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आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955




आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955

(Essential Commodities Act 1955)

भारत में खाद्य पदार्थों की जमाखोरी को रोकने के लिए यह अधिनियम बनाया गया।

हाल ही सरकार ने इस अधिनियम के तहत 2 प्लाई, 3 प्लाई सर्जिकल मास्क, एन 95 मास्क, सैनिटाइजर को 30 जून 2020 तक आवश्यक वस्तु घोषित किया है।


इससे सरकार इनके उत्पादन, वितरण एवं आपूर्ति को  नियंत्रित कर सकती है। जिससे उचित मूल्य पर सभी लोगों को समान रूप से आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया जा सकता है।

सरकार उत्पादन कंपनियों पर आपातकालीन स्थिति में अधिक उत्पादन के लिए दबाव बना सकती है।

इसी के साथ-2 सरकार ने विधिक माप विज्ञान अधिनियम  2009  (Legal Metrology Act 2009) के तहत भी एक एडवाइजरी जारी की है, जिसके तहत राज्य सरकारें आवश्यक वस्तुओं को एमआरपी से अधिक मूल्य पर बेचने पर कार्रवाई कर सकती है।

Prevention of black marketing and supply of essential Commodities act 1980
चोर बाजारी निवारण और आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम, 1980 का भी प्रयोग किया गया है।

सजा के निम्न प्रावधान है ?
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत 7 साल की कैद, जुर्माना या दोनों सजाओं का प्रावधान है।
चोर बाजारी निवारण और आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम, 1980 के तहत 6 महीने नजरबंद भी रखा जा सकता है।

सन 2006 में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन किया गया और 7 वस्तुओं को आवश्यक वस्तुओं के रूप में जोड़ा गया  -

1. Drugs नशीले पदार्थ      2. Fertilisers उर्वरक

3. Food stuff खाद्यान्न सामग्री (गन्ना, तिलहन, गेहूं...)

4. Hankyarn made wholly from cotton कपास से बनी सूती सामग्री

5. पेट्रोलियम और पेट्रोलियम पदार्थ

6. जूट और जूट से बनी सामग्री

7. खाद्यान्न फसलों, चारा फसलों और जूट फसलों के बीज

भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की एंट्री 33 के तहत अन्य वस्तुओं को भी आवश्यक वस्तुओं के रूप में शामिल किया जा सकता है और एक निश्चित समय के बाद हटाया जा सकता है।

ये सभी प्रावधान 2006 में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में धारा 2A जोड़कर किए गए।



NOTE - चाय आवश्यक वस्तुओं में शामिल नहीं है।

यदि कोई व्यापारी या दुकानदार आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी, जमाखोरी कर रहा है या एमआरपी से अधिक मूल्य पर बेच रहा है, तो उसकी शिकायत हेल्पलाइन नंबर 1800-11-4000 पर की जा सकती है अथवा consumerhelpline.gov.in पर भी ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की आलोचना

आर्थिक समीक्षा 2019-20 में आलोचना की गई है -

1. वर्तमान में भारत अपनी आवश्यकता से अधिक खाद्यान्न उत्पादित करता है। अतः वर्तमान में यह अधिनियम अप्रासंगिक है।

2. यह अधिनियम भंडारण और जमाखोरी में विभेद नहीं करता है।

3. भंडारण अनुमति नहीं देने के कारण यह अधिनियम बड़ी भंडार अवसंरचना बनाने में अवरोधक है। (Storage Infrastructure)
जिसके कारण कृषि उत्पादों की मूल्य श्रंखला विकसित नहीं हो पाती है। (Value Chain)

4. किसी भी वस्तु या उत्पाद के वितरण , आपूर्ति, उत्पादन को नियंत्रित करना मुक्त बाजार के लिए सही नहीं है। (Free Market)

5. उत्पादों के लिए राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होने में बाधक है। (National Market)

सुधार के सुझाव

आर्थिक समीक्षा 2019-20  में सुझाव दिया गया है, कि इस अधिनियम में व्यापक परिवर्तन किए जाए और इसे सामान्य परिस्थितियों में लागू नहीं किया जाना चाहिए।केवल प्राकृतिक आपदा, राष्ट्रीय संकट, युद्ध या किसी ऐसे समय जब किसी उत्पाद की आपूर्ति 10 से 15% तक गिर जाए, तभी इस अधिनियम का प्रयोग किया जाना चाहिए 

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