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जी-20 समूह के बारे में संपूर्ण जानकारी

जी-20 क्या है ?

जी-20 समूह क्या है ?

यह 19 देश एवं यूरोपीय संघ का एक समूह है जिसकी स्थापना 1999 में की गई थी।
19 देश - कनाडा, यूएसए, मैक्सिको, ब्राजील, अर्जेंटीना, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, तुर्की, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, रूस, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, भारत।

यह प्रमुख विकसित एवं विकासशील देशों का मंच है, जो विश्व की 85% अर्थव्यवस्था, दो-तिहाई जनसंख्या तथा 80% व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।

1997 के एशियाई बाजारों के संकट की प्रतिक्रिया स्वरूप इसकी स्थापना की गई।

इसकी स्थापना सदस्य देशों के वित्त मंत्री व केंद्रीय बैंक के गवर्नर के सम्मेलन के रूप में की गई।
इसका मुख्य कार्य मौद्रिक और राजकोषीय नीति में समन्वय स्थापित करना है।

2007-08 की आर्थिक मंदी के बाद इसका पुनर्गठन किया गया तथा इसे राष्ट्रप्रमुखों और शासनाध्यक्षों का सम्मेलन बना दिया गया।

2008 में जी-20 का पहला सम्मेलन वाशिंगटन डीसी में आयोजित किया गया तब से इसके नियमित सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं -
2019 = ओसाका (जापान) 
21-22 नवंबर 2020 = रियाद (सऊदी अरब)
2021 = इटली                    2022 = भारत

जी-20 समूह के देशों को 5 समूहों में बांटा गया है। प्रतिवर्ष इन समूहों में जी-20 की बैठकों की अध्यक्षता रोटेट करती रहती है। वर्तमान (2020) में अध्यक्षता सऊदी अरब के पास है।
भारत दूसरे समूह में शामिल है।
दूसरे समूह में भारत के अलावा रूस, तुर्की और दक्षिण अफ्रीका सम्मिलित हैं।

जी-20 सम्मेलन में सदस्य देशों के अलावा आमंत्रित देशों (Invitee Countries) के प्रतिनिधि भी भाग लेते हैं।
स्पेन स्थाई आमंत्रित देश है।आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि बैठकों में भाग तो लेते हैं, लेकिन उनकी निर्णय लेने में कोई भूमिका नहीं होती है।

हाल ही 26 मार्च 2020 को आयोजित जी-20 समूह के आभासी सम्मेलन में स्पेन, जॉर्डन, सिंगापुर और स्विट्जरलैंड ने आमंत्रित देशों के रूप में भाग लिया।

जी-20 समूह के सम्मेलनों में अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी भाग लेते हैं।
हाल ही के आभासी सम्मेलन में विश्व बैंक, डब्ल्यूएचओ, संयुक्त राष्ट्र, डब्ल्यूटीओ, आईएमएफ, खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) तथा आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) ने भाग लिया है।

यहां वार्ता के लिए दो मुख्य ट्रैक बनाए गए हैं -

फाइनेंसियल ट्रैक - सदस्य देशों के वित्त मंत्री एवं केंद्रीय बैंक के गवर्नर भाग लेते हैं।
आर्थिक मुद्दों पर चर्चा की जाती है। जैसे - वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तिकरण, कर, आधारभूत संरचना का निर्माण।

शेरपा ट्रैक - प्रत्येक देश के द्वारा एक शेरपा नियुक्त किया जाता है जो कि जी-20 की बैठकों में उस देश का प्रतिनिधित्व करता है।
ये मुख्यतः गैर-आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं‌। जैसे जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद विरोध, भ्रष्टाचार विरोध।
भारत की तरफ से सुरेश प्रभु को शेरपा नियुक्त किया गया है।

जी-20 का कोई सचिवालय नहीं है।
बैठकों का आयोजन करने के लिए 3 देशों का प्रबंधकीय समूह बनाया जाता है, जिसमें वर्तमान अध्यक्ष, पूर्व अध्यक्ष और आगामी अध्यक्ष शामिल होते हैं।
वर्तमान में इसके प्रबंधकीय समूह में जापान, सऊदी अरब और इटली शामिल है।

नोट - शेरपा एक नेपाली शब्द है, जिसका अर्थ होता है - पर्वतारोहियों को गाइड करने वाला।

जी-20 आभासी सम्मेलन - 26 मार्च 2020

26 मार्च 2020 को कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी से निपटने हेतु उपायों को लेकर जी-20 देशों ने एक आभासी सम्मेलन आयोजित किया।
आभासी सम्मेलन का अर्थ है, कि सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भौतिक रूप से एक ही जगह उपस्थित ना होकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सम्मेलन में भाग लिया।

भारत की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन में भाग लिया।

उद्देश्य - कोविड-19 महामारी से निपटने के उपायों पर चर्चा हेतु।

निम्न बातों पर सहमति बनी -

1. कोविड-19 एकजुटता का प्रतिक्रिया कोष बनाया जाना चाहिए। (Solidarity Response Fund)
जिससे विश्व अर्थव्यवस्था में 15 ट्रिलियन डॉलर की तरलता उपलब्ध करवाई जाए।
यह कोष अलग से कोई कोष नहीं है, बल्कि यह विभिन्न देशों द्वारा अपने देश में कोविड-19 से निपटने हेतु की गई आर्थिक घोषणाओं का योग है। जैसे - भारत ने 1.7 लाख करोड रुपए के पैकेज की घोषणा की।

2. महामारी संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाना चाहिए।

3. मंत्रीस्तरीय वार्ताओं में वृद्धि की जानी चाहिए।

4. वित्तीय बाजार को  पुनः बहाल किया जाना चाहिए, ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रंखला (Global Supply Chain) को बनाए रखा जा सके।

5. सामूहिक सहयोग किया जाना चाहिए।

सम्मेलन की कमियां -

1. लॉकडाउन को लेकर मतभेद।
यूएसए के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो लॉकडाउन के विरोध में थे, जबकि कुछ देश जैसेेे भारत, सिंगापुर लॉकडाउन के समर्थन में थे।

2. डब्ल्यूएचओ की भूमिका।

3. सम्मेलन में बनी सहमतियों को लागू करने को लेकर कंक्रीट प्लान का अभाव रहा।

4. नई विश्व अव्यवस्था पर चर्चा नहीं की गई।


जी-20 आभासी सम्मेलन - 21-22 नवंबर 2020

21-22 नवंबर 2020 को सऊदी अरब की अध्यक्षता में जी-20 देशों का आभासी सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।
• यह सम्मेलन मुख्य रूप से कोरोना महामारी के प्रभावों से उबरने के उपायों, स्वास्थ सुविधाओं को लेकर भावी योजनाओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर केंद्रित है।

• इटली दिसंबर 2021 में जी-20 देशों की अध्यक्षता करेगा, 2022 में इंडोनेशिया जबकि 2023 में भारत जी-20 की अध्यक्षता करेगा।
2024 में ब्राजील अध्यक्षता करेगा। 

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1 Comments

  1. Dev bhai.. Sb ke currents topic ki pdf kaise download kre...

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