आपका स्वागत है, डार्क मोड में पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें अपडेट के लिए टेलीग्राम चैनल DevEduNotes से जुड़ेें

15वें वित्त आयोग की सिफारिशें



15वें वित्त आयोग की सिफारिशें


भारत एक संघीय राज्य (Federal State) है। अर्थात भारत में केंद्र एवं राज्य सरकार दोनों का सह-अस्तित्व है।
संविधान की अनुसूची 7 (Schedule 7) के तहत केंद्र एवं राज्य सरकारों के मध्य कार्य विभाजन किया गया है -
संघ सूची
राज्य सूची
समवर्ती सूची

वित्त आयोग - वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है।
संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत केंद्र एवं राज्यों के मध्य कर बंटवारे को लेकर प्रति 5 वर्ष में वित्त आयोग के गठन का प्रावधान है।
वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।

प्रथम वित्त आयोग
1951 में पहले वित्त आयोग का गठन किया गया।
प्रथम वित्त आयोग के चेयरमैन के सी नियोगी थे।
अब तक 15 वित्त आयोगों का गठन किया जा चुका है।

वित्त आयोग की संरचना
वित्त आयोग में एक चेयरमैन एवं चार सदस्य होते हैं।
अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

वित्त आयोग अधिनियम-1951 के अनुसार -

1. वित्त आयोग का अध्यक्ष/चेयरमैन सार्वजनिक मामलों का जानकार होना चाहिए। (Experience in public affairs)

2. सदस्यों की योग्यता -
(A) हाईकोर्ट का जज हो या हाईकोर्ट का जज बनने की योग्यता रखता हो
(B) जिसे सरकार के वित्त (Finances) एवं लेखा (Accounts) की जानकारी हो।
(C) जिसे वित्तीय एवं प्रशासनिक मुद्दों का अनुभव हो।
(D) वह एक विशेषज्ञ अर्थशास्त्री हो।

वित्त आयोग के कार्य
1. केंद्र एवं राज्य सरकारों के मध्य करों का बंटवारा करना।
2. यह निर्णय लेना कि अनुच्छेद 275 के तहत संचित निधि में से राज्यों को अनुदान/सहायता दिया जाना चाहिये या नहीं।
3. राज्य सरकारों को सलाह देना कि वे किस प्रकार पंचायतों एवं नगरपालिकाओं के संसाधनों की आपूर्ति के लिए अपनी संचित निधि को बढ़ा सकते हैं।
4. राष्ट्रपति द्वारा निर्देशित वित्त संबंधी मामलों पर सलाह देना।

NOTE- वित्त आयोग अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है।
सरकार के लिए वित्त आयोग की सिफारिशें मानना बाध्यकारी नहीं है।

राज्य वित्त आयोग
राज्य वित्त आयोग एक ऐसी संस्था है, जिसका गठन संविधान के 73वें और 74वें संशोधन के द्वारा 1993 में किया गया था।
राज्य वित्त आयोग, राज्य एवं उसके अधीन स्थानीय संस्थाओं (पंचायत एवं नगरपालिकाओं) के मध्य वित्तीय संबंधों से संबंधित सिफारिश करता है।
इसका गठन अनुच्छेद 243 (I) और अनुच्छेद 243 (Y) के तहत प्रति 5 वर्ष में किया जाता है।

15वां वित्त आयोग


नवंबर 2017 को 15वें वित्त आयोग का गठन किया गया। (राष्ट्रपति के गजट नोटिफिकेशन द्वारा)
कार्य - 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2025 तक के लिए केंद्र एवं राज्यों के बीच कर बंटवारे को लेकर अपनी सिफारिशें देना।

15वें वित्त आयोग की संरचना

चेयरमैन - एन के सिंह
सदस्य - 1. अशोक लाहिड़ी       2. अनूप सिंह
             3.अजय नारायण झा    4. रमेश चंद
अजय नारायण झा शक्तिकांत दास के स्थान पर सदस्य बने।
सचिव - अरविंद मेहता

नवंबर 2019 को गजट नोटिफिकेशन में 15वें वित्त आयोग को 2 रिपोर्ट देने के लिए कहा गया -
पहली रिपोर्ट - 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक की अवधि के लिए।
दूसरी रिपोर्ट - 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि के लिए।

15वें वित्त आयोग द्वारा पहली रिपोर्ट 30 नवंबर 2019 को सौंप दी गई।
दूसरी रिपोर्ट को 30 अक्टूबर 2020 तक सौंप दिया जाएगा।

ऊर्ध्वाधर बंटवारा Vertical Devolution
केंद्र करो में कितना प्रतिशत हिस्सा राज्यों को देगा।

