगवा सकता है।
(3) किसी भी लोक सेवक से शपथ पत्र मंगवा सकता है (गवाही को लेकर)
(4) राज्य सरकार को क्षतिपूर्ति को लेकर सलाह दे सकता है।

राज्य मानवाधिकार आयोग जांच कैसे करता है ?
शिकायत प्राप्त होने पर राज्य मानवाधिकार आयोग राज्य सरकार अथवा किसी अन्य संस्था/ आयोग को निर्धारित समय -सीमा में उचित कार्यवाही के निर्देश देगा ।
उनकी कार्यवाही से संतुष्ट होने पर जांच को वहीं रोक देगा अन्यथा आगे कार्यवाही करेगा ।
(1) जिस व्यक्ति के मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है, उसे लेकर राज्य सरकार को क्षतिपूर्ति की सलाह दे सकता है।
(2) किसी मामले को लेकर राज्य सरकार को जांच हेतु कह सकता है।

राज्य मानवाधिकार आयोग किन मामलों में कार्रवाही नहीं करता है ?
(1) 1 वर्ष से पुरानी घटना हो
 (2) सेना से संबंधित कोई मामला हो
 (3) किसी मामले पर पहले ही कार्यवाही कर रखी हो
 (4) किसी शिकायत में शिकायतकर्ता की जानकारी स्पष्ट नहीं हो

NOTE- अहमद गिरी समिति ने सिफारिश की NHRC व SHRC को 1 वर्ष पुराने मामलों में भी सुनवाई का अधिकार हो,परंतु मानी नहीं गई।

फोकस एरिया
राज्य मानवाधिकार आयोग ने समय-2 पर पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न, बलात्कार, मिलावटखोरी, बालश्रम आदि को रोकने हेतु राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं।
साथ ही पुलिस वह जेलों में ढांचागत सुधारों, प्रदूषण नियंत्रण, बच्चों की शिक्षा व एचआईवी एड्स से पीड़ित व्यक्तियों के अधिकारों को लेकर भी समय-समय पर राजस्थान सरकार को निर्देश दिए हैं।

NHRC के वर्तमान अध्यक्ष जस्टिस एच एल दत्तू ने 2017 में NHRC व SHRC को "दंतविहीन बाघ" कहां । (कागजी शेर)

कहने का आधार:-    
(1) 1 वर्ष से पुराने मामलों में सुनवाई का अधिकार नहीं
(2) राज्य सरकार इसकी सिफारिशों को गंभीरता से नहीं लेती है।
(3) स्वयं के कार्मिक नहीं
(4) सदस्यों व अध्यक्षो के पदों का लंबे समय तक रिक्त रहना। (सुनवाई समय पर नहीं)
(5) वित्तीय संसाधनों की कमी
(6) स्वयं  की जांच एजेसी नहीं
(7) वार्षिक प्रतिवेदन पर उचित चर्चा नहीं हो पाना।

सुझाव:-
(1) अहमद गिरी समिति की सिफारिशें लागू की जाए।
(2) राज्य सरकार द्वारा सलाह को गंभीरता से लिया जाना चाहिए
(3) स्वयं के कर्मचारी भर्ती किए जाए।
(4)शिकायत की उचित समय पर कार्यवाही हेतु सदस्यों वह अध्यक्षों की नियुक्ति समय पर की जाए।
(5) और अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध करा जाए।
(6) जांच एजेंसी उपलब्ध कराई जाए।
(7) वार्षिक प्रतिवेदन पर सदन में उचित चर्चा की जाए।

प्रश्न.राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष नहीं रहा है ?-
(a) सगीर अहमद.   (b) नगेंद्र कुमार जैन
(C) प्रकाश टाटिया     (d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर -  (d) इनमें से कोई नहीं

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