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कैसे होता है पेट्रोल और डीजल की कीमतों का निर्धारण ?



कैसे होता है पेट्रोल और डीजल की कीमतों का निर्धारण ?

भारत द्वारा ब्रेंट के Sweet, दुबई और ओमान के Sour तेल का मिश्रण खरीदा जाता है जिसे इंडियन बास्केट कहते हैं।
इंडियन बास्केट में हिस्सा -
Brent Sweet = 25%
दुबई और ओमान का Sour तेल = 75%
इंडियन बास्केट में वर्तमान (22 April) में कीमत $20 प्रति बैरल के आसपास चल रही है।

Oil well → FOB Price → Transportation & Insurance + Other Charges. → Custom Duty at Indian Port → Refinery → Oil Marketing Company → Transportation Charge at Oil Depo → Dealer Commission at Petrol Pump → Consumer.

FOB Price = Freight On Board Or Free On Board Price.

Refinery - भारत में 23 रिफाइनरी है। जिनमें 18 पीएसयू, 2 जॉइंट वेंचर और 3 प्राइवेट सेक्टर की है।

Oil Marketing Company - IOCL, HPCL, BPCL.

16 अप्रैल 2020 को दिल्ली में IOCL द्वारा तेल की कीमत -

  Base Price
 ₹27.96 (At Refinery)
  Freight Charge
 ₹0.32
 Additional Central Excise Duty
 ₹22.98
 Average Dealer Commission
 ₹3.54
 State VAT
 ₹14.79
 Total 
  ₹69.59

कच्चे तेल की कम कीमतों का भारत पर प्रभाव

1. भंडारण क्षमता को बढ़ाना - भारत के पास 90 दिनों के लिए तेल भंडारण की क्षमता है। साथ ही भारत ने सामरिक रिजर्व बनाए हुए हैं, जिनकी भंडार क्षमता 5.33 मिलियन मैट्रिक टन है।
भारत के तीन सामरिक रिजर्व मंगलौर, पादुर (कर्नाटक) और विशाखापट्टनम है, जो फिलहाल 60% तक भरे हुए हैं।
भारत द्वारा ओडिशा के चंडीखोल एवं कर्नाटक के पादुर में नए सामरिक रिजर्व भी बनाए जा रहे हैं।
भविष्य में बीकानेर और राजकोट में भी सामरिक रिजर्व बनाना प्रस्तावित है।

2. विदेशों में संपत्ति खरीद कर भी भंडारण किया जा सकता है। (Abroad Assets)

3. भारत के चालू खाता घाटे में कमी आएगी।

4. सरकार तेल पर टैक्स बढ़ा सकती है, जिससे होने वाली आय का उपयोग राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने अथवा कल्याणकारी योजनाओं में किया जा सकता है।
कीमतें कम होने से केंद्र सरकार का टैक्स रिवेन्यू तो बढ़ेगा परंतु राज्य सरकारों का टैक्स रिवेन्यू घटेगा, क्योंकि राज्य सरकारें है मूल्य संवर्धित कर (VAT) लगाती हैं।

5. मांग कम होने के कारण भारत के पेट्रोलियम पदार्थों के निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। गौरतलब है कि भारत प्रमुख रूप से पेट्रोलियम पदार्थों का निर्यात करता है।

6. मध्य-पूर्व एशिया की तेल आधारित अर्थव्यवस्थाएं (जैसे - सऊदी अरब) अपने खर्चों में कटौती करेंगे जिससे इन देशों में प्रवासी भारतीयों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न होगा।

इन देशों द्वारा भारत में किए जाने वाले निवेश पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

7. पश्चिम एशिया में भारत के हित प्रभावित हो सकते हैं।

8. भारत का घरेलू उत्पादन भी प्रभावित होगा।


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