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आरबीआई के निर्णय अप्रैल 2020



आरबीआई का राहत पैकेज अप्रैल 2020

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने 17 अप्रैल 2020 को अर्थव्यवस्था के लिए कुछ अहम घोषणा की है -

अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति

आईएमएफ के अनुसार वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति अत्यधिक खराब है।
आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में वैश्विक अर्थव्यवस्था को 9 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होगा।
और संपूर्ण विश्व अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी के दौर से गुजरेगा।

आईएमएफ के अनुमान के अनुसार इस वर्ष विश्व के अधिकतर देशों की जीडीपी वृद्धि दर नकारात्मक रहेगी। अर्थात जीडीपी वृद्धि दर पिछले वर्ष की दर की तुलना में बढ़ने की बजाय कम होगी। परंतु भारत की जीडीपी वृद्धि दर सकारात्मक (1.9%) रहने का अनुमान है। जो कि भारत के लिए अन्य देशों की तुलना में राहत की बात है।

जी-20 देशों में भारत की स्थिति सबसे बेहतर है।
शक्तिकांत दास के अनुसार कोरोनावायरस के प्रभाव के बाद वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.4% रहेगी।

हाल ही भारत में मुद्रास्फीति (महंगाई) में 70 बेसिक प्वाइंट की कमी दर्ज की गई है। अब मुद्रास्फीति की दर 5.90% है, जिससे वस्तुएं सस्ती रहेंगी। जो कि इस स्थिति में सभी देशवासियों के लिए राहत की बात है।

विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त, करीब साल भर का आयात खर्च बोझ उठाने में हम सक्षम है।


अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आरबीआई ने दो प्रकार के उपाय किए हैं -
1. तरलता संबंधी उपाय
2. विनियामक उपाय

 तरलता संबंधी उपाय

अर्थव्यवस्था में खर्च करने योग्य धनराशि को तरलता कहा जा सकता है।

तरलता संबंधी निम्नलिखित चार सुधार किए गए -

1. टीएलटीआरओ 2.0

RBI जिस दर पर  बैंकों को अल्पकालीन ऋण /उधार देती है, वह दर रेपो रेट कहलाती है।

एलटीआरओ 1.0 क्या है ?
LTRO = Long Term Repo Operation.
यह आर्थिक मंदी से उबारने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा अपनाया जाने वाला उपकरण है, जिसके तहत बैंकों को 1 से 3 साल के लिए प्रभावी रेपो रेट पर धन उपलब्ध करवाया जाता है।
अर्थात RBI जिस रेपो दर पर  बैंकों को दीर्घकालीन ऋण /उधार देती है, वह एलटीआरओ कहलाती है।
निर्धारित मार्च के आखिरी सप्ताह में टीएलटीआरओ 1.0 की भी घोषणा की गई थी। इसके तहत मुहैया कराई गई पूरी राशि बड़े कॉरपोरेट और पब्लिक सेक्टर की कंपनियों को मिल गई थी।

टीएलटीआरओ 2.0 क्या है ?
TLTRO = Targeted Long Term Repo Operation.
जब दिए गए ऋण का उद्देश्य भी निर्धारित कर दिया जाता है, तो वह टीएलटीआरओ कहलाता है।
टीएलटीआरओ से आरबीआई बैंकों को 3 साल के लिए धन उपलब्ध कराता है। आरबीआई सस्ते दर पर फंड मुहैया कराता है।
बैंक कंपनियों के बांड और डिबेंचर्स को सब्सक्राइब कर उन्हें धन उपलब्ध कराते हैं।

आरबीआई ने बैंकों के लिए 50 हजार करोड़ रुपये के दूसरे टारगेटेड लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशन की घोषणा की है। ताकि बैंक इस रकम से एनबीएफसी और माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं को ऋण दे सकें।
एनबीएफसी और माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं छोटे उद्योगों को ऋण उपलब्ध कराती हैं।