क्षैतिज बंटवारा Horizontal Devolution
केंद्र से प्राप्त कुल आय का राज्यों के बीच बंटवारा।
वित्त आयोग द्वारा क्षैतिज बंटवारे का सूत्र दिया जाता है।

वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें

वित्त आयोग       चेयरमैन          ऊर्ध्वाधर/ सिफारिश
11वां              ए एम खुसरो          29.5%
12वां              सी रंगराजन          30%
13वां             विजय केलकर       32%
14वां              वाई वी रेड्डी           42%
15वां              एन के सिंह          41%

जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख नए केंद्र शासित प्रदेश गठित होने के कारण 15वें वित्त आयोग ने 1% की कमी की है।

क्षैतिज बंटवारा

Criteria                             14वां आयोग             15वां आयोग

Income Distance                 50%                         45%
(आय दूरी)

Population (1971)               17.5%                      nill

Population                          10%                         15%

Area (क्षेत्र)                          15%                         15%

Forest Cover                      7.5%                        nill
(वनाच्छादित क्षेत्र)

Forest Cover & Ecology      nill                        10%

Demographic Performance   nill                      12.5%
(जनांकीय निष्पादन)

Tax effort (कर प्रयास)     nill                             2.5%


15वें वित्त आयोग की अनुदान संबंधी सिफारिशें

1. 14 राज्यों को 73,340 करोड़ रुपये का  राजस्व घाटा अनुदान आवंटित किया जाना चाहिए। (Revenue Deficit Grant)

2. तीन राज्यों कर्नाटक, मिजोरम, तेलंगाना को 6,764 करोड रुपए का विशेष अनुदान आवंटित किया जाना चाहिए। (Special Grant)

3. पोषण के लिए क्षेत्र विशिष्ट अनुदान की बात की गई है।
 (Sector Specific Grant only for Nutrition)

NOTE:- दूसरी रिपोर्ट में Health, Pre-primary education, judiciary, railways, housing, rural connectivity, police training आदि के लिए क्षेत्र विशिष्ट अनुदान की सिफारिश की जाएगी।

4. स्थानीय निकायों के लिए 90,000 करोड़ रुपए के आवंटन की सिफारिश की गई है।
पंचायतों के लिए = 60,750 करोड़ रुपए
नगरपालिकाओं के लिए = 29,250 करोड़ रुपए

राज्यों के बीच बंटवारे के लिए दो क्षेत्र (Criteria) निर्धारित किए हैं -
Population (जनसंख्या) = 90%
Area (क्षेत्र)  = 10%

Performance Based Grants

1. कृषि संबंधी सुधारों का क्रियान्वयन ( Implementation of agricultural reforms)

2. आकांक्षी जिलों का विकास (Development of aspirational districts and blocks)

3. ऊर्जा क्षेत्र में सुधार (Power sector reform)

4. व्यापार बढ़ाने के लिए किए गए प्रयास (Enhancing Trade Including Export)

5. शिक्षा को प्रोत्साहन (Incentives for education)

6. पर्यटन को बढ़ावा (Tourism)

NOTE:- Performance Based Grants के बारे में पहली रिपोर्ट में कोई बात नहीं की गई है।
इसकी चर्चा दूसरी रिपोर्ट में की जाएगी।

आपदा जोखिम प्रबंधन संबंधी सिफारिश

1. राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन कोष बनाया जाना चाहिए।
(National Disaster Risk Management Fund)

2. राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष बनाया जाना चाहिए।
इस कोष में केंद्र सरकार का 75% एवं राज्य सरकार का 25% अंशदान होगा।
पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों के मामले में केंद्र सरकार का अंशदान 90% एवं राज्य सरकार का अंशदान 10% होगा।

अन्य सिफारिशें

1. राजकोषीय घाटा एफआरबीएम कानून के अनुसार होना चाहिए। (Fiscal Deficit)
2. कर क्षमता को बढ़ाया जाना चाहिए। (Tax Capacity)
3. जीएसटी क्रियान्वयन संबंधित चिंताए -
(A) अनुमान की तुलना में जीएसटी संग्रह कम हो रहा है।(Large shortfall in collection as compared to original forecast)

(B) कर संग्रह में अधिक उतार-चढ़ाव (High volatility in collection)

(C) IGST का संचय अधिक (Accumulation of large IGST)

(D) जीएसटी रिफंड में देरी

4. सुरक्षा संबंधी खर्चों का वित्त पोषण (Financing security related expenditure)

Click to Join Springboard Youtube Channel

SAVE WATER

Post a Comment

0 Comments