आपका स्वागत है, डार्क मोड में पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें अपडेट के लिए टेलीग्राम चैनल DevEduNotes से जुड़ेें

भगत आंदोलन ।। राजस्थान में जनजातीय आंदोलन




राजस्थान में जनजातीय आंदोलन


राजस्थान में सर्वाधिक जनसंख्या वाली जनजातियां निम्नलिखित हैं - मीणा > भील > गरासिया

भील राजस्थान की सबसे प्राचीनतम जनजाति है।
भील जनजाति मुख्यतः दक्षिणी राजस्थान में निवास करती है।
मेवाड़, वागड़, सिरोही - राजस्थान
मालवा   - मध्य प्रदेश
ईडर, सूंथ, विजयनगर - गुजरात

भील जनजाति ने प्रमुख रूप से दो आंदोलन किए -
1. भगत आंदोलन - गोविंद गिरी द्वारा शुरू
2. एकी आंदोलन - मोतीलाल तेजावत द्वारा शुरू


भगत आंदोलन

भगत आंदोलन मेवाड़ एवं वागड़ क्षेत्र के भीलों ने शुरू हुआ किया था जो कालांतर में ईडर, विजयनगर, मालवा क्षेत्र में फैल गया।

1818 में मेवाड़ महाराणा भीमसिंह ने अंग्रेजों के साथ संधि की।

भगत आंदोलन के कारण

1. मेवाड़ के पहले पॉलिटिक्ल एजेंट कर्नल जेम्स टॉड ने भीलों के मुखिया गमेती को दिया जाने वाला बोलाई एवं रखवाली कर पर रोक लगा दी थी।
बोलाई - राजमार्ग कर
रखवाली - गांव रक्षा कर

2. भील क्षेत्रों में नियंत्रण हेतु सहायक पॉलिटिक्ल एजेंट की नियुक्ति की गई। साथ ही 1841 में मेवाड़ भील कोर का गठन किया गया। मेवाड़ भील कोर का मुख्यालय खैरवाड़ा, उदयपुर में था। (मेवाड़ महाराजा से 50,000 रुपए खर्च लिया जाता था)

3. सेना भंग होने के कारण भील बेरोजगार हो गए।

4. भीलों की परंपरागत खेती (झूम कृषि) समाप्त कर दी गई।

5. भीलों के वनों में अधिकार समाप्त कर दिए गए।

6. उन पर बेगार प्रथा थोपी गई।

7. भील साहूकारों के चंगुल में फंसने लगे।

8. भीलों के सामाजिक रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप किया गया। जैसे - 1853 में मेवाड़ महाराजा स्वरूप सिंह ने डाकन प्रथा पर रोक लगा दी।

9. महुआ के पौधों से शराब बनाने पर रोक लगा दी गई।

10. तंबाकू, अफीम आदि पर नए चुंगीकर लगा दिए गए।

11. अंग्रेज और भीलों के बीच कुछ संघर्ष की घटनाएं घटित हुई। जैसे - बारापाल, पडूना, भौराईपाल घटना।

12. 1881 में भारत की पहली नियमित जनगणना के दौरान फैली अफवाह। (लॉर्ड रिपन के समय)

भगत आंदोलन गोविंद गिरी ने चलाया था।
गोविंद गिरी का जन्म बंजारा जाति में डूंगरपुर के वेदसा नामक गांव में हुआ।
कोटा-बूंदी अखाड़े के महंत राजगिरी गोविंद गिरी के गुरु थे।
इन्होंने वेदसा गांव में धूणी एवं निशान स्थापित किया।
गोविंद गिरी के अनुयायियों को भगत कहा जाता था।
इन भक्तों के सहयोग शुरू आंदोलन को भगत आंदोलन कहा जाता है। जिनमें गोविंद गिरी का प्रमुख सहयोगी सुरजी भगत था।

गोविंद गिरी ने भीलों का नैतिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक उत्थान किया। जैसे - भीलों को चोरी करने एवं शराब पीने से मना किया और एकेश्वरवाद पर बल दिया।
सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया।

गोविंद गिरी स्वामी दयानंद सरस्वती से प्रभावित थे और इन्होंने स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा दिया तथा भीलों को हिंदू धर्म में रखने के लिए भगत पंथ की स्थापना की।

1883 में गोविंद गिरी ने भीलों में एकता स्थापित करने के लिए सम्प सभा की स्थापना की।

1903 में अम्बादरा गांव (वर्तमान में बांसवाड़ा) की मानगढ़ पहाड़ी पर सम्प सभा का पहला अधिवेशन बुलाया गया।

1908 में गोविंद ईडर की ओर चले गए।

24 फरवरी 1910 को ईडर में पालपट्टा गांव के सामंत ने भीलों के साथ समझौता किया।

1910 में सम्प सभा ने सरकार के सामने 33 मांगे रखी।

1911 में गोविंद गिरी अपने क्षेत्र में वापस लौट आए और भगत पंथ को पुनः संगठित करना शुरू किया।

1913 में मानगढ़ पहाड़ी पर सम्प सभा के अधिवेशन के दौरान आक्रोशित भीलों ने गुल मुहम्मद नामक पुलिस अधिकारी की हत्या कर दी।
17 नवंबर 1913 को पुलिस ने पहाड़ी को घेरकर अंधाधुंध फायरिंग की जिसमें 1500 भील शहीद हो गए।
इस घटना को राजस्थान का जलियांवाला हत्याकांड कहा जाता है।
गोविंद गिरी एवं पूंजा धीरजी को गिरफ्तार कर लिया गया।
गोविंद गिरी को 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई।कालांतर में 1923 में उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।

गोविंद गिरी ने अपना शेष जीवन गुजरात के कांबिया नामक गांव में व्यतीत किया।
गोविंद गिरी शांति के समर्थक थे।
इनका सफेद झंडा अहिंसा का प्रतीक था।

प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा को मानगढ़ पहाड़ी पर मेला लगता है।


SAVE WATER

Post a Comment

0 Comments