23 अप्रैल 2020 को 50 हजार करोड़ रुपये में से 25 हजार करोड़ रुपये बैंकों को दे दिए जाएंगे।
इसके लिए सभी इच्छुक बैंक ई-कुबेर नामक कोर बैंकिंग सॉल्यूशन प्लेटफार्म से आवेदन कर सकते हैं। बैंकों को यह ऋण वर्तमान प्रभावी रेपो रेट पर 3 साल की अवधि के लिए मिलेगा।

बैंकों को ऋण की राशि में से 50% राशि आरबीआई के बताएं अनुसार निवेश/खर्च करनी होगी -
10% = माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं की प्रतिभूति में (सूक्ष्म वित्त संस्थान)
40% = (A) 15% धनराशि का उपयोग 500 करोड़ रुपए तक आकार वाली एनबीएफसी के लिए किया जाएगा।
(B) 25% धनराशि का उपयोग ऐसी एनबीएफसी के लिए किया जाएगा जिनका आकार 500 करोड़ रुपए से 5000 करोड़ रुपए तक है।

2. पुर्नवित्त Refinancing
तीन पुर्नवित्त संस्थाओं नाबार्ड, सिडबी और एनएचबी को अतिरिक्त 50 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
नाबार्ड को 25 हजार करोड़ रुपये, सिडबी को 15 हजार करोड़ रुपये और एनएचबी को 10 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
इससे ग्रामीण विकास, लघु उद्योग, कृषि और हाउसिंग सेक्टर में तरलता बढ़ेगी।

NOTE :- पुर्नवित्त संस्थाएं सीधे ग्राहकों को ऋण ना देकर मध्यवर्ती संस्थाओं के माध्यम से कार्य करती हैं। जैसे - नाबार्ड, को-ऑपरेटिव बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) के माध्यम से ऋण देता है।

NABARD = National Bank for Agriculture and Rural Development
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक

SIDBI = Small Industries Development Bank of India.
भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक

NHB =  National Housing Bank राष्ट्रीय आवास बैंक

3. तरलता नियंत्रण सुविधा (LAF)
Liquidity Adjustment Facility
आरबीआई की रेपो और रिवर्स रेपो संबंधी क्रियाएं तरलता नियंत्रण सुविधा कहलाती हैं।
रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, बैंक रेट और एमएसएफ (MSF) को आरबीआई की नीतिगत दरें कहा जाता है।

रिवर्स रेपो रेट 4% के स्थान पर 3.75% कर दी गई है।
जिस दर पर  बैंक, RBI को उधार /ऋण देते हैं।
अथवा बैंक आरबीआई में जब अपने पैसे रखते हैं तो उस पर उन्हें जो ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहा जाता है।
आरबीआई चाहता है, कि देश के बैंक इस समय आरबीआई में अपना पैसा जमा कराने की बजाय ज्यादा ऋण वितरित करें।

आरबीआई की वर्तमान नीतिगत दरें निम्न है -
 रेपो रेट = 4.40%
रिवर्स रेपो रेट = 3.75%
बैंक रेट = 4.65%
MSF = 4.65% 


4. अर्थोपाय अग्रिम Ways and Means Advance (WMA)
इसके तहत राज्य सरकारें, भारत सरकार की प्रतिभूतियों को आरबीआई के पास रखकर ऋण ले सकती हैं।
इस प्रावधान के तहत सरकारें रिजर्व बैंक से तत्काल कैश हासिल कर सकती हैं और 90 दिनों में ब्याज सहित वापस कर देती हैं।

राज्य सरकारों के लिए डब्ल्यूएमए लिमिट 30% से बढ़ाकर 60% कर दी गई है। अर्थात राज्य सरकारें अब अपने पास उपलब्ध भारत सरकार की कुल प्रतिभूतियों के 60% तक की धनराशि आरबीआई से ले सकती हैं। इस लिमिट के बढ़ने से राज्य सरकारें कोरोना राहत कार्य के लिए ज्यादा धनराशि हासिल कर सकेंगी।
60% की लिमिट वाली सुविधा 30 सितंबर 2020 तक लागू रहेगी।

विनियामक उपाय (नियमों में परिवर्तन संबंधी)

1. लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (एलसीआर)
बैंकों के लिए तरलता कवरेज अनुपात (एलसीआर) 100% से घटाकर 80% किया गया है।
17 अप्रैल 2020 से 30 सितंबर 2020 तक यह 80% रहेगा।
1 अक्टूबर 2020 से 31 मार्च 2021 तक यह 90% रहेगा।
1 अप्रैल 2021 के बाद वापस 100% कर दिया जाएगा।

2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद बैंकों को तरलता की दृष्टि से सशक्त बनाने हेतु बैंक ऑफ़ इंटरनेशनल सेटेलमेंट द्वारा एक कमेटी बनाई गई।
BIS = यह बैंकों का अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जो बैंकिंग सेक्टर के लिए नियम बनाता है। इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के बेसल नामक शहर में स्थित है।
इसके द्वारा बनाए गए नियमों को बेसल मानक (Basel Standard) कहा जाता है।

2010 में बेसल कमेटी ऑन बैंकिंग सुपरविजन के द्वारा एलसीआर के पालन का सुझाव दिया गया।

LCR =  प्रत्येक बैंक यह अनुमान लगाता है, कि भारी वित्तीय संकट की स्थिति में अगले 1 महीने के लिए उसके पास कितनी धनराशि होनी चाहिए।
बैंक अनुमानित आवश्यक धनराशि के बराबर मूल्य की हाई क्वालिटी लिक्विड असेट्स (HQLA) अपने पास रखते हैं, जिसे एलसीआर कहते है।

हाई क्वालिटी लिक्विड असेट्स (HQLA)
• सभी जगह मान्यता प्राप्त तरल संपत्ति (नगद में बदली जा सकने वाली)
• गिरवी रखी जा सकने वाली
• 100% परिवर्तनीय (Convertable)

2. एनपीए क्लासिफिकेशन (संपत्ति वर्गीकरण के संबंध में)
आम तौर पर अगर कर्ज धारक 90 दिन तक ब्याज या मूलधन का हिस्सा नहीं चुकाता है, तो उसे एनपीए की श्रेणी में डाल दिया जाता है।
आरबीआई ने मोरटोरियम लेने वाले ग्राहकों के एकाउंट को इस स्थिति में एनपीए न करने को कहा है। अर्थात लोन को एनपीए घोषित करने की सीमा 90 के बजाय 180 दिन कर दी गई है।

3. रेजोल्यूशन टाइम (Resolution Time)
अगर बैंक किसी डूबे लोन वाले अकाउंट को डिफॉल्ट के 210 दिनों या एनपीए में बदल जाने के 180 दिनों में रिजॉल्व नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त 20% राशि का प्रावधान करना होता है।
अब यह सीमा 90 दिन बढ़ा दी गई है।

4. लाभांश (डिविडेंड)
सभी कमर्शियल बैंक, एनबीएफसी और ऑल इंडिया फाइनेंसियल इंस्टिट्यूट (AIFI) के द्वारा 30 सितंबर 2020 तक लाभांश वितरण पर रोक लगा दी गई है।

5. लोन टू कमर्शियल रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स
एनबीएफसी के रियल एस्टेट ग्राहक अगर ऑपरेशन की कमर्शियल शुरुआत 1 साल तक (SCOD के 1 साल बाद तक) नहीं करते हैं तो उन खातों को एनपीए के रूप में वर्गीकृत नहीं करना होगा।
कमर्शियल बैंकों को पहले ही यह मंजूरी दे दी गई थी।

अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ाने के लिए जीडीपी के 3.2% के बराबर धन आर्थिक प्रणाली में डाला गया है।

हाल ही कोरोना महामारी के मद्देनजर 1 मार्च से 14 अप्रैल 2020 के दौरान आरबीआई द्वारा 1.2 लाख करोड़ रुपये की नई मुद्रा की आपूर्ति की गई है।

आरबीआई की उपरोक्त घोषणाओं का उद्देश्य कारोबार और अन्य गतिविधियों के लिए कर्ज़ की उपलब्धता बढ़ाना है। इससे बाजार में तरलता बढ़ेगी और मांग में वृद्धि होगी।


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